देशभर में SIR (Systematic Voter Education and Electoral Participation से जुड़ी मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया) पूरी होने के बाद बड़े पैमाने पर Voter List Name Deletion (वोटर लिस्ट से नाम कटने) की शिकायतें सामने आ रही हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक तमाम राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठा रही हैं और विरोध दर्ज करा रही हैं। ऐसे में आम जनता और मतदाताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मतदाता सूची से नाम कट जाने के बाद वे आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे?

इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब है— 'हां, आप बिल्कुल वोट दे सकते हैं।' चुनाव आयोग के नियमानुसार वोटर लिस्ट में आपका नाम दोबारा भी जुड़वाया जा सकता है। इसके लिए आपको किसी भी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने या लंबी कतारों में खड़े होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग नागरिकों की सुविधा के लिए तीन मुख्य सेवाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराता है:

  1. वोटर लिस्ट में नाम दोबारा दर्ज कराना।

    विज्ञापन
    विज्ञापन
  2. नाम, पता या अन्य जानकारियों में संशोधन करना।

    खबरों के लिए ज्वाइन करें हमारा Whatsapp Channel
  3. मृतक का नाम लिस्ट से हटवाना या फर्जी व डुप्लीकेट वोटरों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराना।

ऑनलाइन माध्यम: 10 मिनट में घर बैठे करें आवेदन

यदि आपका नाम मतदाता सूची से कट गया है, तो आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से घर बैठे आसानी से पुन: आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करें:

  1. सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं।

  2. अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी (OTP) दर्ज करके एक नया अकाउंट बनाएं और लॉगिन करें।

  3. पोर्टल के मुख्य पृष्ठ पर दिए गए 'न्यू वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6)' विकल्प पर क्लिक करें।

  4. इसके बाद अपने राज्य, जिले और संबंधित विधानसभा क्षेत्र का सही चुनाव करें।

  5. अपना पूरा नाम, माता/पिता या पति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करें।

  6. अपनी सही जन्मतिथि और वर्तमान निवास का पूरा पता फॉर्म में भरें।

  7. आवश्यक दस्तावेज डिजिटल फॉर्मेट में अपलोड करें, जिसमें पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र (जैसे 10वीं की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र) और निवास प्रमाण पत्र (तहसील या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी) शामिल हैं।

  8. SIR अभियान से प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों के लिए दिए गए सेल्फ डिक्लेरेशन (स्व-घोषणा) फॉर्म को भरकर सबमिट करें।

  9. फॉर्म सबमिट होते ही आपको 12 अंकों का एक विशिष्ट रेफरेंस नंबर प्राप्त होगा। इस नंबर की मदद से आप अपने आवेदन की स्थिति (Status) को कभी भी ट्रैक कर सकते हैं।

ऑफलाइन माध्यम: बीएलओ (BLO) की मदद से भरें फॉर्म-6

जो नागरिक ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं या सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, वे ऑफलाइन प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए अपने मतदान केंद्र के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से संपर्क करना होगा।

आप बीएलओ से फॉर्म-6 प्राप्त कर सकते हैं अथवा आधिकारिक पोर्टल से इसे डाउनलोड करके प्रिंट भी निकाल सकते हैं। फॉर्म में अपना नाम, पता, जन्मतिथि और पिछले वोटर आईडी कार्ड की सही-सही जानकारी भरें। फॉर्म के साथ अपनी पासपोर्ट साइज फोटो और पहचान व निवास प्रमाण पत्र की छायाप्रति (Self-attested photocopies) संलग्न करें।

तैयार फॉर्म अपने बीएलओ को सौंप दें। फॉर्म जमा करते समय बीएलओ के हस्ताक्षर और तारीख से युक्त पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) लेना न भूलें। यदि तय समयसीमा में आपका आवेदन प्रोसेस नहीं होता है, तो इसी रसीद के आधार पर आप चुनाव आयोग के हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

आवेदन जमा होने के बाद कैसे होगी जांच?

फॉर्म जमा हो जाने के उपरांत आपके क्षेत्र के बीएलओ आपके दिए गए पते पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेंगे। वे आपके द्वारा प्रस्तुत किए गए पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल करेंगे।

सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएलओ अपनी रिपोर्ट चुनाव अधिकारियों को सौंपेंगे। बीएलओ की अनुकूल रिपोर्ट के आधार पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) फॉर्म को मंजूरी प्रदान करेंगे। फॉर्म अप्रूव होते ही आपका नाम पुनः वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा और आपका नया डिजिटल व प्लास्टिक वोटर आईडी कार्ड (EPIC) डाक सेवा द्वारा आपके पंजीकृत पते पर भेज दिया जाएगा।

बीएलओ द्वारा फॉर्म न लेने या समस्या आने पर यहां करें शिकायत

यदि कोई बीएलओ आपका फॉर्म-6 स्वीकार करने से मना करता है या आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनुचित बाधा उत्पन्न होती है, तो निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई के प्रावधान किए हैं। आप चुनाव आयोग के राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 1950 पर सीधे कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त voters.eci.gov.in पोर्टल के 'रजिस्टर कंपलेन' (Register Complaint) सेक्शन में जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश में 10 से 25 अक्टूबर तक चलेगा विशेष सत्यापन अभियान

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में नई मतदाता सूची के पुन: सत्यापन के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह सत्यापन अभियान 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक संचालित किया जा रहा है। इस दौरान तीन रविवार— 11 अक्टूबर, 18 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इन तिथियों पर सभी बीएलओ सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संबंधित पोलिंग बूथों पर फॉर्म-6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहेंगे।

प्रतापगढ़ के बाबागंज विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ मुकेश कुमार पटेल के अनुसार, इस पुन: सत्यापन अभियान के तहत मुख्य रूप से तीन प्रकार के मतदाताओं की जांच की जा रही है:

  • ऐसे मतदाता जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान एक से अधिक स्थान पर पाए जाने के कारण हटा दिए गए थे।

  • वे लोग जिन्हें भूलवश या गलत जानकारी के आधार पर मृतक मानकर लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

  • ऐसे पात्र नागरिक जिन्हें पूर्व में नोटिस तो जारी किया गया था, परंतु वे समय पर वांछित दस्तावेज जमा नहीं करा सके थे।

बेघर लोगों और श्रमिकों के लिए लगेंगे विशेष बूथ कैंप

निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि समाज के वंचित वर्ग, बेघर नागरिकों, रैन बसेरों में रहने वाले लोगों और मजदूर बस्तियों के निवासियों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएं।

बीएलओ द्वारा प्राथमिक जांच के बाद जो ड्राफ्ट लिस्ट तैयार की जाएगी, उसकी रिपोर्ट निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को सौंपी जाएगी। इसके बाद यह बूथवार सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा की जाएगी। इस पारदर्शी प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी योग्य और पात्र नागरिक अपने लोकतांत्रिक मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित न रह जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें