त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही मेरठ महानगर की हवा 'जहरीली' हो गई है। पिछले 18 दिनों में शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है। मेरठ का AQI 80 के संतोषजनक स्तर से बढ़कर 300 के पार 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुँच गया है। इस खतरनाक वृद्धि के कारण मेरठ अब उत्तर प्रदेश का छठवां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जो यहाँ की 25 लाख से अधिक आबादी के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।READ ALSO:-AI Cyber Crime Alert: यूपी के बिजनौर में AI से बनी युवती की अश्लील वीडियो वायरल, ब्लैकमेलिंग के आरोप में 3 गिरफ्तार
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Background: 18 दिन में कैसे बिगड़े हालात?
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मेरठ में हवा की गुणवत्ता में गिरावट की गति चौंकाने वाली है। 1 अक्टूबर 2025 को शहर का औसत AQI केवल 80 था, जिसे 'संतोषजनक' माना जाता है। लेकिन, महज 18 दिनों के भीतर, यह स्तर 300 के खतरनाक स्तर को पार कर गया। शहर के जयभीमनगर इलाके में स्थिति सबसे भयावह है, जहाँ AQI 312 दर्ज किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर नगर निगम की सुस्ती ने हालात बिगाड़ दिए हैं।
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प्रदूषण के मुख्य कारण: लापरवाही और धूल
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विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण में इस तेज वृद्धि के पीछे नगर निगम की लापरवाही और स्थानीय कारक जिम्मेदार हैं:
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    टूटी सड़कें और उड़ती धूल: शहर की कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढे और टूटन है, जहाँ से वाहनों की आवाजाही से दिन भर धूल उड़ती रहती है।
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    कूड़े के ढेर: जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों में अक्सर आग लगा दी जाती है, जिससे जहरीला धुआँ हवा में मिल रहा है।
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    नगर निगम की सुस्ती: प्रदूषण नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिससे धूल के कण हवा में बने हुए हैं।
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Latest Update: निगरानी और बजट की स्थिति
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हैरानी की बात यह है कि 25 लाख से अधिक की आबादी वाले शहर में हवा की गुणवत्ता मापने के लिए केवल तीन मॉनिटरिंग सेंटर बने हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति इन आंकड़ों से भी कहीं ज्यादा खराब हो सकती है।
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    खर्च नहीं हुआ बजट: वायु गुणवत्ता सुधार के लिए नगर निगम के पास बजट की कमी नहीं है। वर्ष 2024-25 में 70 करोड़ का बजट होने के बावजूद, अब तक केवल 27.54 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं।
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    सबसे प्रदूषित इलाके: जयभीमनगर (312), दिल्ली रोड (281), बेगमपुल (275), पल्लवपुरम (267), और गंगानगर (240)।
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Official Statements: NGT की चेतावनी और संभावित रोक
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प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सख्त चेतावनियों का पालन करने का दबाव बढ़ गया है।
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    निर्माण कार्यों पर रोक: यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो शहर में चल रहे सभी प्रकार के निर्माण कार्यों (Construction Ban) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सकती है।
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    स्वास्थ्य जोखिम: प्रदुषण विभाग ने चेतावनी दी है कि AQI का यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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Impact & Next Step: दिवाली पर बिगड़ेगी स्थिति?
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प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट ने आगाह किया है कि यदि वायु गुणवत्ता सुधार के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए और दिवाली पर बड़े पैमाने पर पटाखे जलाए गए, तो AQI 350 के स्तर को भी पार कर सकता है। प्रशासन को पानी के छिड़काव और कूड़ा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि मेरठ की हवा को और जहरीला होने से बचाया जा सके।
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