राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण के कारण डी-रजिस्टर्ड हो चुके बीएस-4 (BS-4) वाहनों के मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश का परिवहन विभाग NCR BS4 Vehicles NOC जारी करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस फैसले से उन डेढ़ लाख वाहनों को 'नई जिंदगी' मिल सकेगी, जो फिलहाल एनसीआर में प्रतिबंधित होने के कारण कबाड़ हो रहे हैं।

शुक्रवार को मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) पहुंचे प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एनसीआर के 8 जनपदों में प्रतिबंधित हो चुके इन वाहनों को प्रदेश के अन्य (नॉन-एनसीआर) जिलों में संचालित करने की अनुमति देने का प्रयास किया जा रहा है।

केंद्र सरकार और CAQM के समक्ष उठाया गया मुद्दा परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इसमें बीएस-4 श्रेणी के डी-रजिस्टर्ड वाहनों के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की हालिया बैठक में भी उत्तर प्रदेश की तरफ से इस मुद्दे को मजबूती से रखा गया है।

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अकेले मेरठ जिले में इस श्रेणी के करीब 18 हजार वाहन मौजूद हैं, जिनमें 6,900 बसें और ट्रक शामिल हैं। पूरे एनसीआर के आठ जिलों का आंकड़ा मिला लें, तो यह संख्या 1.5 लाख के पार पहुंच जाती है।

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शपथ पत्र के साथ मिलेगी अनुमति अगर केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो वाहन स्वामियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। हालांकि, विभाग ने एक सख्त शर्त भी रखी है। वाहन मालिकों को एनओसी लेते समय एक कानूनी शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने वाहन का संचालन वापस एनसीआर क्षेत्र में नहीं करेंगे। आने वाले समय में बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों के लिए भी ऐसी ही प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है, यद्यपि उनका प्रदूषण स्तर मौजूदा मानकों से काफी अधिक है।

ऑटो-अप्रूव्ड सेवाएं और फिटनेस सेंटरों पर सख्ती बैठक के दौरान परिवहन आयुक्त ने विभागीय सुधारों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग अपनी 52 में से 39 सेवाएं 'ऑटो-अप्रूव्ड' (Auto-Approved) मोड में दे रहा है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। इन सेवाओं के लिए आम जनता को अब आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

इसके साथ ही, फिटनेस सेंटरों द्वारा वाहन स्वामियों से मनमानी फीस वसूलने की शिकायतों पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त ने चेतावनी दी है कि ऐसे सेंटरों की सघन जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी।

ई-रिक्शा नियंत्रण और बसों में सुरक्षित खिड़कियां शहरों में बेतहाशा बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या से लग रहे जाम पर आशुतोष निरंजन ने कहा कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन को अधिकार है कि वे शहरों के प्रमुख हिस्सों को 'नो ई-रिक्शा जोन' घोषित करें। वहीं, हाल के दिनों में बसों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए विभाग जल्द ही सभी बसों में 'स्लाइडिंग विंडो' (Sliding Window) लगाना अनिवार्य करने जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में यात्री आसानी से बाहर निकल सकें।

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