मेरठ, उत्तर प्रदेश। लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है, लेकिन जब मालिक की ही सुनवाई न हो तो वह अपनी आवाज सुनाने के लिए नए तरीके ईजाद करती है। ऐसा ही एक नायाब और व्यंग्यात्मक विरोध प्रदर्शन मेरठ की सिवालखास विधानसभा के कालिंदी नवादा गांव में देखने को मिला है, जहां ग्रामीणों ने अपने 'लापता' सांसद और विधायक को ढूंढकर लाने वाले को 5 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।READ ALSO:-50 साल पुरानी 'आग' फिर भड़की: पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में हाई कोर्ट बेंच के लिए वकीलों का 'न्यायिक बहिष्कार'
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nकालिंदी नवादा गांव पिछले काफी समय से गंदगी, जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के बाद गांव की गलियां तालाब बन जाती हैं और नालियों का गंदा पानी घरों में घुसने लगता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वे कई बार स्थानीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। चुनाव के दौरान किए गए वादे अब उन्हें खोखले और झूठे लगने लगे हैं।
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सब्र का बांध टूटा तो अपनाया अनोखा तरीका
\r\n\r\nजब हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी निराशा हाथ लगी, तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने अपने गुस्से और हताशा को एक अनोखे विरोध में बदल दिया। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय लोकदल के सांसद राजकुमार सांगवान और स्थानीय विधायक गुलाम मोहम्मद के "गुमशुदा की तलाश" शीर्षक वाले पोस्टर तैयार किए और उन्हें गांव की मुख्य दीवारों, चौराहों और खंभों पर चिपका दिया।
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\r\n\r\nइन पोस्टरों में लिखा है कि क्षेत्र के माननीय सांसद और विधायक 'लापता' हैं और जनता उन्हें ढूंढ रही है। पोस्टर में सबसे दिलचस्प बात इनाम की घोषणा है। यह घोषणा की गई है कि जो भी व्यक्ति इन दोनों जनप्रतिनिधियों को ढूंढकर गांव तक लाएगा, उसे पूरे 5 रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। यह 5 रुपये की राशि असल में उस व्यवस्था पर एक गहरा तंज है, जहां करोड़ों के वादे करने वाले नेता जनता के लिए उपलब्ध तक नहीं हैं।
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सोशल मीडिया पर गूंजा विरोध का स्वर
\r\n\r\nयह विरोध सिर्फ गांव की दीवारों तक ही सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने इन पोस्टरों की तस्वीरें और कीचड़ भरी गलियों में खड़े होकर नारेबाजी करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिए। देखते ही देखते, यह अनोखा प्रदर्शन वायरल हो गया और अब यह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस पर जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने का एक प्रभावी तरीका बता रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\nग्रामीणों का दर्द: "वोट के बाद दर्शन भी दुर्लभ हो गए"
\r\n\r\nविरोध कर रहे एक ग्रामीण ने कहा, "चुनाव के समय यही नेता हाथ जोड़कर वोट मांगने आए थे। उन्होंने वादा किया था कि जीतते ही गांव की सूरत बदल देंगे। आज हालत यह है कि हम कीचड़ में जीने को मजबूर हैं और हमारे चुने हुए नुमाइंदों के दर्शन तक दुर्लभ हो गए हैं।"
\r\n\r\nयह घटना इस बात का प्रमाण है कि जनता अब चुप बैठने को तैयार नहीं है। वह अपने वोट की कीमत जानती है और अगर वादे पूरे नहीं हुए तो वह अपने प्रतिनिधियों को आईना दिखाने के लिए नए और रचनात्मक तरीके अपनाती रहेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.