मेरठ। उत्तर प्रदेश के शहरी विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मेरठ में प्रदेश की पहली इंटीग्रेटेड ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) टाउनशिप को विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। यह सिर्फ एक आवासीय कॉलोनी नहीं, बल्कि भविष्य का एक ऐसा मॉडल शहर होगा, जहां लोगों को एक ही छत के नीचे आवास, रोजगार और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) इस महत्वाकांक्षी परियोजना का ड्राफ्ट लेआउट (मानचित्र) इसी माह के अंत तक तैयार कर लेगा।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में बड़ा विवाद: मीनाक्षी चौक पर लगाया 'महर्षि वाल्मीकि' का बोर्ड, वाल्मीकि समाज बोला- "हमारे नाम पर राजनीति मत करो"
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क्या है यह भविष्य की टाउनशिप?
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यह टाउनशिप 294 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसमें कुल 31 सेक्टर होंगे। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 'मिश्रित भू-उपयोग' (Mixed Land Use) मॉडल है।
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    घर के नीचे दफ्तर: इस टाउनशिप में ऐसे बहुमंजिला भवन बनाए जाएंगे, जहां ऊपरी मंजिलों पर आवासीय फ्लैट होंगे, तो वहीं निचली मंजिलों पर शॉपिंग सेंटर, दफ्तर या छोटी औद्योगिक इकाइयां होंगी।
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    छत और रोजगार एक साथ: इसका मतलब है कि लोग अपने ही अपार्टमेंट बिल्डिंग में नौकरी या अपना व्यवसाय कर सकेंगे, जिससे यात्रा का समय और खर्च बचेगा। यह टाउनशिप इस बात का एक मॉडल बनेगी कि कम जगह में बेहतर जीवनशैली कैसे जी जा सकती है।
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TOD नीति: यानी 'नीचे दुकान, ऊपर मकान'
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यह प्रदेश की पहली टाउनशिप है जो पूरी तरह से TOD नीति पर आधारित है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन के आसपास घनी और सुविधाजनक बसावट को बढ़ावा देना है। यह टाउनशिप नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) के नजदीक होगी, जिससे दिल्ली-गाजियाबाद तक की कनेक्टिविटी बेहद आसान हो जाएगी।
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सुविधाओं की भरमार: किसी 5-स्टार शहर से कम नहीं
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इस टाउनशिप में निवासियों को वे सभी सुविधाएं मिलेंगी जो किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहर में होती हैं:
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    मनोरंजन और खेल: गोल्फ कोर्स, फुटबॉल ग्राउंड, इंडोर स्टेडियम, राइडिंग एरिना, मल्टीप्लेक्स, ओपन थिएटर और थीम पार्क।
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    जीवनशैली और शॉपिंग: मल्टीलेवल पार्किंग के साथ बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के अस्पताल, बैंक और पब्लिक स्कूल।
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    पर्यावरण और आधुनिकता: एक खूबसूरत झीलनुमा तालाब, प्राकृतिक वातावरण, सौर ऊर्जा युक्त और एनर्जी एफिशिएंट भवन (जो गर्मी कम सोखेंगे और बिजली बचाएंगे)।
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    कनेक्टिविटी: नमो भारत ट्रेन और बस अड्डों के लिए फीडर सेवा, 'पार्क एंड गो' सुविधा, और रेंटल बाइक/कार सर्विस।
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कैसे पूरा होगा यह सपना?
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इस विशाल परियोजना को 'मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना' के तहत विकसित किया जा रहा है।
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    कुल लागत: भूमि अधिग्रहण पर लगभग 2517 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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    फंडिंग: प्रदेश सरकार ने इसके लिए 1,258 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण स्वीकृत किया है, जिसमें से 809 करोड़ रुपये मेडा को मिल चुके हैं। बाकी धनराशि की व्यवस्था बैंक ऋण से की जाएगी।
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इस महीने के अंत तक लेआउट फाइनल होने के बाद, मेडा फरवरी तक इसका पहला सेक्टर लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जिसके बाद यहां प्लॉट की बिक्री शुरू हो जाएगी।
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