मेरठ के पॉश इलाके शास्त्रीनगर में अपने घरों पर मंडराते बुलडोजर के खौफ से सड़क पर उतरीं महिलाओं के आंदोलन में एक नया और नाटकीय मोड़ आ गया है। 'सेटबैक' नियम के विरोध में सेक्टर-2 में चल रहे धरने पर पुलिस-प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बीच सड़क पर लगा टेंट उखाड़ फेंका है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जहां एक तरफ हड़कंप मच गया, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं ने हार नहीं मानी और 40 डिग्री से ज्यादा की तपती धूप में खुले आसमान के नीचे बैठकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।READ ALSO:-मेरठ में इंसानियत शर्मसार: एग्जाम देने निकली BA की छात्रा का अपहरण कर दरिंदगी; गन्ने के खेत में मिला निर्वस्त्र शव, 2 साल पहले भी हुई थी छेड़छाड़
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) के 'सेटबैक' (Setback) नियम के खिलाफ पिछले कई महीनों से सुलग रही चिंगारी अब एक बड़े टकराव का रूप लेती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों के अनुपालन में प्रशासन की सख्ती और अपने खून-पसीने की कमाई से बने मकानों को बचाने की जद्दोजहद के बीच फंसी जनता अब आर-पार के मूड में है। इसी कड़ी में शनिवार को शास्त्रीनगर के सेक्टर-2 और सेक्टर-4 में चल रहे धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस का एक बड़ा एक्शन देखने को मिला, जिसने इस पूरे आंदोलन की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, पुलिस की कार्रवाई और धरने के अंदर पनप रही गुटबाजी की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
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सीओ सिविल लाइन का बड़ा एक्शन: बीच सड़क से हटा टेंट

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शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट और आवासीय इलाकों में पिछले लगभग 15 दिनों से (इस नए चरण में) महिलाएं लगातार धरने पर बैठी हैं। सेक्टर-2 की महिलाओं ने सड़क के एक हिस्से पर अपना टेंट लगाया हुआ था, जहां वे रोज इकट्ठा होकर आवास विकास और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराती थीं।
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लेकिन शनिवार का दिन आंदोलनकारियों के लिए एक तगड़ा झटका लेकर आया। क्षेत्र की सीओ सिविल लाइन (CO Civil Line) शुचिता सिंह भारी पुलिस बल के साथ अचानक सेक्टर-2 के धरना स्थल पर पहुंच गईं। पुलिस ने मौके पर पहुंचते ही बिना किसी पूर्व चेतावनी के महिलाओं द्वारा लगाए गए टेंट को हटवाना शुरू कर दिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां मौजूद महिलाओं में भारी आक्रोश और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस कर्मियों ने टेंट का पूरा ढांचा खुलवा दिया और धरना स्थल को सड़क से खाली करा लिया।
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पुलिस-प्रशासन की दलील: 'जनता और बाजार की सहूलियत जरूरी'
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जब पुलिस की इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों और महिलाओं ने विरोध किया, तो सीओ शुचिता सिंह ने सख्त लहजे में प्रशासन का पक्ष रखा। सीओ ने स्पष्ट किया, "हमें लगातार सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों, दुकानदारों और आम राहगीरों की तरफ से शिकायतें मिल रही थीं। महिलाओं ने बीच सड़क पर टेंट लगा दिया था, जिससे यातायात पूरी तरह से बाधित हो रहा था। बाजार में आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था और जाम की स्थिति बन रही थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन सबका अधिकार है, लेकिन इसके कारण आम जनता और बाजार की व्यवस्था को ठप नहीं किया जा सकता। इसी असुविधा और अव्यवस्था को दूर करने के लिए हमने सड़क से टेंट हटवाया है।"
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तपती धूप में नहीं डिगा मातृशक्ति का हौसला

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मई के इस महीने में जब आसमान से आग बरस रही है और तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है, पुलिस का टेंट उखाड़ना महिलाओं के हौसले को तोड़ने के लिए काफी नहीं था। टेंट हटने के बाद भी महिलाओं ने धरना स्थल से उठने से साफ इनकार कर दिया।
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सेक्टर-2 की दर्जनों महिलाएं उसी तपती धूप और झुलसाने वाली गर्मी में खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठ गईं और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। पसीने से तर-बतर इन महिलाओं का स्पष्ट कहना था कि "जब तक हमें लिखित रूप में यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि हमारे आशियानों पर सेटबैक के नाम पर कोई बुलडोजर या हथौड़ा नहीं चलेगा, तब तक चाहे पुलिस टेंट उखाड़े या हमें गिरफ्तार करे, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।"
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'हमारी भूल, कमल का फूल' और हनुमान चालीसा का जाप

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गौरतलब है कि पुलिस की इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले इसी सेक्टर-2 के धरना स्थल पर महिलाओं ने अपने आंदोलन को धार देने के लिए एक बड़ा राजनीतिक और आध्यात्मिक कदम उठाया था। शुक्रवार को धरने पर बैठी महिलाओं ने सामूहिक रूप से 'हनुमान चालीसा' का जाप किया था। इसके तुरंत बाद, सत्ताधारी दल (BJP) के खिलाफ अपना भारी गुस्सा जाहिर करते हुए महिलाओं ने "हमारी भूल, कमल का फूल" के जोरदार नारे लगाए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के इस उग्र राजनीतिक विरोध और नारों के वीडियो वायरल होने के बाद ही प्रशासन पर सड़क खाली कराने का भारी दबाव पड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप अगले ही दिन टेंट उखाड़ने की यह त्वरित कार्रवाई की गई।
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सेक्टर-4 का टेंट क्यों बचा? प्रशासन की 'स्मार्ट' रणनीति

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इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि जहां एक तरफ सेक्टर-2 में पुलिस ने टेंट उखाड़ दिया, वहीं दूसरी तरफ सेक्टर-4 में भी महिलाओं का धरना प्रदर्शन उसी जोर-शोर से जारी है, लेकिन वहां पुलिस ने टेंट को हाथ तक नहीं लगाया।
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इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि सेक्टर-4 की महिलाओं ने अपना धरना स्थल मुख्य सड़क और बाजार के यातायात मार्ग से हटाकर एक सुरक्षित किनारे पर बनाया है। चूंकि उनके टेंट से न तो किसी राहगीर को परेशानी हो रही है और न ही यातायात बाधित हो रहा है, इसलिए पुलिस ने वहां किसी तरह का कोई बल प्रयोग या हस्तक्षेप नहीं किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से यातायात सुचारू करने के उद्देश्य से की गई थी।
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क्या 'अपनों' ने ही उखड़वाया टेंट? धरने में गुटबाजी की इनसाइड स्टोरी

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शास्त्रीनगर के इस धरने में केवल प्रशासन बनाम जनता की लड़ाई नहीं चल रही है, बल्कि इसके अंदर एक गहरी गुटबाजी और 'पॉलिटिक्स' भी पनप रही है। टेंट उखड़ने के पीछे इस गुटबाजी को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
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नवनियुक्त अध्यक्ष अर्पित मोगा का बयान: हाल ही में आपसी मतभेदों और खींचतान के चलते तीन दिन पहले ही सेक्टर-2 की कार्यकारिणी में बड़ा बदलाव किया गया था और नए सिरे से अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। सेक्टर-2 के नवनियुक्त अध्यक्ष अर्पित मोगा ने जानकारी देते हुए बताया, "सीओ महोदया ने अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम का हवाला देते हुए हमारा टेंट हटवा दिया है। लेकिन इसके बावजूद हमारी महिलाओं का संघर्ष जारी है और वे कड़ी धूप में बैठकर भी अपना विरोध जता रही हैं।"
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क्या कहती हैं महिलाएं? वहीं, तपती धूप में धरने पर बैठी कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि "हमारा टेंट प्रशासन की मर्जी से कम और आपसी रंजिश के चलते ज्यादा उखड़ा है। तीन दिन पहले जब से कार्यकारिणी बदली है और नया अध्यक्ष बना है, तभी से पुराने और असंतुष्ट गुट के लोगों ने प्रशासन को लगातार झूठी शिकायतें करना शुरू कर दिया था। यह हमारे ही बीच के आपसी मतभेद (Internal Conflict) का नतीजा है कि आज हमें बिना टेंट के चिलचिलाती धूप में बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है।"
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क्या होगा धरने का भविष्य? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। आवास विकास परिषद के इस सेटबैक नियम की चपेट में शास्त्रीनगर के लगभग 860 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां आ रही हैं। बीच में यह धरना दो बार स्थगित भी हुआ, लेकिन अब पिछले 15 दिनों से यह फिर से पूरे उफान पर है। पुलिस द्वारा टेंट हटाए जाने के बाद अब देखना यह है कि क्या तपती गर्मी महिलाओं के इस आंदोलन को ठंडा कर पाएगी, या फिर प्रशासन और जनता के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में कोई और बड़ा रूप लेगा। शहर भर की नजरें अब शास्त्रीनगर के इस घटनाक्रम और प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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