उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का वह लोमहर्षक हत्याकांड, जिसे आज भी लोग 'नीला ड्रम कांड' के नाम से याद करते हैं, अपने अंतिम कानूनी पड़ाव पर पहुंच चुका है। प्यार की कसमें खाकर लव मैरिज करने वाली एक पत्नी जब अपने ही पति के खून की प्यासी हो जाए, तो समाज के हर रिश्ते से विश्वास उठने लगता है। मर्चेंट नेवी के होनहार अफसर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर उसकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने के इस खौफनाक मामले में मंगलवार (21 अप्रैल) को अदालत में भारी गहमागहमी देखने को मिली।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक वारदात: शादी का जश्न पल भर में मातम में बदला, मामूली विवाद में घर बुलाकर युवक की कनपटी पर दागी गोली, मेरठ में जिंदगी और मौत से जंग
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18 मार्च 2025 को अपनी गिरफ्तारी के बाद से चौधरी चरण सिंह जिला कारागार (मेरठ जेल) की सलाखों के पीछे दिन गिन रही मुख्य आरोपी मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल, पूरे 13 महीने बाद पहली बार खुली हवा और भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच अदालत की सीढ़ियां चढ़ते नजर आए। यह पेशी कोई सामान्य तारीख नहीं थी, बल्कि यह कानूनी प्रक्रिया का वह सबसे अहम हिस्सा था, जहां मुजरिमों को उनके खिलाफ इकट्ठा किए गए सुबूतों का सामना सीधे तौर पर करना होता है। अदालत परिसर में एक तरफ पुलिस की सख्त पहरेदारी थी, तो दूसरी तरफ एक बेबस और छले गए परिवार का असीमित दर्द, जो अपने बेटे के हत्यारों को फांसी के फंदे पर लटकते देखना चाहता है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, कोर्ट रूम के अंदर के माहौल और इस दिल दहला देने वाली वारदात की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।READ ALSO:-यूपी में आसमानी आग का कहर: आगरा भट्टी की तरह उबला, ताजमहल पर गश खाकर गिरे पर्यटक, अस्पतालों में मरीजों की बाढ़; 5 दिन का रेड अलर्ट
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कचहरी परिसर में हाई-सिक्योरिटी: पुलिस के पहरे में कोर्ट पहुंचे कातिल
\r\n\r\nमेरठ पुलिस इस मामले की संवेदनशीलता और लोगों के आक्रोश से भली-भांति वाकिफ थी। इसलिए, पेशी के दौरान सुरक्षा में कोई भी कोताही नहीं बरती गई। मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे पुलिस का एक विशेष दस्ता चौधरी चरण सिंह जिला कारागार पहुंचा और दोनों आरोपियों, साहिल और मुस्कान को अपनी कस्टडी में लिया। वहां से पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाती हुई सीधे कचहरी चौकी पहुंचीं।
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कचहरी चौकी पर माहौल बेहद तनावपूर्ण था। मीडियाकर्मियों और वकीलों की भारी भीड़ वहां इकट्ठा हो चुकी थी। करीब 15 मिनट तक दोनों आरोपियों को पुलिस जीप के अंदर ही कड़ी सुरक्षा में रखा गया। महिला पुलिसकर्मियों की एक अतिरिक्त टीम को भी वहां तैनात किया गया था ताकि मुस्कान को सुरक्षित कोर्ट रूम तक ले जाया जा सके। समय का एक-एक पल सौरभ के परिवार के लिए भारी गुजर रहा था। आखिरकार, ठीक 2 बजकर 54 मिनट पर पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाते हुए साहिल और मुस्कान को जिला जज की अदालत में प्रवेश कराया।
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चेहरे पर नकाब, झुकी हुई नजरें और गोद में 6 महीने की बच्ची का बोझ
\r\n\r\nअदालत परिसर में सबसे पहले पुलिस की गाड़ी से प्रेमी साहिल को उतारा गया। उसने सफेद रंग की टोपी और राउंड नेक की सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी। कभी सौरभ की पीठ में छुरा घोंपने वाला वह शख्स आज अदालत और भीड़ को देखकर इतना डरा हुआ था कि उसने गाड़ी से उतरते ही अपना सिर नीचे झुका लिया। वह बिना किसी की तरफ देखे, सिपाहियों के इशारे पर चुपचाप चलता रहा। रास्ते में कुछ वकीलों ने उसे रोकने और उससे सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए भीड़ को पीछे धकेल दिया और साहिल को सुरक्षित कोर्ट रूम तक पहुंचा दिया।
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साहिल के जाने के कुछ ही देर बाद, इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड और कातिल पत्नी मुस्कान को पुलिस घेरे में लाया गया। मुस्कान पीले रंग का प्रिंटेड सूट और काला दुपट्टा पहने हुई थी। दुनिया की नफरत और कैमरों की चमक से बचने के लिए उसने अपने चेहरे पर एक बड़ा काला मास्क लगा रखा था। लेकिन जिस चीज ने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान खींचा, वह थी उसकी गोद में लिपटी एक 6 महीने की दुधमुंही बच्ची।
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मुस्कान ने बच्ची को अपने दुपट्टे के पल्लू से कसकर लपेट रखा था। नजरें पूरी तरह झुकाए हुए, बिना कोई भाव दिखाए, मुस्कान सीधे कोर्ट रूम में दाखिल हो गई। कोर्ट रूम के अंदर जब तक साहिल से पूछताछ होती रही, मुस्कान उस बच्ची को गोद में लिए पीछे की सीट पर बिल्कुल खामोश बैठी रही।
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वापसी के समय एक बेहद मार्मिक और चुनौतीपूर्ण दृश्य भी देखने को मिला। जब अदालत की कार्यवाही समाप्त हुई और पुलिस उन्हें वापस जेल ले जाने के लिए पुलिस वैन के पास पहुंची, तो गोद में बच्ची होने के कारण मुस्कान को ऊंची वैन में चढ़ने में भारी परेशानी होने लगी। इस स्थिति को देखकर वहां मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तुरंत बच्ची को अपनी गोद में ले लिया। जब मुस्कान सुरक्षित रूप से वैन के अंदर बैठ गई, तब पुलिसकर्मी ने वह बच्ची वापस उसे सौंप दी।
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कोर्ट रूम के अंदर का 46 मिनट: जज ने दागे तीखे सवाल, सीआरपीसी 313 की अहम कार्यवाही
\r\n\r\nमंगलवार की यह फिजिकल पेशी कानूनी नजरिए से इस केस का टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है। अब तक इस मामले में अभियोजन पक्ष (Saurabh's family/State) की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए जा चुके हैं। इन गवाहियों के पूरे होने के बाद, अदालत ने 'सीआरपीसी की धारा 313' (Section 313 of the Code of Criminal Procedure) के तहत कार्यवाही शुरू की है।
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क्या होती है धारा 313? भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में यह वह महत्वपूर्ण चरण है जहां बचाव का मौका दिया जाता है। सभी गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए सारे सबूतों के दर्ज हो जाने के बाद, जज सीधे आरोपियों से मुखातिब होते हैं। जज आरोपियों को बताते हैं कि उनके खिलाफ क्या-क्या सबूत पाए गए हैं और उन्हें इन सबूतों पर अपना स्पष्टीकरण या सफाई देने का अंतिम अवसर दिया जाता है।
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सवालों की बौछार: कोर्ट में सबसे पहले साहिल का नंबर आया। जज ने साहिल को कटघरे में बुलाया और उससे पूरे 20 मिनट तक घटनाक्रम से जुड़े एक-एक सबूत पर सवाल-जवाब किए। इसके बाद मुस्कान को जज के सामने पेश किया गया। अपने ही पति की हत्या के आरोपों से घिरी मुस्कान से भी जज ने करीब 16 मिनट तक कड़ी पूछताछ की। दोनों आरोपी कुल 46 मिनट तक (2:54 PM से 3:40 PM तक) जिला जज की कोर्ट में रहे। इस दौरान उन्होंने क्या जवाब दिए, यह कोर्ट के रिकॉर्ड का हिस्सा है, लेकिन इस प्रक्रिया के पूरे होने का मतलब है कि अब यह केस अपने अंतिम मुकाम यानी फैसले के बिल्कुल करीब आ गया है।
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मातृत्व का रुदन और चीखें: 'मेरी बहू नहीं, वो डायन थी, उसने मेरा पूरा घर उजाड़ दिया'
\r\n\r\nकानून अपना काम कर रहा था, लेकिन अदालत के बाहर एक ऐसा दृश्य था जो किसी भी पत्थर दिल इंसान को रुला दे। जैसे ही साहिल और मुस्कान को कोर्ट परिसर में पेशी के लिए लाया गया, वहां पहले से अपने बेटे को न्याय दिलाने की आस में खड़ी सौरभ की बूढ़ी मां रेनू देवी बुरी तरह बिलख पड़ीं। अपने बेटे के खून से सने हाथों वाले उन चेहरों को देखते ही मां का दर्द, गुस्सा और बेबसी आंसुओं के रूप में फूट पड़ी।
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रेनू देवी ने रोते हुए जो बातें कहीं, वह उस परिवार के पिछले एक साल के नरक को बयां कर रही थीं। उन्होंने कहा, "मेरा पूरा परिवार पिछले एक साल से मेंटल डिस्टर्ब है। हमारे घर में कोई किसी से सीधे मुंह बात नहीं करता, खुशियां तो जैसे हमारे लिए खत्म हो गई हैं। इस लड़की (मुस्कान) ने मेरा हंसता-खेलता घर हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया। इन दोनों को अदालत से सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा होनी चाहिए। मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है। मैं नहीं चाहती कि भविष्य में किसी और मां का घर इस तरह से उजड़े।"
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मां का दर्द सिर्फ बेटे के छिन जाने का नहीं था, बल्कि उस धोखे का था जो उस लड़की ने दिया जिसे उन्होंने पलकों पर बिठाया था। रेनू देवी ने भारी मन से आगे बताया, "मैंने अपने बेटे से अपने लिए कभी एक रुपया नहीं मांगा। कुछ भी नहीं मंगाया। मैं जानती थी कि इस लड़की के शौक इतने बड़े थे कि इसका खर्चा ही पूरा नहीं होता था। मेरा बेटा सौरभ इसी के शौक और नखरे उठाने के लिए विदेश में, लंदन में जाकर नौकरी कर रहा था। मेरी अगर अपनी कोई साधारण बहू होती, तो वो ऐसे नीच काम थोड़ी करती। इसके सगे मां-बाप ने तो इसके चाल-चलन को देखकर इसे घर से भगा दिया था। जब वह लव मैरिज करके मेरे घर आई, तो हमने उसे बहू नहीं, बल्कि अपनी सगी बेटी की तरह रखा। लेकिन इसके घर में कोई संस्कार ही नहीं थे। इसे इसके परिवार ने डायन बनना सिखाया था। इनकी नजर में इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है। अगर आज इन दोनों को सजा नहीं हुई, तो ऐसे अपराधियों का भय खत्म हो जाएगा और अपराध को बल मिलेगा।"
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भाई राहुल का अदालत के बाहर सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा: 'वो बच्ची सौरभ की नहीं है'
\r\n\r\nइस पूरे मामले में मृतक सौरभ के बड़े भाई राहुल उर्फ बबलू ने एक मजबूत स्तंभ की तरह कानूनी लड़ाई लड़ी है। राहुल ही इस केस के मुख्य शिकायतकर्ता (तहरीरकर्ता) हैं और उन्होंने अदालत में 8 बार पेश होकर अपनी गवाही मजबूती से दर्ज कराई है।
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अदालत परिसर में जब मीडिया ने राहुल से बात की, तो उन्होंने मुस्कान की गोद में दिख रही 6 महीने की बच्ची को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज दावा किया। राहुल ने कहा, "मुस्कान जिस बच्ची को गोद में लेकर अदालत में हमदर्दी बटोरने आई है, वो बच्ची मेरे भाई सौरभ की है ही नहीं! यह पूरी तरह से असंभव है। मेरा भाई तो मर्चेंट नेवी में था और लंदन में रहता था। वह तो छुट्टी लेकर मेरठ में केवल सात दिन के लिए रुका था। जबकि यह बात पूरे मोहल्ले को पता थी कि सौरभ के पीछे से मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल रोजाना छिप-छिप कर मिलते थे। यह बच्ची उसी अवैध रिश्ते का नतीजा है।" राहुल के इस दावे ने केस में एक नई मनोवैज्ञानिक परत जोड़ दी है। अगर क्रोनोलॉजी (समय-सारिणी) को समझें तो मार्च 2025 में हत्या हुई और 18 मार्च को मुस्कान जेल गई। आज 13 महीने बाद उसकी गोद में 6 महीने की बच्ची है, जिसका मतलब है कि बच्ची का जन्म जेल के अंदर ही अक्टूबर 2025 के आसपास हुआ होगा। यानी हत्या के समय मुस्कान गर्भवती थी। यह तथ्य इस बात को और पुख्ता करता है कि हत्या की साजिश कितनी गहरी और घिनौनी थी।
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फ्लैशबैक: क्या था वह खौफनाक 'नीला ड्रम कांड'? कैसे रची गई थी मौत की साजिश
\r\n\r\nजो लोग इस केस की पृष्ठभूमि से वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए इस हत्याकांड की दास्तान जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह बताता है कि कैसे अंधा प्रेम और अवैध संबंध एक इंसान को हैवान बना देते हैं।
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लव मैरिज से शुरू हुई कहानी: मेरठ के रहने वाले मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ को अपने ही मोहल्ले की रहने वाली मुस्कान रस्तोगी से प्यार हो गया था। सौरभ के परिवार (विशेषकर माता-पिता) ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया था क्योंकि वे मुस्कान के व्यवहार और उसके पुराने संबंधों से वाकिफ थे। लेकिन प्यार में अंधे हो चुके सौरभ ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर मुस्कान से लव मैरिज कर ली।
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शादी के बाद सौरभ काम के सिलसिले में लंदन चला गया। इधर, ससुराल में रहने वाली मुस्कान का रवैया अपने सास-ससुर के प्रति बेहद खराब था। सौरभ के पिता ने बताया कि वह परिवार से हमेशा लड़ती-झगड़ती थी। सबसे बुरी बात यह थी कि सौरभ के जाने के बाद भी मुस्कान अपने पुराने प्रेमी साहिल से लगातार मिलती रहती थी। एक बार तो वह बिना किसी को बताए साहिल के साथ घर छोड़कर भाग भी गई थी। पुलिस की मदद से उसे वापस लाया गया और सौरभ ने उसे समझाया भी, लेकिन वह नहीं मानी।
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मौत का वह खौफनाक जाल: 25 फरवरी 2025 को मुस्कान का जन्मदिन था। अपनी पत्नी को सरप्राइज देने और उसका जन्मदिन मनाने के लिए सौरभ लंदन से छुट्टी लेकर ठीक एक दिन पहले, 24 फरवरी को मेरठ लौटा था। सौरभ का वापस आना साहिल और मुस्कान के अवैध संबंधों में रुकावट बन गया। साहिल इस बात से बेहद परेशान रहने लगा। दोनों ने तय किया कि अब सौरभ को हमेशा के लिए रास्ते से हटाना होगा। हत्या के लिए 4 मार्च का दिन मुकर्रर किया गया।
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4 मार्च 2025 की रात की वह दरिंदगी: उस खौफनाक रात को मुस्कान ने पूरी साजिश को बड़ी ही सफाई से अंजाम दिया। उसने सबसे पहले अपनी बड़ी बेटी पीहू को बेडरूम के बगल वाले दूसरे कमरे में सुला दिया। रात के डिनर में उसने सौरभ के खाने में भारी मात्रा में नशे की गोलियां मिला दीं। सफर की थकान और नशे की दवा के कारण सौरभ खाना खाते ही गहरी नींद में सो गया।
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जैसे ही सौरभ बेसुध हुआ, मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल को फोन करके घर बुला लिया। साहिल के आते ही दोनों ने मिलकर सोते हुए सौरभ के सीने में बेदर्दी से चाकू घोंप दिया। जब तक सौरभ की सांसें नहीं थम गईं, वे उस पर वार करते रहे।
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नीले ड्रम में लाश के टुकड़े: हत्या करने के बाद असली चुनौती थी लाश को ठिकाने लगाना। दोनों खून से लथपथ सौरभ की लाश को घसीटकर बाथरूम में ले गए। वहां उन्होंने एक बेहद अमानवीय कृत्य किया—उन्होंने लाश को काटने वाले हथियारों से उसके 4 टुकड़े कर दिए। इन टुकड़ों को छिपाने के लिए वे बाजार गए और पानी भरने वाला एक बड़ा नीले रंग का प्लास्टिक का ड्रम खरीद कर लाए। लाश के सभी टुकड़ों को उसी ड्रम में ठूंस कर भर दिया गया और उसे ब्रह्मपुरी इलाके में ही छिपा दिया गया।
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पर्दाफाश: सौरभ के परिवार वालों की उससे कई दिनों तक बात नहीं हो पा रही थी। वे बेचैन थे। अंततः 17 मार्च 2025 को किसी मुखबिर या बदबू के जरिए यह सूचना मिली कि एक घर में नीले रंग के ड्रम में कोई संदिग्ध चीज है। जब सौरभ का भाई राहुल वहां पहुंचा, तो ड्रम के अंदर उसके छोटे भाई की सड़ी-गली लाश के टुकड़े पड़े थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की और महज 24 घंटे के अंदर 18 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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अब आगे क्या? 28 अप्रैल को आ सकता है अदालत का बड़ा फैसला
\r\n\r\nइस बेहद जघन्य और सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस ने बहुत ही मजबूत चार्जशीट पेश की है। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 22 गवाहों ने केस को एक ठोस आधार दिया है। धारा 313 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब केवल दोनों पक्षों के वकीलों के बीच अंतिम बहस (Final Arguments) होनी बाकी है।
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अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। कानून के जानकारों का मानना है कि सबूतों की प्रकृति, अपराध की क्रूरता (लाश के टुकड़े करना), और गवाहों के बयानों को देखते हुए पूरी संभावना है कि 28 अप्रैल को अदालत इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दे। मृतक सौरभ का परिवार और पूरा मेरठ शहर अब उसी दिन का इंतजार कर रहा है, जब 'नीले ड्रम कांड' के इन दरिंदों को उनके किए की ऐसी सजा मिलेगी जो समाज में एक मिसाल बन सके। क्या उन्हें फांसी होगी या उम्रकैद? इसका जवाब अब 28 अप्रैल को मेरठ की अदालत तय करेगी।
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