मेरठ के बहुचर्चित Saurabh Rajput Murder Case में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित परिवार को 14 अक्टूबर को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मुख्य दोषी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े दोनों दोषी सजा का ऐलान होते ही फूट-फूटकर रोने लगे। वहीं, कोर्ट रूम में मौजूद मृतक सौरभ राजपूत की मां रेणू देवी और भाई राहुल की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। हालांकि, ये आंसू न्याय मिलने की खुशी के थे। लेकिन इस कड़े फैसले के बाद मुस्कान की जेल में जन्मी छोटी बेटी के भविष्य को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

सौरभ की मां का बच्ची को अपनाने से साफ इनकार सजा सुनाए जाने के बाद सौरभ की मां रेणू देवी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे लंबे समय से इसी दिन का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को फांसी की ही सजा मिलनी चाहिए थी। हालांकि, मुस्कान की छोटी बेटी राधा (जिसका जन्म जेल में हुआ था) के बारे में पूछे जाने पर उनका रुख बेहद सख्त नजर आया।

रेणू देवी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जेल में बंद मुस्कान की छोटी बेटी से उनके परिवार का कोई भी संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, "हम उस बच्ची को न तो अपनाना चाहते हैं और न ही उसे अपने साथ रखना चाहते हैं। अगर कानूनी रूप से या किसी अन्य माध्यम से हम पर DNA टेस्ट कराने का दबाव बनाया जाएगा, तो हमारा परिवार इसके लिए भी बिल्कुल तैयार नहीं होगा। हमें सिर्फ न्याय चाहिए था, जो अदालत ने दे दिया है।"

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पहले की थी DNA टेस्ट की मांग गौरतलब है कि रेणू देवी का यह बयान उनके पिछले रुख से बिल्कुल अलग है। इससे पहले, जब 24 नवंबर 2026 को मुस्कान ने जेल में बेटी को जन्म दिया था, तब सौरभ की मां ने खुद प्रशासन से बच्ची का DNA टेस्ट कराने की मांग की थी। उस समय उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर जांच में बच्ची सौरभ की साबित होती है, तो उनका परिवार उसे अपना लेगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। लेकिन अब फांसी की सजा मुकर्रर होने के बाद उन्होंने इस मामले से पूरी तरह किनारा कर लिया है।

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मुस्कान के माता-पिता ने भी मोड़ा मुंह केवल सौरभ का परिवार ही नहीं, बल्कि मुस्कान के अपने माता-पिता ने भी उससे और उसकी बच्ची से दूरी बना ली है। 14 अक्टूबर को सजा सुनाए जाने से ठीक पहले मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी और मां कविता ने पुलिस के माध्यम से अदालत को एक पत्र सौंपा था।

इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि मुस्कान को चाहे जो भी सजा मिले, उन्हें उससे कोई मतलब नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि वे अब अपनी बेटी से भविष्य में कभी मुलाकात नहीं करेंगे और उन्होंने भी कोर्ट से मुस्कान को फांसी दिए जाने की पैरवी की थी। पत्र में उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जेल में जन्मी अपनी नातिन से भी उनका कोई वास्ता नहीं है। इस तरह मुस्कान की छोटी बेटी को दोनों ही परिवारों ने अपनाने से इनकार कर दिया है।

6 साल तक नहीं होगी फांसी, नारी निकेतन में रहेगी बच्ची मौत की सजा मिलने के बावजूद मुस्कान को तुरंत फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया जाएगा। कानूनी और मानवीय नियमों के अनुसार, चूंकि मुस्कान ने 24 नवंबर 2026 को एक बच्ची को जन्म दिया है, इसलिए जब तक बच्ची 6 साल की नहीं हो जाती, तब तक फांसी की सजा पर अमल नहीं किया जाएगा। इस दौरान बच्ची के लालन-पालन की पूरी जिम्मेदारी मुस्कान की ही होगी। कोर्ट के आदेश के बाद अब मुस्कान को उसकी बेटी राधा के साथ लखनऊ के नारी निकेतन में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है, जहां वह बच्ची के बड़े होने तक रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति तक जाएगी फाइल फांसी की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) केके चौबे ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फैसले की प्रमाणित कॉपी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। नियम के मुताबिक, निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को हाई कोर्ट से कन्फर्म कराना अनिवार्य होता है।

लगभग एक सप्ताह बाद यह फाइल हाई कोर्ट भेजी जाएगी। यदि हाई कोर्ट फांसी की सजा को बरकरार रखता है, तो मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा। वहां से भी मुहर लगने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने का विकल्प होता है। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन साल का समय आसानी से लग सकता है।

बड़ी बेटी पीहू को लेकर भी परिवार में तनाव इस घटनाक्रम के बीच सौरभ के भाई राहुल ने मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू की कस्टडी की मांग उठाई है। राहुल का कहना है कि पीहू फिलहाल मुस्कान के माता-पिता के पास है, जो उसे सौंपने को तैयार नहीं हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि पीहू के नाना-नानी उसकी ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहे हैं और बच्ची को सामान्य स्कूल तक नहीं भेजा जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका भाई सौरभ अपनी बेटी पीहू को पढ़ाने के लिए लंदन भेजना चाहता था, लेकिन अब उसका भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।

बता दें कि 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या कर उसके शव के पांच टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपा दिए गए थे। इसी क्रूर हत्याकांड में Saurabh Rajput Murder Case की सुनवाई करते हुए अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

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