मुरादाबाद/उत्तर प्रदेश: किसी भी शहर या राज्य का विकास सीधे तौर पर वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी (सड़क नेटवर्क) से जुड़ा होता है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में एक्सप्रेस-वे का जो जाल बिछा है, उसने व्यापार की पूरी परिभाषा बदल दी है। इसी कड़ी में अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अहम औद्योगिक शहर मुरादाबाद (Moradabad) को एक बहुत बड़ी सौगात मिलने जा रही है।READ ALSO:-मेरठ CGST कार्यालय में CBI की 'सर्जिकल स्ट्राइक': रात भर की घेराबंदी, और सुबह 6 हजार की घूस लेते रंगे हाथों धरे गए अधीक्षक व ऑपरेटर
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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने प्रस्तावित 'बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे' को मुरादाबाद से इंटर-लिंक करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। इस एक फैसले से न सिर्फ मुरादाबाद से उत्तराखंड (कुमाऊं) का सफर मिनटों में तय होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के व्यापारिक और पर्यटन परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।
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पीतलनगरी की वैश्विक चमक को मिलेगी नई रफ्तार

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मुरादाबाद का नाम आते ही जेहन में शानदार और चमकदार पीतल के बर्तनों और सजावटी सामानों की तस्वीर उभर आती है।
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    मुरादाबाद केवल एक शहर नहीं है, बल्कि भारत के हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) निर्यात का एक बहुत बड़ा स्तंभ है।
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    यहां के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई पीतल की मूर्तियां, अगरबत्ती स्टैंड, खूबसूरत ट्रे, डिजाइनर बर्तन, मंदिरों की घंटियां, शाही फूलदान, दीये और घरेलू सजावट के एंटीक सामान सिर्फ भारत के कोने-कोने में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों तक भारी मात्रा में एक्सपोर्ट (निर्यात) किए जाते हैं।
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सरकार इस बात को भली-भांति समझती है कि इस उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बेहतरीन लॉजिस्टिक सपोर्ट और तेज ट्रांसपोर्टेशन की जरूरत है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए मुरादाबाद को नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जा रहा है, ताकि कच्चा माल लाने और तैयार माल को देश के अन्य हिस्सों या पोर्ट तक पहुंचाने में समय और पैसे दोनों की बचत हो सके।
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100 किलोमीटर का प्रोजेक्ट: शुरू हुआ जमीन का सीमांकन

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इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो:
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    बरेली से हल्द्वानी के बीच बनने वाला यह 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे' लगभग 100 किलोमीटर लंबा होगा। 'ग्रीनफील्ड' का अर्थ है कि यह एक्सप्रेस-वे पुरानी सड़कों को चौड़ा करके नहीं, बल्कि पूरी तरह से नए अलाइनमेंट पर खेतों और खाली जमीनों के बीच से होकर गुजरेगा, जिससे घुमावदार रास्तों और शहरी जाम से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।
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    एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे को मुरादाबाद-बरेली हाईवे के एक अहम जंक्शन से जोड़ा जाएगा।
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    सबसे खुशी की बात यह है कि कागजी कार्रवाई के बाद अब जमीन पर काम दिखना शुरू हो गया है। प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीनों के अधिग्रहण और सीमांकन (Demarcation) का काम जोरों पर चल रहा है। खेतों में पिलर गाड़े जा रहे हैं, जिसे देखकर स्थानीय लोगों और किसानों में भारी उत्साह है।
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व्यापारियों की राय: "यह हमारे लिए संजीवनी बूटी है"

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एक्सप्रेस-वे की योजना धरातल पर उतरती देख मुरादाबाद के व्यापारी और निर्यातक बेहद उत्साहित हैं। वे इसे पश्चिमी यूपी के लिए एक बेहतरीन 'आर्थिक कॉरिडोर' के रूप में देख रहे हैं।
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मुरादाबाद के जाने-माने पीतल निर्यातक (Brass Exporter) सलमान ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "जिस तरीके से इस नए हाईवे की रूपरेखा और जानकारी हम तक पहुंची है, उससे यह एकदम साफ है कि सरकार उद्योगों को संजीवनी देने और व्यापार को बढ़ाने के लिए बहुत गंभीरता से काम कर रही है। लॉजिस्टिक कॉस्ट (माल ढुलाई का खर्च) कम होने से हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन और अन्य देशों को बेहतर टक्कर दे पाएंगे। यह एक्सप्रेस-वे हमारे लिए एक शानदार व्यापारिक कॉरिडोर के रूप में काम करेगा।"
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धार्मिक पर्यटन और पीतल उद्योग का कनेक्शन: मुरादाबाद के व्यापारियों का एक और बड़ा तर्क यह है कि उत्तराखंड को 'देवभूमि' कहा जाता है। वहां हर साल लाखों श्रद्धालु चार धाम यात्रा और अन्य मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं। मुरादाबाद में मंदिरों में इस्तेमाल होने वाली पीतल की घंटियों, दीयों और भगवान की मूर्तियों का सबसे बड़ा उत्पादन होता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ने से उत्तराखंड के बाजारों (नैनीताल, अल्मोड़ा, हल्द्वानी) तक मुरादाबाद के पीतल उत्पादों की सप्लाई और भी तेज और सस्ती हो जाएगी।
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रामपुर के लकड़ी और एल्यूमीनियम उद्योग को भी बंपर फायदा

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यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ मुरादाबाद तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका 'स्पिलओवर इफ़ेक्ट' (आसपास के इलाकों पर प्रभाव) पड़ोसी जिलों पर भी पड़ेगा।
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    रामपुर का व्यापार: मुरादाबाद से सटा रामपुर जिला अपने बेहतरीन लकड़ी के काम (Wooden Handicrafts), एल्यूमीनियम उद्योग और खास 'ज़री-जरदोजी' (Zari work) के लिए मशहूर है।
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    किसानों को लाभ: इसके अलावा, इस पूरे बेल्ट (तराई क्षेत्र) में कृषि उत्पादों और ताजी सब्जियों का भारी उत्पादन होता है।
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पहाड़ों (उत्तराखंड) में हमेशा ताजी सब्जियों, खाद्यान्न और हैंडीक्राफ्ट की भारी मांग रहती है। नया एक्सप्रेस-वे बनने से मुरादाबाद और रामपुर के मालवाहक वाहन (ट्रक/लोडर) बिना किसी शहरी ट्रैफिक में फंसे, सीधे कुमाऊं के बाजारों में अपना माल डंप कर सकेंगे। मालवाहक वाहनों के लिए यह रास्ता किसी वरदान से कम नहीं साबित होगा।
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पर्यटन क्षेत्र में 'गेम चेंजर': अब जाम में नहीं फसेगी गाड़ियां

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व्यापार के अलावा, यह इंटर-लिंकिंग प्रोजेक्ट पर्यटन (Tourism) के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा गेम चेंजर बनने वाला है।
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वर्तमान में, दिल्ली (Delhi-NCR), हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जो पर्यटक उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र (नैनीताल आदि) जाना चाहते हैं, उन्हें मुरादाबाद, रामपुर और बरेली के संकरे और ट्रैफिक वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। पीक सीजन (गर्मियों की छुट्टियों) में अक्सर इन रास्तों पर घंटों लंबा जाम लग जाता है, जिससे पर्यटकों का आधा समय सड़क पर ही बर्बाद हो जाता है।
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एक्सप्रेस-वे के बाद की तस्वीर:

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    इस नई रणनीतिक लिंकिंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी की ओर से आने वाले वाहन मुरादाबाद के पास सीधे इस नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर चढ़ जाएंगे।
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    उन्हें रामपुर या बरेली शहर के भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक में फंसने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
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    पर्यटक अपनी गाड़ियों को नॉन-स्टॉप फर्राटे से दौड़ाते हुए सीधे हल्द्वानी (जो कि कुमाऊं का प्रवेश द्वार है) पहुंच सकेंगे।
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    इससे नैनीताल, भीमताल, नौकुचियाताल, मुक्तेश्वर, रानीखेत, अल्मोड़ा और कौसानी जैसे विश्व प्रसिद्ध और खूबसूरत पर्यटन स्थलों का सफर न सिर्फ बेहद आसान हो जाएगा, बल्कि समय में भी 2 से 3 घंटे की भारी बचत होगी।
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रोजगार और रियल एस्टेट को मिलेगा बढ़ावा 

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जब भी कोई नया एक्सप्रेस-वे किसी इलाके से गुजरता है, तो वह सिर्फ गाड़ियां नहीं, बल्कि विकास की पूरी एक नई लहर लेकर आता है। मुरादाबाद को हल्द्वानी से जोड़ने वाले इस एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ आने वाले समय में नए ढाबे, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, लॉजिस्टिक पार्क और वेयरहाउस (गोदाम) खुलेंगे। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की जमीनों के दाम (Real Estate Value) में भी भारी इजाफा होगा।
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कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम मुरादाबाद की पीतलनगरी को उत्तराखंड की देवभूमि से जोड़ने का एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जो आने वाले दशकों तक उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। स्थानीय लोगों और व्यापारियों को अब बस उस दिन का बेसब्री से इंतजार है, जब इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य पूरा होगा और इस पर विकास की गाड़ियां दौड़नी शुरू होंगी।
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