मेरठ (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली और असंवेदनशीलता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। न्याय के लिए दर-दर भटक रहे एक पीड़ित परिवार की जब स्थानीय थानों और बड़े पुलिस अधिकारियों ने नहीं सुनी, तो आखिरकार एक संवैधानिक आयोग को इस मामले में कड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा है। मेरठ के बहुचर्चित वंश कुशवाहा हत्याकांड (Vansh Kushwaha Murder Case) में एफआईआर (FIR) दर्ज न किए जाने को लेकर 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC - National Commission for Backward Classes) ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान और शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए मेरठ के मंडल आयुक्त (कमिश्नर) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी/पुलिस आयुक्त) को आधिकारिक नोटिस (NCBC-C/115/2026-NCBC) जारी कर तलब किया है। इस कड़े समन के बाद मेरठ के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-मुज़फ़्फ़रनगर में यूपी पुलिस का बड़ा एक्शन: बुढ़ाना में अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह से मुठभेड़, 'PRESS' लिखी गाड़ियों से म्यांमार तक करते थे हथकंडे
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क्या लिखा है NCBC के आधिकारिक नोटिस में?

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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, जो कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 338ख के अंतर्गत एक शक्तिशाली संवैधानिक निकाय है, उसने 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को त्रिकूट-1, भीकाजी कामा प्लेस, नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय से यह समन जारी किया है। आयोग के अनुभाग अधिकारी (RU-II) महेंद्र कुमार मीणा के हस्ताक्षर से जारी इस नोटिस में मेरठ के मंडलायुक्त (भानु चंद्र गोस्वामी) और पुलिस आयुक्त/एसएसपी (अविनाश पांडे) को सीधे तौर पर संबोधित किया गया है।
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नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि, "आयोग को श्री रविकांत, राष्ट्रीय अध्यक्ष, शोषित क्रांति दल (निवासी: 74, शर्मा नगर, सिविल लाइंस, मेरठ) की ओर से 30 जून 2026 को एक शिकायत प्राप्त हुई थी। यह शिकायत मलियाना, टीपी नगर, मेरठ के निवासी और कक्षा 9 के छात्र श्री वंश कुशवाहा की मृत्यु के मामले में एफआईआर दर्ज न होने के संबंध में है। छात्र को कथित तौर पर उसके दो दोस्तों और दो अन्य सहयोगियों द्वारा 'भोले की झाल' में डुबो दिया गया था, लेकिन पुलिस को बार-बार दिए गए प्रार्थना पत्रों के बावजूद आज तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।"
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4 अगस्त को दिल्ली में होगी सुनवाई, ATR लानी होगी साथ

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इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की माननीय अध्यक्षा (चेयरपर्सन) साध्वी निरंजन ज्योति ने 04 अगस्त 2026 (मंगलवार) को दोपहर 02:00 बजे आयोग के न्यायालय कक्ष (Court Room), नई दिल्ली में सुनवाई तय की है। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि इस सुनवाई में मेरठ के कमिश्नर और एसएसपी की उपस्थिति शिकायतकर्ता के साथ अनिवार्य है। दोनों अधिकारियों को खाली हाथ नहीं आना है, बल्कि उन्हें अब तक की गई जांच की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (कृत कार्यवाही की आख्या) और मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ आयोग के समक्ष पेश होना होगा।
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आयोग ने दी 'दीवानी न्यायालय' (Civil Court) की शक्तियों की चेतावनी

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इस नोटिस का सबसे अहम और कड़ा हिस्सा वह चेतावनी है, जो आयोग ने अधिकारियों को दी है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को भारतीय संविधान (102वां संशोधन अधिनियम 2018) के तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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नोटिस के अंत में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेताया गया है कि, "कृपया ध्यान दें कि यदि आप सुनवाई में उपस्थित होने में विफल रहते हैं, तो आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 338ख के खंड (8) के तहत सिविल कोर्ट (दीवानी न्यायालय) की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है।" इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कमिश्नर और एसएसपी ने इस समन की अवहेलना की, तो आयोग उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने, जुर्माना लगाने या उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने जैसे कठोर कानूनी कदम उठा सकता है।
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कौन था वंश कुशवाहा और 28 मई को क्या हुआ था?

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इस पूरे विवाद की जड़ 28 मई 2026 की वह मनहूस घटना है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। मलियाना, टीपी नगर निवासी वंश कुशवाहा कक्षा 9 का होनहार छात्र था। 28 मई को उसके कुछ तथाकथित दोस्त उसे घुमाने के बहाने मेरठ की प्रसिद्ध गंगनहर 'भोले की झाल' पर ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि वहां एक सोची-समझी साजिश के तहत दोस्तों ने वंश को नहर के गहरे पानी में धक्का देकर डुबो दिया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
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यह कोई सामान्य हादसा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। घटना के बाद जब बदहवास परिवार न्याय की गुहार लगाने स्थानीय पुलिस के पास पहुंचा, तो उन्हें खाकी की बेरुखी का सामना करना पड़ा। हत्या के इतने स्पष्ट आरोपों के बावजूद मेरठ पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
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शोषित क्रांति दल का संघर्ष लाया रंग

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जब स्थानीय स्तर पर मेरठ पुलिस और प्रशासन ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय के सभी दरवाजे बंद कर दिए, तब 'शोषित क्रांति दल' ने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का फैसला किया। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत पीड़ित परिवार को लेकर दिल्ली पहुंचे और उन्होंने 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' की अध्यक्षा साध्वी निरंजन ज्योति से मुलाकात कर पुलिसिया उत्पीड़न की पूरी कहानी बयां की।
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आयोग के इस चाबुक के बाद पीड़ित परिवार की आंखों में न्याय की एक नई किरण जागी है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद, शोषित क्रांति दल की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में अधिकारियों को सीधे तलब करने के लिए NCBC की चेयरपर्सन का हृदय से आभार व्यक्त किया गया है। अब पूरे शहर की निगाहें 4 अगस्त पर टिकी हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मेरठ के बड़े अधिकारी आयोग के सामने अपने बचाव में क्या दलीलें पेश करते हैं और क्या इस सुनवाई के बाद वंश की हत्या के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह खबर शोषित क्रांति दल द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के आधिकारिक संदर्भ संख्या NCBC-C/115/2026-NCBC के तहत जारी नोटिस पर आधारित है। Khabreelal News इस मामले में लगाए गए आरोपों (जैसे हत्या या पुलिस की जानबूझकर की गई लापरवाही) की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह मामला वर्तमान में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच और आधिकारिक सुनवाई के अधीन है।
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