धार्मिक आयोजनों में आस्था का सैलाब उमड़ता है, लेकिन प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही कैसे इस सैलाब को मातम में बदल सकती है, इसका दर्दनाक उदाहरण उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में देखने को मिला है। मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में निकाली जा रही भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) के दौरान एक बड़ा और हृदयविदारक हादसा हो गया।READ ALSO:-अब आपस में 'बात' करेंगी गाड़ियां! अंधे मोड़ों और कोहरे में नहीं होंगे एक्सीडेंट; सरकार 2028 से अनिवार्य करने जा रही है 'V2V' तकनीक
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रथ के ऊपर लगा विशाल ध्वज ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई टेंशन लाइन (High Tension Wire) से टकरा गया, जिससे पूरे रथ में करंट दौड़ गया। इस खौफनाक हादसे में 25 वर्षीय एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 10 अन्य श्रद्धालु बुरी तरह झुलस गए। मामले की गंभीरता और पुलिस महकमे की सीधी लापरवाही को देखते हुए मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे ने सख्त कदम उठाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस के एक्शन को विस्तार से समझते हैं।
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 Meerut Parikshitgarh Rath Yatra Accident | Police Station Incharge Suspended

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कैसे हुआ हादसा? चीखों में बदल गई भगवान की जय-जयकार

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शुक्रवार का दिन परीक्षितगढ़ के लिए आस्था और उल्लास का दिन था। इलाके में भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया गया था। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ रथ को खींचते हुए आगे बढ़ रहे थे।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह विशाल रथ रजवाहे की पटरी के पास से गुजर रहा था, तभी एक भयंकर हादसा हुआ। रथ की ऊंचाई काफी अधिक थी और उस पर एक विशाल ध्वज (झंडा) लगा हुआ था। सड़क के ठीक ऊपर से बिजली की हाई टेंशन लाइन (High-tension power line) गुजर रही थी। रथ खींचने वालों को इस खतरे का अंदाजा नहीं लग पाया और रथ का ऊपरी हिस्सा/ध्वज सीधे हाई टेंशन तार के संपर्क में आ गया।
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पलक झपकते ही लोहे और लकड़ी से बने उस विशाल रथ में करंट दौड़ गया। रथ से सटे हुए लगभग 10 से ज्यादा श्रद्धालु करंट की तेज चपेट में आ गए।
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    एक की मौत: इस हादसे में 25 वर्षीय युवक सचिन प्रजापति को करंट का सबसे जोरदार झटका लगा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सचिन की मौत की खबर से उसके परिवार में कोहराम मच गया।
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    10 घायल: करंट लगने से 10 अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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एक्शन में SSP: थाना प्रभारी सस्पेंड, CO से मांगा जवाब

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हादसे की खबर जैसे ही पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। घटना की गूंज लखनऊ तक पहुंची और एडीजी (ADG) स्तर के अधिकारियों ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
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किसी भी धार्मिक यात्रा के लिए रूट पास करना और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना स्थानीय थाने की जिम्मेदारी होती है। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह से फेल नजर आई। आला अधिकारियों के निर्देश के बाद एसएसपी (SSP) अविनाश पांडे ने तुरंत प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया:
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    इंस्पेक्टर और इंचार्ज निलंबित: एसएसपी ने परीक्षितगढ़ के तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) सुधीश सिरोही और टॉकिंग इंचार्ज (Tracking Charge) राजकुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
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    CO से स्पष्टीकरण: सिर्फ निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि सर्किल का जिम्मा संभाल रहे सीओ सदर देहात (CO Sadar Dehat) से भी मामले में लिखित स्पष्टीकरण (Written Explanation) तलब किया गया है।
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    नई तैनाती: थाने का कामकाज सुचारू रूप से चलाने और डैमेज कंट्रोल के लिए इंस्पेक्टर केदार सिंह को परीक्षितगढ़ का नया थाना प्रभारी (New SHO) नियुक्त कर दिया गया है।
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हादसे की जांच: पुलिस से कहां हुई इतनी बड़ी चूक?

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इस पूरे प्रकरण में पुलिस की घोर लापरवाही खुलकर सामने आई है। शुरुआती जांच में तीन बड़े कारण सामने आए हैं, जिनकी वजह से यह हादसा हुआ और SHO को सस्पेंड किया गया:
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    रूट का सर्वे न करना (Lack of Route Survey): पुलिस नियमों के अनुसार, जब भी किसी रथ यात्रा या जुलूस की परमिशन दी जाती है, तो पुलिस टीम को उस पूरे मार्ग का भौतिक सत्यापन (Physical Survey) करना होता है। पुलिस ने बिना यह देखे परमिशन दे दी कि रास्ते में बिजली के लटकते तार या हाई टेंशन लाइन तो नहीं है।
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    रथ की ऊंचाई की अनदेखी: रथ यात्रा के दौरान रथ और उस पर लगे ध्वज की ऊंचाई बहुत ज्यादा थी। पुलिस या आयोजकों में से किसी ने भी इस बात का ध्यान नहीं रखा कि इतनी ऊंचाई वाला रथ उस मार्ग से सुरक्षित निकल पाएगा या नहीं।
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    सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न होना: यात्रा के दौरान बिजली विभाग को सूचित करके उस रूट की बिजली कटवाना (Power Cut) या तारों को ऊंचे डंडों से उठवाना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया।
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फ्लैशबैक: राली चौहान हादसे की यादें और कांवड़ यात्रा का दबाव
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मेरठ पुलिस प्रशासन इस समय किसी भी हादसे को लेकर इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि पिछले साल का एक दर्दनाक घाव अभी तक भरा नहीं है।
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राली चौहान का दर्दनाक हादसा: आपको याद होगा कि पूर्ववर्ती वर्षों में मेरठ के ही राली चौहान (Rali Chauhan) इलाके में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के दौरान एक बेहद खौफनाक हादसा हुआ था। उस समय एक विशाल और ऊंची 'डाक कांवड़' ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन से टकरा गई थी। उस घटना में कई कांवड़ियों की झुलसकर दर्दनाक मौत हो गई थी। वह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था और प्रशासन की भारी किरकिरी हुई थी।
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आने वाली है कांवड़ यात्रा (Zero Tolerance Policy): अब कुछ ही दिनों में सावन का महीना और महा-कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और खासकर मेरठ कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र (Hub) है। लाखों की संख्या में कांवड़िए यहां से गुजरते हैं। ऐसे में कांवड़ यात्रा से ठीक पहले परीक्षितगढ़ में हुई इस घटना ने पुलिस प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं।
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मेरठ पुलिस और जिला प्रशासन अब 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) के मूड में है। एसएसपी की यह त्वरित और बड़ी कार्रवाई बाकी सभी थाना प्रभारियों (SHOs) के लिए एक कड़ा संदेश है कि आगामी कांवड़ यात्रा या किसी भी धार्मिक आयोजन में रूट के सर्वे, बिजली के तारों की ऊंचाई और सुरक्षा मानकों में रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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आस्था के नाम पर नियमों की अनदेखी अक्सर बेगुनाहों की जान ले लेती है। सचिन प्रजापति की मौत इसका एक दुखद परिणाम है। प्रशासन की यह निलंबन की कार्रवाई भले ही सख्त हो, लेकिन यह तभी सार्थक होगी जब भविष्य में हर जुलूस, रथ यात्रा और कांवड़ यात्रा के रूट का माइक्रो-लेवल पर सर्वे हो और बिजली विभाग तथा पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उम्मीद है कि इस हादसे से सबक लेकर आगामी त्योहारों पर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जाएगा।
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