मेरठ/उत्तर प्रदेश: शहरों की रिहायशी कॉलोनियों (Residential Areas) की सड़कें अब बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं रह गई हैं। नियमों को ताक पर रखकर कॉलोनियों की तंग गलियों में फर्राटा भरते कमर्शियल वाहन आए दिन किसी न किसी घर का चिराग बुझा रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद दर्दनाक और इंसानियत को झकझोर कर रख देने वाला वाकया मेरठ जिले के टीपीनगर (Transport Nagar) थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां गोपाल विहार इलाके में एक 22 महीने के मासूम बच्चे को एक ओवरलोड और तेज रफ्तार 'छोटा हाथी' (लोडर वाहन) ने बुरी तरह कुचल दिया। इस पूरी घटना का रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए।READ ALSO:-मुरादाबाद के पीतल उद्योग को लगेंगे नए पंख: 'गेम चेंजर' साबित होगा बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, कुमाऊं तक मिलेगी नॉन-स्टॉप कनेक्टिविटी
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मायके की खुशियां बदलीं मातम में: घर के बाहर खड़ा था मासूम
\r\n\r\nयह घटना एक मां के लिए उस वक्त सबसे बड़े दुःस्वप्न में बदल गई, जब वह अपने बच्चों के साथ अपने मायके (मां के घर) कुछ सुकून के पल बिताने आई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेरठ के गंगानगर इलाके की रहने वाली प्रतिमा अपने 22 महीने के बेटे 'समर्थ' और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ टीपीनगर थाना क्षेत्र के गोपाल विहार स्थित अपने मायके आई हुई थीं। ननिहाल आने की खुशी बच्चे और मां दोनों के चेहरे पर थी।
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घटना वाले दिन प्रतिमा जब अपनी मां के घर के अंदर पहुंची ही थीं, तभी नन्हा समर्थ खेलते-खेलते घर के बाहर सड़क के किनारे जा खड़ा हुआ। उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि सड़क पर मौत एक वाहन के रूप में उसकी तरफ तेजी से बढ़ रही है।
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CCTV में कैद खौफनाक मंजर: दोनों पहिए मासूम के ऊपर से गुजरे
\r\n\r\nइस दर्दनाक हादसे की पूरी लाइव तस्वीरें घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई हैं। सीसीटीवी फुटेज में जो मंजर दिखाई दे रहा है, वह बेहद विचलित करने वाला है।
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- \r\n तेज रफ्तार का कहर: वीडियो में देखा जा सकता है कि 22 महीने का मासूम समर्थ घर के बाहर सड़क के बिल्कुल किनारे शांति से खड़ा है। तभी अचानक गली में एक सामान से लदा हुआ बेकाबू लोडर (छोटा हाथी) तेज रफ्तार में आता है।\r\n \r\n
- \r\n मासूम की दर्दनाक चीख: चालक की लापरवाही इतनी चरम पर थी कि उसने सड़क किनारे खड़े इतने छोटे बच्चे को देखा तक नहीं और वाहन सीधे बच्चे से टकरा दिया। टक्कर लगते ही मासूम समर्थ छिटक कर सड़क पर गिर पड़ा। गिरने के साथ ही बच्चे की एक तेज चीख निकल गई, जो सीसीटीवी के ऑडियो में भी बहुत साफ और दर्दनाक तरीके से सुनाई दे रही है।\r\n \r\n
- \r\n कुचलता हुआ निकल गया वाहन: हादसे की सबसे भयावह बात यह रही कि बच्चे के गिरने और चीखने के बावजूद निर्दयी चालक ने लोडर के ब्रेक नहीं लगाए। लोडर का अगला पहिया और उसके बाद पिछला पहिया बारी-बारी से उस 22 महीने के फूल से बच्चे के नाजुक शरीर के ऊपर से गुजर गया।\r\n \r\n
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गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल में रेफर: टूट गईं कई पसलियां
\r\n\r\nहादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। बच्चे की चीख सुनकर मां प्रतिमा और घर के अन्य लोग बदहवास हालत में बाहर दौड़े। सड़क पर खून से लथपथ और तड़पते अपने कलेजे के टुकड़े को देखकर मां की रुलाई फूट पड़ी।
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- \r\n प्राथमिक उपचार: बिना एक पल की देरी किए, परिजन तुरंत समर्थ को लेकर पास के ही एक निजी अस्पताल पहुंचे। लेकिन बच्चे की चोटें इतनी गंभीर थीं और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में इतना ज्यादा नुकसान हुआ था कि वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत हाथ खड़े कर दिए और बच्चे को किसी बड़े और एडवांस अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।\r\n \r\n
- \r\n मैक्स अस्पताल में जिंदगी की जंग: समय की नजाकत और बच्चे की गिरती नब्ज को देखते हुए परिवार वाले उसे तुरंत गाजियाबाद के प्रतिष्ठित मैक्स अस्पताल (Max Hospital, Ghaziabad) लेकर भागे। फिलहाल समर्थ को वहां के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n डॉक्टरों का बयान: परिवार के सदस्यों और डॉक्टरों के अनुसार, इस भारी-भरकम वाहन के पहियों के नीचे आने से 22 महीने के समर्थ की कई पसलियां (Ribs) बुरी तरह टूट गई हैं। उसके फेफड़ों और अन्य अंदरूनी अंगों पर भी गहरा दबाव पड़ा है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी हालत पर 24 घंटे लगातार निगरानी रख रही है, लेकिन उसकी स्थिति अभी भी 'बेहद नाजुक' (Highly Critical) बनी हुई है।\r\n \r\n
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हादसे के बाद फरार हुआ चालक, लोगों में भारी रोष
\r\n\r\nइस भयानक कृत्य को अंजाम देने के बाद लोडर का चालक जरा भी नहीं रुका। उसने इंसानियत को शर्मसार करते हुए न तो बच्चे को उठाने की कोशिश की और न ही अस्पताल पहुंचाने में कोई मदद की। वह अपने वाहन (छोटा हाथी) को भगाते हुए मौके से फरार हो गया।
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इस घटना के बाद से गोपाल विहार और आसपास के इलाके में लोगों में भारी गुस्सा और नाराजगी का माहौल है। परिजनों और स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि:
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- \r\n प्रशासन की लापरवाही: रिहायशी इलाकों (Residential colonies) में जहां बच्चों का खेलना-कूदना लगा रहता है, वहां भारी और ओवरलोड कमर्शियल वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक-टोक नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n स्पीड ब्रेकर का अभाव: गलियों में स्पीड ब्रेकर (Speed Breakers) न होने के कारण वाहन चालक इन रास्तों का इस्तेमाल शॉर्टकट के रूप में करते हैं और अपनी गाड़ियां अंधाधुंध स्पीड में दौड़ाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n कार्रवाई की मांग: लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस और ट्रैफिक विभाग ऐसे बेलगाम चालकों पर सख्त कार्रवाई (Heavy penalty and license cancellation) नहीं करेगा, तब तक ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे।\r\n \r\n
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पुलिस का सख्त एक्शन: CCTV फुटेज के आधार पर तलाश तेज
\r\n\r\nघटना की जानकारी मिलते ही टीपीनगर थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने सबसे पहले वह सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लिया, जिसमें पूरी घटना कैद हुई है।
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इस संवेदनशील मामले पर मेरठ के एसपी सिटी (SP City) विनायक गोपाल भोसले ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है: "टीपीनगर थाना क्षेत्र में एक लोडर द्वारा बच्चे को टक्कर मारने का मामला संज्ञान में आया है। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए तुरंत अज्ञात चालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है। हमारी टीमें आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही हैं। वीडियो में दिख रहे 'छोटा हाथी' (लोडर) के नंबर प्लेट को ट्रेस करने का काम किया जा रहा है। आरटीओ (RTO) विभाग की मदद से वाहन के मालिक का पता लगाया जा रहा है। हम आश्वस्त करते हैं कि आरोपी चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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सड़क सुरक्षा: माता-पिता के लिए भी एक बड़ा सबक
\r\n\r\nमेरठ का यह हादसा जितना दर्दनाक है, उतना ही यह हम सभी के लिए एक बड़ा सबक भी है।
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- \r\n चालकों की जिम्मेदारी: कमर्शियल वाहन चालकों को यह समझना होगा कि रिहायशी इलाकों की गलियां हाईवे नहीं हैं। वहां कभी भी कोई बच्चा, बुजुर्ग या जानवर सामने आ सकता है, इसलिए वहां गति सीमा 10 से 15 किमी/घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n अभिभावकों की सतर्कता: दूसरी ओर, माता-पिता को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। 2 से 3 साल तक के छोटे बच्चे खतरों को नहीं समझते हैं। उन्हें पल भर के लिए भी सड़क किनारे या घर के खुले गेट के पास अकेला छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता है।\r\n \r\n
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फिलहाल, पूरे मेरठ और गाजियाबाद में दुआओं का दौर जारी है। हर कोई ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा है कि 22 महीने का मासूम समर्थ इस भीषण दर्द को सहने की ताकत जुटा पाए और मौत को मात देकर जल्द से जल्द अपनी मां की गोद में वापस लौट आए। वहीं, दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन पर यह दबाव है कि वह जल्द से जल्द उस बेरहम ड्राइवर को सलाखों के पीछे पहुंचाए, ताकि परिवार को कुछ हद तक न्याय मिल सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.