उत्तर प्रदेश में इन दिनों जहां एक तरफ भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का प्रकोप जारी है, वहीं दूसरी तरफ मेरठ में एक बड़े बिजली संकट (Power Crisis) की आहट सुनाई दे रही है। शहर की बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले, तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी में बिजली के खंभों पर चढ़कर फॉल्ट ठीक करने वाले संविदा कर्मचारी आज खुद गहरे अंधकार और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। अपनी इसी बदहाली और ठेकेदार कंपनियों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाते हुए 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति' (NSEWA) ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संगठन ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक (MD) सहित तमाम आला अधिकारियों को एक कड़ा पत्र लिखकर 11 जून 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार (हड़ताल) की चेतावनी दे दी है।RED ALSO:-मेरठ ईडी छापेमारी: 1.5 करोड़ के जमीन विवाद और फर्जी वसीयत मामले में रिटायर्ड सैन्य कर्मी के घर ED का बड़ा एक्शन
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क्या है पूरा मामला? (The Core Issue)
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी और संगठन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक NSEWA/131/PVVNL/26, दिनांक 09/06/2026) के अनुसार, यह पूरा विवाद वेतन भुगतान में हो रही भारी देरी और ठेकेदार कंपनियों की लापरवाही से जुड़ा है।
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मेरठ शहर और देहात क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का मेंटेनेंस और अन्य तकनीकी कार्य बाहरी ठेकेदार कंपनियों के माध्यम से संविदा कर्मचारियों (Contract Workers) द्वारा कराया जाता है। वर्तमान में यह जिम्मा मुख्य रूप से तीन कंपनियों के पास है:
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- \r\n ग्लोबटेक क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड (Globetech Creation Pvt. Ltd.) - मेरठ शहर\r\n \r\n
- \r\n मावेरिक पावर सॉल्यूशन (Maverick Power Solution)\r\n \r\n
- \r\n पी. आर. पावर सॉल्यूशन (P.R. Power Solution)\r\n \r\n
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श्रम कानूनों और अनुबंध के नियमों के अनुसार, प्रत्येक माह की 7 तारीख तक हर हाल में कर्मचारियों के बैंक खातों में उनके वेतन (Salary) का भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा लगातार इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विगत माह का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
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आर्थिक तंगी की मार: "परिवार पालना हुआ मुश्किल"
\r\n\r\nबिजली विभाग के ये संविदा कर्मचारी वही लोग हैं, जो आंधी, तूफान, बारिश या चिलचिलाती धूप में लाइन ट्रिप होने पर सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं। कई बार अपनी जान गंवा कर भी ये शहर को रोशन रखते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि आज इनके खुद के घरों के चूल्हे बुझने की कगार पर हैं।
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समिति के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सचिन सिंह ने प्रबंध निदेशक को लिखे पत्र में कर्मचारियों की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया है। पत्र में स्पष्ट लिखा गया है:
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\r\n\r\n\r\n"वेतन समय पर न मिलने के कारण कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। घर का खर्च चलाना, बच्चों की शिक्षा (स्कूल की फीस), परिवार की चिकित्सा (इलाज) एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में अत्यंत कठिनाई हो रही है।"\r\n
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एक आम संविदा कर्मचारी का वेतन वैसे भी बहुत सीमित होता है। ऐसे में अगर वह वेतन भी समय पर न मिले, तो मकान का किराया देना, राशन लाना और बीमार बुजुर्गों की दवाइयां खरीदना असंभव हो जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में भी इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों और कंपनी प्रबंधकों को कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन किसी ने भी उनकी इस समस्या का संज्ञान नहीं लिया और न ही कोई सकारात्मक कार्रवाई की। इसी प्रशासनिक उदासीनता ने अब कर्मचारियों को हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
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10 जून की मध्यरात्रि का अल्टीमेटम: "वेतन नहीं, तो काम नहीं"
\r\n\r\nलगातार की जा रही अनदेखी से आजिज आकर निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति ने अब सीधे तौर पर चेतावनी जारी कर दी है। संगठन ने अपने पत्र में प्रशासन और ठेकेदार कंपनियों को 10 जून 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है।
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संगठन की मांग स्पष्ट है:
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- \r\n रुका हुआ वेतन तुरंत जारी हो: सभी कर्मचारियों का पिछले माह का लंबित वेतन बिना किसी कटौती के तुरंत उनके खातों में ट्रांसफर किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n बढ़ा हुआ मानदेय: केवल पुराना वेतन ही नहीं, बल्कि सरकार/विभाग द्वारा निर्धारित बढ़ा हुआ मानदेय भी इसी भुगतान के साथ दिया जाए।\r\n \r\n
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चेतावनी का स्वरूप: संगठन के अध्यक्ष सचिन सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा है, "यदि दिनांक 10/06/2026 की मध्यरात्रि तक सभी कर्मचारियों का लंबित वेतन और बढ़ा हुआ मानदेय जारी नहीं किया जाता है, तो विवश होकर समस्त कर्मचारी दिनांक 11/06/2026 से 'पूर्ण कार्य बहिष्कार' (Complete Boycott of Work) करने के लिए बाध्य होंगे। 11 तारीख से कोई भी तकनीकी कार्य या फॉल्ट सुधारने का काम नहीं किया जाएगा।"
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संगठन ने साफ कर दिया है कि इस कार्य बहिष्कार के कारण शहर की बिजली व्यवस्था ठप होने, जनता को होने वाली परेशानी और किसी भी अन्य नुकसान की पूर्ण जिम्मेदारी ठेकेदार कंपनियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी।
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अधिकारियों तक पहुंचाई गई बात (Copies Sent to Authorities)
\r\n\r\nयह मामला केवल ठेकेदार और एमडी के बीच का नहीं है। संगठन ने इस संभावित बिजली संकट और अपनी हड़ताल की पूर्व सूचना शहर के सभी जिम्मेदार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेज दी है ताकि बाद में कर्मचारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई न थोपी जा सके।
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पत्र की प्रतिलिपि (CC) निम्नलिखित अधिकारियों को भेजी गई है:
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- \r\n जिलाधिकारी महोदय (DM), मेरठ\r\n \r\n
- \r\n मुख्य अभियंता, मेरठ क्षेत्र (विक्टोरिया पार्क)\r\n \r\n
- \r\n अधीक्षण अभियंता, मेरठ देहात (प्रथम एवं द्वितीय)\r\n \r\n
- \r\n अधिशासी अभियंता, 11kv नार्थ/साउथ रेड, कमर्शियल (प्रथम व द्वितीय)\r\n \r\n
- \r\n प्रबंधक, ग्लोबटेक क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड\r\n \r\n
- \r\n प्रबंधक, मावेरिक पावर सॉल्यूशन / पी. आर. पावर सॉल्यूशन\r\n \r\n
- \r\n शहर के समस्त मीडिया और समाचार पत्र\r\n \r\n
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जनता पर क्या होगा असर? (Impact on the Public)
\r\n\r\nअगर प्रशासन ने 10 जून तक इस मामले में हस्तक्षेप कर ठेकेदारों से वेतन जारी नहीं करवाया, तो 11 जून से मेरठ के आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जून की इस भीषण गर्मी में जब एसी (AC), कूलर और पंखों के बिना एक पल भी रहना मुश्किल है, तब बिजली विभाग में फॉल्ट आना एक आम बात है। यदि संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले गए, तो:
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- \r\n ट्रांसफॉर्मर फुंकने या लाइन टूटने पर उसकी मरम्मत करने वाला कोई नहीं होगा।\r\n \r\n
- \r\n शहर के कई इलाकों में घंटों तक ब्लैकआउट (Blackout) रह सकता है।\r\n \r\n
- \r\n पेयजल आपूर्ति (Water Supply) भी बिजली न होने के कारण सीधे तौर पर प्रभावित होगी।\r\n \r\n
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गेंद अब प्रशासन के पाले में
\r\n\r\n"राष्ट्रहित में बिजली बचायें, समय से विद्युत बिल भुगतान करें"— ये स्लोगन संगठन ने अपने पत्र के अंत में लिखा है। जो कर्मचारी राष्ट्रहित में ईमानदारी से अपना पसीना बहा रहे हैं, उनका वेतन रोक लेना किसी भी सभ्य समाज या व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पीवीवीएनएल (PVVNL) का शीर्ष प्रबंधन और मेरठ जिला प्रशासन 10 जून की डेडलाइन खत्म होने से पहले ठेकेदार कंपनियों पर नकेल कसकर कर्मचारियों को उनका हक दिला पाता है, या फिर 11 जून को पूरे मेरठ शहर को अंधकार और भयंकर गर्मी में झुलसने के लिए छोड़ दिया जाएगा। जनता और कर्मचारियों, दोनों की निगाहें अब अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.