मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अब हिचकोले खाती और गड्ढों वाली सड़कों के दिन जल्द ही लदने वाले हैं। रैपिड रेल (नमो भारत) और मेट्रो की सौगात पाने के बाद, अब शहर के भीतर की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को 'स्मार्ट' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ में CM योगी के सख्त आदेशों की उड़ रही धज्जियां: मेट्रो प्लाजा पर बाबा साहब की प्रतिमा बदहाल, अधिकारियों के खिलाफ कल सड़क पर उतरेगा 'शोषित क्रांति दल'
\r\n\r\n\r\n\r\n
मेरठ नगर निगम (Meerut Municipal Corporation) और लोक निर्माण विभाग (PWD) शहर की सड़कों के रखरखाव और निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल व्यवस्था 'रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम' (Road Asset Management System - RAMS) लागू करने जा रहे हैं। इस सिस्टम के लागू होने से न केवल सड़कों की उम्र बढ़ेगी, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह 'RAMS' क्या है, यह कैसे काम करेगा और मेरठ की जनता को इससे क्या सीधा फायदा मिलेगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
डॉक्टर की तरह सड़कों का 'इलाज' करेगा RAMS
\r\n\r\nअक्सर देखा जाता है कि सड़कें बनती हैं और कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं। इसके बाद यह पता लगाना मुश्किल होता है कि सड़क कब बनी थी, कौन सी सामग्री इस्तेमाल हुई थी और ठेकेदार की क्या जिम्मेदारी थी। 'रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम' (RAMS) इसी समस्या का डिजिटल समाधान है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
नगर निगम के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि जिस तरह एक डॉक्टर किसी मरीज का इलाज करने से पहले उसकी पुरानी 'मेडिकल हिस्ट्री' (Medical History) देखता है, ठीक उसी तरह आरएएमएस के जरिए शहर की हर एक सड़क का पूरा डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इस डिजिटल जन्मकुंडली में दर्ज होगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सड़क के निर्माण की तारीख और वर्ष।\r\n \r\n
- \r\n निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री (Material) की पूरी डिटेल।\r\n \r\n
- \r\n पिछली बार कब और कहां मरम्मत (Patchwork) की गई थी।\r\n \r\n
- \r\n सड़क बनाने वाले ठेकेदार और एजेंसी की जानकारी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
तकनीक का कमाल: सैटेलाइट और सेंसर से चलेगा दरारों का पता
\r\n\r\nइस नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी आधुनिक तकनीक है। इसमें सेंसर (Sensors) और जीआईएस (GIS - Geographic Information System) तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n भविष्यवाणी करने वाली तकनीक: सैटेलाइट इमेजिंग और सेंसर के जरिए मॉनिटरिंग रूम में बैठे अधिकारियों को पहले ही इस बात का अलर्ट मिल जाएगा कि सड़क के किस हिस्से में दरारें (Cracks) आ रही हैं या कहां पर गड्ढा होने की आशंका बन रही है।\r\n \r\n
- \r\n समय पर मरम्मत: यानी सड़क में बड़ा गड्ढा होने और उसके टूटने से पहले ही उसकी छोटी सी मरम्मत करा दी जाएगी। इससे सड़क पूरी तरह खराब होने से बच जाएगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बजट की बंदरबांट और मनमानी पर लगेगी लगाम
\r\n\r\nवर्तमान व्यवस्था में अक्सर यह शिकायत मिलती है कि जो सड़कें पहले से अच्छी स्थिति में हैं, उन पर भी बजट खपाने के लिए बार-बार कोलतार (Bitumen) की नई परत चढ़ा दी जाती है। वहीं, जिन जर्जर सड़कों को सच में मरम्मत की दरकार होती है, वे अपनी बारी का सालों तक इंतजार करती रहती हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
RAMS इस मनमानी और भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म कर देगा। सिस्टम खुद तय करेगा और सुनिश्चित करेगा कि सरकारी बजट केवल वहीं खर्च हो जहां मरम्मत की सबसे ज्यादा और असली जरूरत है। इस पारदर्शिता से सड़क निर्माण में किसी भी तरह की राजनीतिक खींचतान या ठेकेदारों की मनमानी नहीं चल सकेगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
तीन श्रेणियों में बंटेंगी शहर की सड़कें
\r\n\r\nइस सिस्टम को लागू करने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए शहर की सभी सड़कों को उनके डेटा के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों (Categories) में बांटा जाएगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n उत्कृष्ट (Excellent): वे सड़कें जो नई हैं और अच्छी स्थिति में हैं।\r\n \r\n
- \r\n खराब (Bad): वे सड़कें जिनमें मरम्मत की जरूरत है।\r\n \r\n
- \r\n सबसे खराब (Worst): वे सड़कें जिन्हें पूरी तरह से दोबारा बनाने की आवश्यकता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
इसी श्रेणीबद्ध डेटा के आधार पर सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए शासन द्वारा बजट का आवंटन किया जाएगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
5 से 15 साल की होगी सड़कों की गारंटी
\r\n\r\nइस व्यवस्था के लागू होने के बाद बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता में भारी सुधार आएगा। नगर निगम का लक्ष्य है कि अब जो सड़कें बनें, उनकी गारंटी कम से कम 5 से 15 साल तक की हो। समय पर छोटी-छोटी मरम्मत (Preventive Maintenance) होते रहने से सड़कों की लाइफ (उम्र) अपने आप बढ़ जाएगी। इससे सरकारी धनराशि की भारी बचत होगी और बार-बार एक ही सड़क को नया बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रदूषण घटेगा, सुरक्षित होगा सफर
\r\n\r\nइस डिजिटल मैनेजमेंट व्यवस्था को बनाने की मुख्य पहल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से की गई है। जर्जर और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण उड़ने वाली धूल शहर के वायु प्रदूषण (Air Pollution) का एक बड़ा कारण है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n धूल से मुक्ति: सड़कों के सुधरने से हवा में तैरने वाले धूल के कणों (PM 2.5 और PM 10) में भारी कमी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n दुर्घटनाओं पर ब्रेक: गड्ढों के कारण होने वाले सड़क हादसों में भी भारी कमी आएगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वर्तमान में नगर निगम के अधिकारी शहर की सभी सड़कों का विस्तृत रिकॉर्ड सूचीबद्ध (List) करने में जुटे हैं। इस डेटा को जल्द ही 'रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम' के सर्वर पर अपलोड कर दिया जाएगा। मेरठवासियों के लिए यह सिस्टम एक बड़ी राहत लेकर आने वाला है, जिससे उनका दैनिक आवागमन सुगम और सुरक्षित हो सकेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.