मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश सहित पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है। आसमान से सूरज आग उगल रहा है और सुबह 9 बजे से ही गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों का घर से निकलना मुहाल कर रहे हैं। इस भयंकर प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर हमारे स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों पर पड़ रहा है। इसी गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए, मेरठ के प्रमुख समाजसेवी और बेगम पुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने शहर के सभी विद्यालय प्रबंधनों और प्रशासन से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने नौनिहालों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए स्कूलों में तत्काल प्रभाव से 'ग्रीष्मकालीन अवकाश' (Summer Vacation) घोषित करने या फिर 'ऑनलाइन कक्षाओं' (Online Classes) का संचालन शुरू करने की मांग की है।READ ALSO:-जूस के पैक में 'वोदका' का खेल! क्या बच्चों की पहुंच में आ गई है शराब? सुप्रीम कोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान, केंद्र से मांगा जवाब
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुनीत शर्मा की अपील: बच्चों, शिक्षकों और ऊर्जा की सुरक्षा है जरूरी प्रयास वेलफेयर सोसाइटी और बेगम पुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने अपनी लिखित अपील में विद्यालय प्रबंधनों का ध्यान इस विकट मौसमी परिस्थिति की ओर खींचा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, लू और चिलचिलाती गर्मी की यह जानलेवा स्थिति कम से कम जून माह तक इसी तरह बनी रहेगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अपनी अपील में पुनीत शर्मा ने कहा, "गर्मी और लू अपने चरम पर है। मैं सभी विद्यालय प्रबंधन से हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूं कि वे माननीय प्रधानमंत्री और माननीय मुख्यमंत्री के सुझावानुसार तत्काल प्रभाव से ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा करें या फिर ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था करें। इससे न केवल बड़े पैमाने पर ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि हमारे छात्रों, अध्यापकों और स्कूल के कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। इसी तरह हम सभी छात्रों को खतरनाक लू से बचा सकेंगे।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्यों उठ रही है यह मांग? समझिए जमीनी हकीकत मई के इस महीने में तापमान 45°C के आसपास झूल रहा है। इतनी भयंकर गर्मी में बच्चों का सुबह स्कूल जाना और फिर दोपहर की चिलचिलाती धूप और लू के बीच वापस घर लौटना किसी बुरे सपने से कम नहीं है। पुनीत शर्मा द्वारा उठाई गई यह मांग पूरी तरह से जमीनी हकीकत और आम अभिभावकों के दर्द से जुड़ी है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
- \r\n
- \r\n लू और हीटस्ट्रोक का खतरा: बच्चों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है। दोपहर के समय जब स्कूल की छुट्टी होती है, तब लू अपने चरम पर होती है। ऐसे में बच्चों को डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), चक्कर आना, नाक से खून आना और हीटस्ट्रोक (लू लगना) का गंभीर खतरा बना रहता है।\r\n \r\n
- \r\n यातायात की दिक्कतें: स्कूल बसें, वैन और ऑटो अक्सर ओवरलोडेड होते हैं और ज्यादातर में एसी (AC) की सुविधा नहीं होती। तपते लोहे के बक्सों जैसी इन गाड़ियों में सफर करना बच्चों के लिए घुटन भरा और जानलेवा साबित हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कर्मचारियों और शिक्षकों की परेशानी: सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षक, बस ड्राइवर, कंडक्टर और स्कूल के गेट पर खड़े रहने वाले सुरक्षा गार्ड भी इस भयंकर गर्मी की मार झेल रहे हैं। उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना भी स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
ऑनलाइन कक्षाएं: आपदा में एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प पुनीत शर्मा ने अपनी अपील में केवल छुट्टियां करने की बात नहीं की है, बल्कि पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए 'ऑनलाइन कक्षाओं' (Online Classes) का एक बेहद व्यावहारिक सुझाव भी दिया है। कोरोना काल (COVID-19) के दौरान पूरे देश के स्कूलों और छात्रों ने ऑनलाइन शिक्षा के मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया था। आज हर स्कूल और छात्र के पास डिजिटल माध्यम से जुड़ने की क्षमता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जब तक मौसम में सुधार नहीं होता, तब तक स्कूल बच्चों को घर पर ही सुरक्षित रखकर इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। इससे बच्चों का पाठ्यक्रम भी पीछे नहीं छूटेगा और वे भयंकर लू से भी बचे रहेंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भीषण गर्मी में पारंपरिक स्कूल बनाम ऑनलाइन क्लास का तुलनात्मक विश्लेषण
\r\n\r\n| \r\n तुलना का आधार \r\n | \r\n \r\n पारंपरिक (भौतिक) स्कूल \r\n | \r\n \r\n ऑनलाइन कक्षाएं (घर से) \r\n | \r\n
| \r\n स्वास्थ्य और सुरक्षा \r\n | \r\n \r\n दोपहर की लू और हीटस्ट्रोक का अत्यधिक खतरा। \r\n | \r\n \r\n घर के सुरक्षित और ठंडे वातावरण में पढ़ाई। \r\n | \r\n
| \r\n ऊर्जा की खपत \r\n | \r\n \r\n पूरे स्कूल कैंपस में एसी, पंखे, लाइट और परिवहन का भारी ईंधन खर्च। \r\n | \r\n \r\n भारी मात्रा में बिजली और वाहन ईंधन (पेट्रोल/डीजल) की बचत। \r\n | \r\n
| \r\n थकान और उत्पादकता \r\n | \r\n \r\n गर्मी और सफर के कारण बच्चों में अत्यधिक थकान, पढ़ाई में कम मन लगना। \r\n | \r\n \r\n सफर की थकान नहीं, जिससे बच्चों की एकाग्रता और ऊर्जा बनी रहती है। \r\n | \r\n
| \r\n अभिभावकों की चिंता \r\n | \r\n \r\n बच्चों के घर लौटने तक माता-पिता भारी तनाव और चिंता में रहते हैं। \r\n | \r\n \r\n बच्चे आंखों के सामने रहते हैं, अभिभावक निश्चिंत होकर काम कर सकते हैं। \r\n | \r\n
\r\n\r\n
ऊर्जा संरक्षण: राष्ट्रीय हित में एक बड़ा कदम पुनीत शर्मा ने अपनी अपील में 'ऊर्जा की बचत' (Energy Conservation) का जो बिंदु उठाया है, वह बेहद महत्वपूर्ण और दूरदर्शी है। इस भीषण गर्मी में बिजली की मांग अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसके कारण ग्रिड पर भारी दबाव है और शहरों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जब स्कूल भौतिक रूप से चलते हैं, तो सैकड़ों कमरों में एक साथ पंखे, एसी, वाटर कूलर और लाइटें चलती हैं। इसके अलावा हजारों स्कूल बसें और अभिभावकों के वाहन सड़कों पर उतरते हैं, जिससे भारी मात्रा में ईंधन जलता है और प्रदूषण (Heat Island Effect) बढ़ता है। यदि स्कूल कुछ हफ्तों के लिए बंद कर दिए जाएं या ऑनलाइन कर दिए जाएं, तो शहर के स्तर पर भारी मात्रा में बिजली और ईंधन की बचत होगी, जो इस राष्ट्रीय संकट के समय में एक बड़ा योगदान होगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकार की गाइडलाइंस और प्रशासन का रुख राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य सरकारों ने भी हीटवेव को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। माननीय मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री समय-समय पर यह अपील करते रहे हैं कि जब तक बहुत जरूरी न हो, दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलें। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों को भीषण गर्मी में स्कूल बुलाना इन सरकारी सुझावों और स्वास्थ्य चेतावनियों के विपरीत नजर आता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कई जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने अपने स्तर पर स्कूलों के समय में कटौती की है या छोटी कक्षाओं के लिए छुट्टियां घोषित की हैं। लेकिन मेरठ जैसे बड़े शहर में, जहां ट्रैफिक और दूरियां अधिक हैं, वहां केवल समय कम करना पर्याप्त नहीं है। पूर्ण रूप से छुट्टियां या ऑनलाइन कक्षाएं ही इसका एकमात्र सुरक्षित समाधान हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अब गेंद विद्यालय प्रबंधनों और प्रशासन के पाले में पुनीत शर्मा और प्रयास वेलफेयर सोसाइटी द्वारा उठाई गई यह मांग केवल एक व्यक्ति या संस्था की आवाज नहीं है, बल्कि यह मेरठ के हजारों चिंतित अभिभावकों के दिल की आवाज है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शहर के निजी और सरकारी विद्यालय प्रबंधन इस मार्मिक और तार्किक अपील पर कितनी जल्दी और संवेदनशीलता के साथ फैसला लेते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बच्चों की जान और उनका स्वास्थ्य किसी भी पाठ्यक्रम या स्कूल की फीस से कहीं अधिक मूल्यवान है। प्रशासन को भी चाहिए कि वह इस मामले में तुरंत संज्ञान ले और सभी स्कूलों के लिए एक स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि किसी भी मासूम को इस जानलेवा गर्मी का शिकार न होना पड़े।
Sabse pehle comment karne wale banein.