उत्तर प्रदेश के मेरठ में बिजली संकट गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच 13 घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रहने से हाहाकार मच गया। शनिवार रात 9 बजे से कटी बिजली रविवार सुबह 10 बजे तक नहीं आई। इस भयानक कटौती ने लोगों को पूरी रात जगाए रखा और सुबह पानी के लिए भी तरसा दिया।READ ALSO:-1 जुलाई से बदलने जा रहे हैं आपकी जेब से जुड़े ये 7 बड़े नियम, आर्थिक नुकसान से बचना है तो आज ही जान लें पूरी डिटेल
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1. रामलीला बिजली घर से जुड़े इलाकों में ब्लैकआउट

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भीषण गर्मी के मौसम में मेरठ शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। शनिवार रात करीब 9 बजे रामलीला बिजली घर से जुड़े दर्जनों इलाकों में एक साथ ब्लैकआउट हो गया।
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फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु नानक नगर, लिसाड़ी गांव, डी ब्लॉक, ईरा गार्डन और ईदगाह कॉलोनी जैसी प्रमुख कॉलोनियां अचानक अंधेरे में डूब गईं। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कटौती से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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2. गर्मी से बेहाल हुए बच्चे और बुजुर्ग

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रात भर बिजली न होने के कारण घरों का तापमान काफी बढ़ गया। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ी।
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स्थानीय महिलाओं ने बताया कि भीषण गर्मी में बच्चे पूरी रात अपनी मां से पूछते रहे कि लाइट कब आएगी। इंतजार करते-करते बच्चे सो गए, लेकिन बिजली नहीं आई। वहीं, उमस की वजह से बीमार और बुजुर्ग लोगों की तबीयत भी बिगड़ने लगी।
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3. अधिकारियों ने बंद किए फोन, बढ़ा आक्रोश

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इस मेरठ में बिजली संकट के दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। पसीने में तरबतर लोगों ने जब संबंधित बिजलीघर और एसडीओ (SDO) को फोन मिलाया, तो उनके मोबाइल फोन बंद मिले।
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संकट के समय में शिकायत सुनने वाला कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं था। फोन बंद होने और कोई जवाब न मिलने के कारण स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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4. आधी रात को बिजलीघर पर लोगों का धरना

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अधिकारियों से कोई संपर्क न हो पाने पर गुरु नानक नगर समेत कई इलाकों के लोग देर रात रामलीला मैदान स्थित बिजलीघर पहुंच गए। गुस्से से भरी महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भारी संख्या में वहां एकत्रित हुए और धरने पर बैठ गए।
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लगातार कई घंटों की कटौती से लोगों के घरों में लगे इन्वर्टर और बैटरी भी जवाब दे चुके थे। ऐसे में गर्मी से बेहाल जनता के पास प्रदर्शन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था।
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5. पानी की एक-एक बूंद को तरसे लोग

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मेरठ में बिजली संकट का सबसे बड़ा और सीधा असर रविवार सुबह पानी की सप्लाई पर देखने को मिला। 13 घंटे से अधिक समय तक लाइट गुल रहने से पानी की मोटरें नहीं चल सकीं और टंकियां खाली रह गईं।
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दैनिक कार्यों के अलावा लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हुआ। घरों में न तो बिजली थी और न ही पानी, जिससे पूरे इलाके के हालात बेहद गंभीर और चिंताजनक हो गए।
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6. जल्द समाधान न होने पर जनआंदोलन की चेतावनी

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देर रात धरने के दौरान बिजली कर्मचारियों ने जल्द आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त करा दिया था। हालांकि, रविवार सुबह 10 बजे तक भी इलाके में लाइट नहीं आई।
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इसके बाद स्थानीय निवासियों ने सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई और फोन बंद करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बड़ा जनआंदोलन करेंगे।
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कुल मिलाकर, मेरठ में बिजली संकट ने बिजली विभाग के दावों की पूरी तरह से पोल खोल दी है। 13 घंटे की लंबी कटौती और अधिकारियों की लापरवाही ने हजारों लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसा दिया है। प्रशासन को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए, ताकि जनता को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके।
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