उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के पॉश इलाके शास्त्रीनगर में इन दिनों एक बड़ा जन-आंदोलन चल रहा है। आवास एवं विकास परिषद द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण के नोटिसों ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है। अपने घरों और दुकानों को बचाने के लिए स्थानीय निवासी, विशेषकर महिलाएं, सड़कों पर उतर आई हैं। बुधवार को मेरठ में हुई झमाझम बारिश के बावजूद शास्त्रीनगर में सेटबैक कार्रवाई का विरोध थमता हुआ नजर नहीं आया। तेज बारिश और टेंट में पानी भरने जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महिलाएं अपने धरनास्थल से नहीं हटीं और न्याय की मांग को लेकर डटी रहीं। यह प्रदर्शन अब केवल एक मोहल्ले का नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए चर्चा का विषय बन गया है। READ ALSO:-फैक्ट चेक: हाईवे पर पेट्रोल खत्म होने पर क्या टोल प्लाजा से मिलता है मुफ्त ईंधन? NHAI ने वायरल मैसेज की बताई सच्चाई, जानें नियम
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बारिश और जलभराव के बीच शास्त्रीनगर में सेटबैक कार्रवाई का विरोध
\r\n\r\nबुधवार दोपहर शहर में मौसम ने अचानक करवट ली और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। भारी बारिश के कारण धरनास्थल पर लगाया गया टेंट छोटा पड़ गया और उसमें से जगह-जगह पानी टपकने लगा। नीचे जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। लेकिन, अपने आशियाने को बचाने की जिद में बैठी महिलाओं के हौसले पस्त नहीं हुए। महिलाएं एक हाथ में छाता लेकर और दूसरे हाथ में तख्तियां पकड़कर टेंट के नीचे ही डटी रहीं।
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आंदोलन को आध्यात्मिक बल देने के लिए यहां रोजाना की तरह बुधवार सुबह भी धार्मिक अनुष्ठान किए गए। धरनास्थल पर महिलाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर सुंदरकांड के 11 पाठ किए। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया। महिलाओं का साफ कहना है कि जब तक उन्हें न्याय का ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, शास्त्रीनगर में सेटबैक कार्रवाई का विरोध इसी तरह पूरी ऊर्जा और श्रद्धा के साथ जारी रहेगा।
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14 जुलाई की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी निगाहें
\r\n\r\nइस पूरे विवाद की जड़ आवास एवं विकास परिषद की वह कार्रवाई है, जिसके तहत शास्त्रीनगर स्कीम नंबर-7 के 815 भवनों को सेटबैक (अवैध निर्माण या तय सीमा से आगे किए गए निर्माण) हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। अब प्रभावित परिवारों की आखिरी उम्मीद देश की सर्वोच्च अदालत से है।
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इस मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई प्रस्तावित है। जैसे-जैसे सुनवाई की तारीख नजदीक आ रही है, प्रभावित लोगों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। लोगों को डर है कि यदि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली, तो उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई से बनाए गए घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान मलबे के ढेर में तब्दील हो जाएंगे।
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व्यापारियों ने दिया समर्थन, बड़े टेंट की उठाई मांग
\r\n\r\nयह आंदोलन केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों ने भी इसे अपना पूर्ण समर्थन दिया है। तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज गर्ग ने धरने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए प्रशासन से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने जिला और पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया है कि मानसून और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए धरनास्थल पर एक बड़ा और वाटरप्रूफ टेंट लगाने की अनुमति दी जाए, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को मौसम की मार से बचाया जा सके।
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उन्होंने क्षेत्र के सभी व्यापारियों से बुधवार सुबह 11 बजे धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन को और अधिक मजबूती देने की अपील भी की। व्यापारियों का मानना है कि यदि प्रशासन अपनी कार्रवाई पर अड़ा रहा, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय अर्थव्यवस्था और बाजार को होगा।
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सेंट्रल मार्केट में मची अफरा-तफरी, खुद ही तोड़ रहे निर्माण
\r\n\r\nआवास एवं विकास परिषद की सख्ती और कार्रवाई के डर का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। प्रशासन के बुलडोजर से बचने और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए कई भवन स्वामी स्वयं ही सेटबैक के दायरे में आने वाले अपने मकानों और दुकानों के आगे के हिस्से को मजदूरों से हथौड़े चलवाकर हटवा रहे हैं।
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इस पूरी स्थिति का सबसे नकारात्मक असर शास्त्रीनगर के प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार का माहौल पूरी तरह से बदल गया है:
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- \r\n दुकानें हुईं बंद: बाजार में अधिकांश दुकानें बंद हो चुकी हैं, क्योंकि व्यापारियों को डर है कि किसी भी समय कार्रवाई हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n स्टॉक क्लियरेंस की होड़: जो कुछ दुकानें अभी खुली हुई हैं, उनके बाहर 'स्टॉक क्लियरेंस' और 'भारी छूट (Heavy Discount)' के बड़े-बड़े पोस्टर लगा दिए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n ऑनलाइन संदेश: व्यापारी अपने नियमित ग्राहकों को व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए संदेश भेजकर जल्द से जल्द सामान औने-पौने दामों पर बेचने का प्रयास कर रहे हैं।\r\n \r\n
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गोल मंदिर चौराहे पर भी गूंज रही न्याय की मांग
\r\n\r\nशास्त्रीनगर में सेटबैक कार्रवाई का विरोध केवल सेक्टर 2 और 4 तक ही सीमित नहीं है। शास्त्रीनगर के ऐतिहासिक गोल मंदिर के पास सेक्टर-3 और 4 के प्रमुख चौराहे पर भी महिलाओं का एक बड़ा समूह लगातार धरने पर बैठा है। इस चौराहे पर धरने का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि उनका यह संघर्ष कोई एक या दो दिन का नहीं है।
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महिलाओं का कहना है कि, "हम न्याय के लिए एक लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारे घरों में हमारे बच्चों का भविष्य और हमारे परिवारों की यादें जुड़ी हैं। जब तक हमें अपने घर और व्यापार को बचाने की इस लड़ाई में पूर्ण न्याय नहीं मिलता, हमारा यह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा।" प्रशासन और जनता के बीच का यह गतिरोध शहर के शांतिपूर्ण माहौल के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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मेरठ का शास्त्रीनगर इलाका इस समय एक बड़े प्रशासनिक और मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। शास्त्रीनगर में सेटबैक कार्रवाई का विरोध केवल ईंट-पत्थर के मकानों को बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों परिवारों की आजीविका और उनके अधिकारों का भी प्रश्न है। बारिश और खराब मौसम के बीच सड़क पर बैठी महिलाओं का यह दृढ़ संकल्प यह दर्शाता है कि वे हार मानने वाली नहीं हैं। अब सबकी निगाहें 14 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय इन सैकड़ों परिवारों को कोई अंतरिम राहत देता है, या फिर विकास प्राधिकरण का बुलडोजर इस इलाके के नक्शे को हमेशा के लिए बदल देगा।
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मेरठ के शास्त्रीनगर में आवास विकास परिषद द्वारा 815 मकानों को सेटबैक हटाने के नोटिस दिए जाने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को भारी बारिश के बीच भी सेक्टर 2 और 4 की महिलाएं धरनास्थल पर डटी रहीं और 11 सुंदरकांड के पाठ किए। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले की अहम सुनवाई होनी है। प्रशासन की कार्रवाई के डर से कई लोग खुद अपने मकानों का अगला हिस्सा तोड़ रहे हैं, जिससे सेंट्रल मार्केट का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। व्यापारी अपनी दुकानों का स्टॉक औने-पौने दामों पर निकालने को मजबूर हैं, वहीं महिलाओं ने न्याय न मिलने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने की चेतावनी दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.