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मेरठ/मुजफ्फरनगर: मेरठ का संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) एक बार फिर दलालों और भ्रष्टाचार के गठजोड़ को लेकर सुर्खियों में है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो चोरी की लग्जरी गाड़ियों की फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) मेरठ RTO से तैयार कराता था। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड RTO का ही एक लिपिक 'दीपक' बताया जा रहा है, जो दलालों के साथ मिलकर सरकारी रिकॉर्ड में सेंध लगा रहा था।READ ALSO:-'फेसबुक' पर प्यार, 5 साल शोषण और फिर मिला धोखा... बच्चे को गोद में लेकर SSP ऑफिस पहुंची पीड़िता, बोली- "अब दूसरी शादी कर रहा है"
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ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
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मुजफ्फरनगर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक गिरोह चोरी की गाड़ियों के फर्जी कागज तैयार कर उन्हें बाजार में बेच रहा है। जांच के दौरान गिरोह के तार मेरठ RTO कार्यालय से जुड़े। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए परतापुर थाना क्षेत्र के गगोल गांव निवासी शहजाद, रविंदर और प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस और परिवहन विभाग दोनों के होश उड़ा दिए।
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आरोपियों ने कबूल किया कि वे RTO में तैनात लिपिक दीपक के संपर्क में थे। दीपक की मदद से वे चोरी की गई महंगी और लग्जरी गाड़ियों के चेसिस और इंजन नंबर के आधार पर RTO के ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेरफेर कर नई और असली दिखने वाली RC तैयार करवा लेते थे। इन "वैध" कागजों के आधार पर गाड़ियों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था।
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RTO में मचा हड़कंप, DM ने लिया संज्ञान
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इस सनसनीखेज खुलासे के बाद मेरठ RTO में हड़कंप मच गया है। अपनी साख पर लगे बट्टे के बाद RTO अधिकारियों ने मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी.के. सिंह को पत्र लिखकर कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों और दलालों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. वी.के. सिंह ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने बताया कि RTO में बाहरी हस्तक्षेप की शिकायतें पहले भी मिल रही थीं। इसी के चलते एडीएम सिटी बृजेश कुमार और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को RTO कार्यालय की लगातार निगरानी करने और औचक छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने चेतावनी दी है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है, जबकि मास्टरमाइंड लिपिक दीपक की तलाश में छापेमारी की जा रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब मेरठ RTO फर्जीवाड़े को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी यहां फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और RC बनाने वाले कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
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डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी इस गोरखधंधे में लिप्त किसी भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मेरठ RTO में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहां पहले भी कई बार फर्जी लाइसेंस और RC बनाने वाले गिरोह पकड़े जा चुके हैं।
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