मेरठ (8 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से बुधवार सुबह एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। सुबह-सुबह स्कूल जाने के लिए निकले 35 मासूम बच्चों की जिंदगी उस वक्त दांव पर लग गई, जब उनकी तेज रफ्तार स्कूल बस बेकाबू होकर सड़क किनारे एक गहरी खाई में जा पलटी। यह बस मेरठ के प्रतिष्ठित 'सेंट मैरी एकेडमी' (St. Mary Academy) की थी।READD ALSO:-मेरठ सेंट्रल मार्केट सीलिंग: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद 44 संपत्तियों पर एक्शन, रो पड़ीं महिलाएं, व्यापारी को आया हार्ट अटैक
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हादसे के बाद मौके पर कोहराम मच गया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़े और उन्होंने अपनी जान पर खेलकर बस के शीशे तोड़े और लहूलुहान व डरे-सहमे बच्चों को बाहर निकाला। शुरुआती जांच और बच्चों के बयानों में जो बात सामने आई है, वह किसी भी माता-पिता को डराने के लिए काफी है—आरोप है कि बस का ड्राइवर न केवल शराब के नशे में धुत था, बल्कि वह बस चलाते समय अपने मोबाइल फोन पर वीडियो भी देख रहा था।
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सुबह 7:30 बजे का वो खौफनाक मंजर: कैसे हुआ हादसा?
\r\n\r\nजानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे सेंट मैरी एकेडमी की स्कूल बस (UP-14-DT-7487) चिंदौड़ी, चरला और लावड़ गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल की तरफ आ रही थी। बस को लावड़ निवासी रूमान नाम का ड्राइवर चला रहा था। बस में कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक के लगभग 35 छोटे बच्चे सवार थे।
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जब बस काली नदी के पास 'अझौता मोड़' पर पहुंची, तो अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस बहुत तेज रफ्तार में थी। बेकाबू होने के बाद बस सीधे सड़क किनारे बनी एक खाई (गड्ढे) में जाकर पलट गई। बस पलटते ही अंदर बैठे बच्चों के बीच हाहाकार मच गया। बस के अंदर का नजारा बेहद खौफनाक था—बच्चों के स्कूल बैग, टिफिन, पानी की बोतलें और किताबें खून और धूल से सनी हुई पूरी बस में बिखरी पड़ी थीं।
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फरिश्ते बने स्थानीय लोग, शीशे तोड़कर बचाई जान
\r\n\r\nधमाके की आवाज और बच्चों के रोने की आवाजें सुनकर खेतों और सड़क पर मौजूद लोग तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे। बस के दरवाजे लॉक हो चुके थे और कई बच्चे सीटों के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। लोगों ने बिना समय गंवाए बस के शीशे तोड़े और एक-एक करके बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया।
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खून से लथपथ और घबराए हुए बच्चों को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। स्थानीय लोगों ने घायल बच्चों को तुरंत अपनी मोटरसाइकिलों और बाद में पहुंची एंबुलेंस की मदद से एसडीएस ग्लोबल अस्पताल (SDS Global Hospital) में भर्ती कराया। गनीमत यह रही कि इस भीषण हादसे में किसी बच्चे की जान नहीं गई, लेकिन 10 से अधिक बच्चों को चोटें आई हैं।
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"ड्राइवर अंकल मोबाइल देख रहे थे..." मासूम छात्र का सनसनीखेज खुलासा
\r\n\r\nइस हादसे के बाद प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की नींद उड़ाने वाला बयान एक मासूम छात्र ने दिया है। चिंदौड़ी के रहने वाले छात्र अक्षुण, जो खुद इस बस में सवार था, ने कांपती हुई आवाज में बताया:
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\r\n\r\n\r\n"ड्राइवर अंकल बस चलाते समय अपने मोबाइल फोन में कुछ देख रहे थे। अचानक बस मुड़ी और पलट गई। बस पलटते ही सारे शीशे टूट गए और हम एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। कई बच्चों को बहुत चोट लगी है। मैं किसी तरह खिड़की से बाहर निकल पाया।"\r\n
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परिजनों का फूटा गुस्सा: ड्राइवर और स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप
\r\n\r\nहादसे की खबर जैसे ही अभिभावकों तक पहुंची, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बदहवास हालत में परिजन पहले अस्पताल और फिर स्कूल पहुंचे। गुस्साए अभिभावकों ने प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव कर जमकर नारेबाजी की।
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- \r\n थाने में FIR की मांग: चिंदौड़ी के रहने वाले अभिभावक राहुल कौशिक ने दौराला थाने में लिखित तहरीर देकर स्कूल प्रशासन और ड्राइवर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। राहुल ने बताया, "ड्राइवर रूमान शराब के नशे में धुत था और बेहद लापरवाही से बस चला रहा था। हमने स्कूल प्रशासन को हादसे की सूचना दी, लेकिन उनकी ओर से कोई मदद नहीं आई। स्कूल बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।"\r\n \r\n
- \r\n RTO पर उठे सवाल: एक अन्य अभिभावक ने प्रशासन की पोल खोलते हुए कहा, "स्कूल में बिना फिटनेस वाली डग्गामार बसें चल रही हैं। अधिकारी निरीक्षण के नाम पर सिर्फ रिश्वत लेते हैं। आज हादसे के बाद स्कूल से 10 से अधिक बसों को गायब कर दिया गया है ताकि चेकिंग न हो सके।"\r\n \r\n
- \r\n लगातार शिकायतों को किया अनसुना: चिंदौड़ी के सनोज कुमार शर्मा ने बताया कि वे पहले भी चार बार स्कूल प्रबंधन से खटारा बसों और शराबी ड्राइवरों की शिकायत कर चुके थे, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।\r\n \r\n
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स्कूल प्रबंधन की लीपापोती: "ट्रक को बचाने में हुआ हादसा"
\r\n\r\nबच्चों और परिजनों के इतने गंभीर आरोपों के बावजूद स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता नजर आया। सेंट मैरी एकेडमी के मैनेजमेंट से जुड़े संजय ने बेतुका तर्क देते हुए कहा: "बस चिंदौड़ी से आ रही थी। हमें बताया गया है कि सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक से टक्कर को बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने बस को रॉन्ग साइड ले लिया, जिसके कारण बस स्लिप होकर गड्ढे में पलट गई। हम मामले की अपने स्तर पर जांच करा रहे हैं।"
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वहीं, स्कूल के प्रबंधक लारेंस ने बताया कि सूचना मिलने पर वे लोग मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने माना कि बस मालिक (आसिफ) के एक ड्राइवर की पहले शराब पीने की शिकायत आई थी, जिसे उन्होंने हटा दिया था। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या नया ड्राइवर भी उसी प्रवृत्ति का था? हादसे के बाद से ही आरोपी ड्राइवर रूमान मौके से फरार है, जिसकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी? (SDM, BEO और ARTO के बयान)
\r\n\r\nइस घटना ने परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की 'स्कूली वाहन सुरक्षा' (School Bus Safety) की पोल खोल दी है।
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- \r\n SDM उदित नारायण सेंगर: एसडीएम ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। उन्होंने बताया, "पुलिस-प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची थी। कक्षा-6 की छात्रा लावण्या का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि बाकी सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। प्रथम दृष्टया बस की फिटनेस सही पाई गई है, लेकिन हादसा किस कारण से हुआ (मोबाइल या शराब), इसकी गहनता से जांच की जा रही है।"\r\n \r\n
- \r\n ARTO राजेश कर्दम: एआरटीओ का बयान काफी हैरान करने वाला रहा। उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली थी। कुछ लोग कह रहे हैं कि ड्राइवर मोबाइल देख रहा था, जबकि कुछ का कहना है कि बच्चे बस में आगे आ गए थे, जिससे बस का संतुलन बिगड़ गया। हमने 1 अप्रैल से चेकिंग अभियान चलाया हुआ है और इस गाड़ी के पेपर पूरे हैं।"\r\n \r\n
- \r\n BEO शिव कुमार: ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर ने बताया कि शासन ने स्कूली वाहनों की निगरानी के लिए एक नया पोर्टल बनाया है, जिसमें 15 अप्रैल तक सभी स्कूलों को अपने वाहनों की फिटनेस, रजिस्ट्रेशन और ड्राइवर का पूरा विवरण अपलोड करना अनिवार्य है।\r\n \r\n
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कब तक मासूमों की जान से होगा खिलवाड़?
\r\n\r\nमेरठ का यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। चंद रुपयों का मुनाफा कमाने के लिए स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर्स अक्सर नौसिखिए और गैर-जिम्मेदार ड्राइवरों के हाथों में दर्जनों मासूमों की जान सौंप देते हैं। एक तरफ जहां सरकार 'सड़क सुरक्षा' को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत आज इस खाई में पलटी बस और बच्चों के बिखरे हुए खून-सने बैग्स ने बयां कर दी है।
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अब देखना यह है कि क्या फरार ड्राइवर रूमान को पुलिस जल्द गिरफ्तार कर पाएगी? और क्या सेंट मैरी एकेडमी के लापरवाह प्रशासन और फिटनेस के नाम पर खानापूर्ति करने वाले RTO अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या यह मामला भी कुछ दिनों में फाइलों में दबकर रह जाएगा? प्रशासन को इस घटना को एक कड़े सबक के रूप में लेकर पूरे जिले के स्कूली वाहनों की सघन और निष्पक्ष चेकिंग करनी चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.