मेरठ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप के साथ-साथ एक और मुद्दा है जो आम जनता का पारा बढ़ा रहा है—और वह है 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meters)। पूरे प्रदेश की तरह मेरठ जिले में भी इन नए डिजिटल मीटरों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। घरों में लगते ही इन मीटरों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मेरठ में एक ऐसी घटना घटी जिसने बिजली विभाग (PVVNL) के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जनता के बीच बढ़ते अविश्वास को पूरी तरह से उजागर कर दिया।READ ALSO:-मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग विवाद: सेटबैक नोटिस से हड़कंप, 70 करोड़ का फंसा पेंच और सांसद अरुण गोविल के सामने गूंजा- "मेरे घर राम आए हैं"
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विद्युत विभाग द्वारा लगाए गए एक विशेष जागरूकता कैंप में उस वक्त भारी बवाल मच गया जब न्यू मोहनपुरी इलाके की आक्रोशित महिलाएं वहां पहुंच गईं। बात इतनी बिगड़ गई कि गुस्से में आगबबूला महिलाओं ने भरे कैंप में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) को चूड़ियां भेंट कर दीं। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को दखल देना पड़ा। आइए, इस पूरी घटना की गहराई में चलते हैं और समझते हैं कि आखिर स्मार्ट मीटर को लेकर जनता इतनी खौफजदा और गुस्से में क्यों है।
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जागरूकता के नाम पर लगा कैंप बना विरोध का अखाड़ा
\r\n\r\nमेरठ जिले में शासन के निर्देशानुसार पुराने मीटरों को हटाकर तेजी से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। लेकिन शुरुआत से ही उपभोक्ताओं की तरफ से 'तेज भागते मीटर' और 'अत्यधिक बिल' की शिकायतें आ रही हैं। जनता के इसी भ्रम को दूर करने और नई तकनीक के फायदे गिनाने के लिए शुक्रवार को पीवीवीएनएल (PVVNL) ने न्यू मोहनपुरी स्थित बिजली घर पर एक विशेष जागरूकता कैंप का आयोजन किया था।
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विभाग को लगा था कि वे उपभोक्ताओं को समझा लेंगे, लेकिन परिणाम बिल्कुल उल्टा रहा। जैसे ही मोहनपुरी इलाके की महिलाओं को इस कैंप की जानकारी मिली, वे लामबंद होकर बिजली घर पहुंच गईं। महिलाओं ने आते ही कैंप में जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और वहां मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों का घेराव कर लिया। उनका साफ कहना था कि उन्हें कोई जागरूकता नहीं चाहिए, बल्कि उनके घरों से तुरंत प्रभाव से ये स्मार्ट मीटर उखाड़े जाएं।
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जब SE अरशद खान के सामने आया महिलाओं का उग्र रूप
\r\n\r\nकैंप में अचानक हुए इस उग्र प्रदर्शन से अधिकारी पूरी तरह से सकते में आ गए। भीड़ को शांत करने और उनसे संवाद स्थापित करने के लिए मौके पर मौजूद सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) अरशद खान ने मोर्चा संभाला। उन्होंने महिलाओं को तकनीकी पहलू समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन महीनों से बढ़े हुए बिलों की मार झेल रही महिलाएं कुछ भी सुनने को राजी नहीं थीं।
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विरोध का यह सिलसिला तब अपने चरम पर पहुंच गया जब प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अपना विरोध जताने के लिए एक बेहद तीखा और प्रतीकात्मक तरीका अपनाया। उन्होंने अधिकारियों के सामने जाकर सरेआम उन्हें चूड़ियां भेंट कर दीं। सरकारी कार्य में लगे अधिकारियों को चूड़ियां सौंपने की इस घटना से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। महिलाओं का गुस्सा देख अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा। स्थिति को बिगड़ता देख तत्काल सिविल लाइन थाने की पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद महिलाओं को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
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आखिर क्यों उबल रहा है न्यू मोहनपुरी का गुस्सा?
\r\n\r\nयह समझना जरूरी है कि यह गुस्सा एक दिन में नहीं पनपा है। मोहनपुरी इलाके के स्थानीय निवासियों और विशेषकर महिलाओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर उनके लिए सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना बन गए हैं।
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- \r\n रॉकेट की रफ्तार से भागती रीडिंग: महिलाओं का सीधा आरोप है कि उनके घर में केवल बुनियादी उपकरण (पंखे, लाइट, फ्रिज) चलते हैं, फिर भी स्मार्ट मीटर की रीडिंग पुराने मीटर की तुलना में दोगुनी तेजी से भाग रही है।\r\n \r\n
- \r\n बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी: जिन परिवारों का बिल पहले 800 से 1000 रुपये आता था, अब उनका बिल 2000 से 3000 रुपये तक पहुंच गया है। मध्यम और गरीब वर्ग के लिए यह एक बड़ा आर्थिक झटका है।\r\n \r\n
- \r\n सुनवाई का अभाव: स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटे, जेई (JE) और एसडीओ (SDO) को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया।\r\n \r\n
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर: क्यों बन रहा है आम आदमी के लिए सिरदर्द?
\r\n\r\nमेरठ की यह घटना सिर्फ एक बानगी है। पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर का विरोध हो रहा है। इसके पीछे कई व्यावहारिक और तकनीकी कारण हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है:
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1. प्रीपेड सिस्टम का मनोवैज्ञानिक दबाव स्मार्ट मीटर मोबाइल फोन के प्रीपेड सिम की तरह काम करते हैं। पहले रिचार्ज कराओ, फिर बिजली पाओ। इससे उपभोक्ताओं पर हमेशा यह मानसिक दबाव रहता है कि बैलेंस खत्म होते ही घर की बत्ती गुल हो जाएगी। रात-बिरात बिजली कटने का डर लोगों को सबसे ज्यादा सता रहा है।
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2. बैलेंस की अदृश्य कटौती उपभोक्ताओं की एक बड़ी शिकायत यह है कि अगर वे 500 रुपये का रिचार्ज करते हैं, तो कुछ ही दिनों में बैलेंस शून्य हो जाता है। दरअसल, विभाग अब फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charges) और ड्यूटी टैक्स महीने के अंत में एक साथ लेने के बजाय हर दिन के हिसाब से मेन बैलेंस से काट रहा है। आम उपभोक्ता को लगता है कि बिना बिजली जलाए ही उसके पैसे कट रहे हैं।
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3. सर्वर और नेटवर्क की विफलता स्मार्ट मीटर पूरी तरह से इंटरनेट सर्वर और नेटवर्क पर निर्भर हैं। कई बार उपभोक्ता ऑनलाइन रिचार्ज कर लेते हैं और उनके बैंक खाते से पैसे भी कट जाते हैं, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण वह रिचार्ज मीटर तक नहीं पहुंचता। इस तकनीकी खामी के कारण पैसे देने के बावजूद लोगों को घंटों अंधेरे में गुजारने पड़ते हैं।
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पीवीवीएनएल (PVVNL) और सरकार का क्या है तर्क?
\r\n\r\nजनता के भारी विरोध के बावजूद बिजली विभाग अपने रुख पर कायम है। विभाग का मानना है कि स्मार्ट मीटर ऊर्जा क्षेत्र का भविष्य हैं और पुराने मीटरों में कई खामियां थीं:
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- \r\n सटीक रीडिंग का सच: तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक मीटर समय के साथ-साथ धीमे (Slow) हो जाते थे, जिससे वे बिजली की वास्तविक खपत को पूरी तरह से रिकॉर्ड नहीं कर पाते थे। नए स्मार्ट मीटर अत्याधुनिक हैं और एक-एक यूनिट का सटीक हिसाब रखते हैं। इसी वजह से उपभोक्ताओं को लग रहा है कि मीटर तेज चल रहा है।\r\n \r\n
- \r\n बिजली चोरी पर सख्त लगाम: स्मार्ट मीटर लगने से लाइन लॉस (Line Loss) और मीटर से छेड़छाड़ करके होने वाली बिजली चोरी लगभग खत्म हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n राजस्व में वृद्धि: प्रीपेड सिस्टम के कारण विभाग को बकाया बिलों की वसूली के लिए लोगों के घरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।\r\n \r\n
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अगर आपको भी है मीटर से शिकायत, तो क्या हैं आपके अधिकार?
\r\n\r\nसड़क पर उतरकर हंगामा करना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यदि किसी भी उपभोक्ता को यह लगता है कि उसका स्मार्ट मीटर तय सीमा से ज्यादा तेज चल रहा है, तो उसे विद्युत निगम के नियमों के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करना चाहिए:
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- \r\n 'चेक मीटर' (Check Meter) के लिए आवेदन: उपभोक्ता अपने संबंधित उपखंड अधिकारी (SDO) के कार्यालय में एक निर्धारित शुल्क जमा करके 'चेक मीटर' लगाने की मांग कर सकता है।\r\n \r\n
- \r\n समानांतर टेस्टिंग: इसके बाद विभाग आपके घर में लगे विवादित स्मार्ट मीटर के ठीक बगल में (Parallel) एक दूसरा सामान्य मीटर लगाएगा।\r\n \r\n
- \r\n रीडिंग का मिलान: लगभग 7 से 15 दिनों तक दोनों मीटरों की रीडिंग का मिलान किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n समाधान: यदि इस टेस्टिंग में स्मार्ट मीटर की रीडिंग चेक मीटर से ज्यादा पाई जाती है, तो स्मार्ट मीटर को दोषपूर्ण मानकर तुरंत बदल दिया जाएगा। साथ ही, उपभोक्ता से अतिरिक्त लिया गया पैसा उसके खाते में वापस (Adjust) कर दिया जाएगा।\r\n \r\n
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जनता के विश्वास के बिना अधूरी है डिजिटल क्रांति
\r\n\r\nमेरठ के न्यू मोहनपुरी में अधिकारियों को चूड़ियां भेंट करने की घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन और जनता के बीच 'संवाद' (Communication) पूरी तरह से टूट चुका है। किसी भी नई और क्रांतिकारी तकनीक को केवल सरकारी आदेशों के जरिए लागू नहीं किया जा सकता; इसके लिए जनता को विश्वास में लेना जरूरी है।
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बिजली विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा। जब कोई उपभोक्ता शिकायत लेकर आए, तो उसे टरकाने के बजाय पारदर्शी तरीके से उसके मीटर की टेस्टिंग होनी चाहिए। जब तक आम जनता के मन से यह डर नहीं निकलेगा कि 'स्मार्ट मीटर' उनकी जेब काटने का जरिया नहीं है, तब तक ऐसे विरोध प्रदर्शन और टकराव की स्थितियां उत्पन्न होती रहेंगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.