उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों (वेस्ट यूपी) में बृहस्पतिवार का दिन मौसम के भयंकर कहर का गवाह बना। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, और शामली सहित कई जिलों में शाम के समय अचानक आई तेज आंधी और झमाझम बारिश ने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। सड़कों पर लगे भारी-भरकम पेड़ और बिजली के खंभे ताश के पत्तों की तरह गिर पड़े। इस दौरान लोगों के मोबाइल फोन पर सायरन के साथ लगातार आपातकालीन मौसम चेतावनी (Emergency Alert) जारी की जाती रही, जिसने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया।READ ALSO:-CCSU मेरठ के पत्रकारिता विभाग में 'जातिवाद का जहर'? दलित छात्र के मानसिक उत्पीड़न पर NCSC का बड़ा एक्शन, रजिस्ट्रार को नोटिस
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इस पूरी प्राकृतिक आपदा में सबसे भयानक मंजर मेरठ जिले के मवाना क्षेत्र में देखने को मिला। मवाना के ततीना गांव में बृहस्पतिवार तड़के जो हुआ, वह किसी हॉलीवुड फिल्म के दृश्य से कम नहीं था। यहां एक ऐसा भीषण बवंडर (Tornado) आया, जिसने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर दिया।
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रात 3:30 बजे का वह खौफनाक बवंडर
\r\n\r\nमवाना क्षेत्र के गांव ततीना में बृहस्पतिवार तड़के करीब 3:30 बजे जब पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था, तभी प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) के साथ एक बेहद शक्तिशाली बवंडर गांव के बाहरी इलाकों और जंगलों से होकर गुजरा।
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गनीमत इस बात की रही कि यह विनाशकारी बवंडर घनी आबादी वाले क्षेत्र से नहीं गुजरा, बल्कि यह मुख्य रूप से जंगलों और खेतों से होकर निकला। यदि यह बवंडर गांव के बीच से गुजरता, तो जान-माल की एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति हो सकती थी। फिर भी, इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की फसलों, विशाल पेड़ों और विद्युत विभाग के बुनियादी ढांचे को ऐसा भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई करने में काफी लंबा समय लगेगा।
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\r\n\r\n\r\nहवा में उड़ गया फोल्डिंग पलंग: इस बवंडर की ताकत और तीव्रता का अंदाजा ततीना गांव के एक बाग के रखवाले मुन्ना की आपबीती से लगाया जा सकता है। मुन्ना बाग की रखवाली के लिए अपने फोल्डिंग पलंग पर सो रहे थे। तड़के अचानक तेज भयानक आवाज सुनकर जब उनकी नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि एक विशाल बवंडर उनकी तरफ आ रहा है। अपनी जान बचाने के लिए वह तुरंत भागकर बाग में बने एक पक्के कमरे के अंदर छिप गए। मुन्ना के कमरे में जाते ही, जिस फोल्डिंग पलंग पर वह सो रहे थे, वह बवंडर की तेज हवाओं में तिनके की तरह उड़ गया और दूर एक पेड़ की टहनियों पर जाकर लटक गया। यह खौफनाक मंजर देखकर मुन्ना की रूह कांप गई।\r\n
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यह बवंडर लगभग आधे घंटे तक पूरे क्षेत्र में तबाही मचाता रहा और इसके शांत होने के बाद इलाके में भारी ओलावृष्टि भी हुई, जिसने बची-खुची कसर पूरी कर दी।
\r\n\r\nकिसानों पर प्रकृति की दोहरी मार: फसलें और पेड़ बर्बाद
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इस प्राकृतिक आपदा ने सबसे गहरी चोट अन्नदाता यानी किसानों को दी है। ततीना और उसके आसपास के गांवों में किसानों की महीनों की मेहनत चंद मिनटों में मिट्टी में मिल गई।
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ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी चारे और गन्ने (ईख) की फसल पूरी तरह से बिछ गई है और बर्बाद हो गई है। वहीं, आंधी के कारण आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पेड़ों पर लगे कच्चे आम टूटकर जमीन पर गिर गए हैं, जिससे बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। धनपुर-तोफापुर मार्ग पर कई बड़े पेड़ गिरने से रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया था, जिसे बाद में प्रशासनिक अमले और ग्रामीणों की मदद से पेड़ काटकर खुलवाया जा सका।
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विभिन्न प्रकार के कीमती पेड़ (जैसे सागौन, शीशम, यूकेलिप्टिस और आम) जड़ से उखड़ गए। प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से इस भारी नुकसान के लिए तत्काल मुआवजे की गुहार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय एसडीएम (SDM) ने क्षेत्रीय लेखपाल को तुरंत मौके पर जाकर नुकसान का विस्तृत सर्वे करने और रिपोर्ट तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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ततीना गांव में किसानों को हुए नुकसान का विस्तृत विवरण:
\r\n\r\n| \r\n किसान का नाम \r\n | \r\n \r\n उखड़े हुए पेड़ों की संख्या और प्रकार \r\n | \r\n \r\n अन्य नुकसान \r\n | \r\n
| \r\n वेदप्रकाश \r\n | \r\n \r\n 8 आम के पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n किरणपाल \r\n | \r\n \r\n 3 पेड़ \r\n | \r\n \r\n खेत की डोल क्षतिग्रस्त \r\n | \r\n
| \r\n नरेंद्र \r\n | \r\n \r\n 1 पेड़ \r\n | \r\n \r\n खेत की डोल क्षतिग्रस्त \r\n | \r\n
| \r\n सुभाष \r\n | \r\n \r\n 1 शीशम और 2 आम के पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n लालसिंह \r\n | \r\n \r\n 2 शीशम के पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n अक्कूवीर \r\n | \r\n \r\n 6 सागौन के पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n अचल सिंह \r\n | \r\n \r\n 6 आम के पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n सतीश व रजनीश \r\n | \r\n \r\n 10 आम, 2 कटहल, 18 यूकेलिप्टिस, 6 पॉपुलर \r\n | \r\n \r\n कुल 36 पेड़ों का भारी नुकसान \r\n | \r\n
| \r\n अन्य रजनीश \r\n | \r\n \r\n 4 पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
| \r\n राजबीर \r\n | \r\n \r\n 1 आम का पेड़ \r\n | \r\n \r\n - \r\n | \r\n
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कुल नुकसान: 10 से अधिक किसानों के लगभग 68 कीमती पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं।
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विद्युत विभाग का ढांचा ध्वस्त, 30 लाख की चपत
\r\n\r\nइस बवंडर का दूसरा सबसे बड़ा शिकार विद्युत निगम (Electricity Department) हुआ है। मवाना क्षेत्र में बिजली का पूरा ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया है।
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- \r\n सठला बिजलीघर को सबसे ज्यादा नुकसान: इस आपदा में सठला सब-स्टेशन को सर्वाधिक नुकसान झेलना पड़ा है।\r\n \r\n
- \r\n खंभे और ट्रांसफार्मर धराशायी: पूरे प्रभावित क्षेत्र में 95 हाईटेंशन (HT) बिजली के खंभे और 30 भारी-भरकम ट्रांसफार्मर हवा के दबाव से टूटकर या उखड़कर जमीन पर गिर गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n 33 केवी लाइन क्षतिग्रस्त: फिटकरी, दुर्वेशपुर, ततीना और जंधेड़ी गांवों से होकर गुजरने वाली मुख्य 33 केवी विद्युत लाइन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। तार टूटकर खेतों में पड़े हैं।\r\n \r\n
- \r\n कृषि फीडर ठप: गनीमत यह है कि विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आबादी वाले क्षेत्रों (Residential areas) की बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी है। हालांकि, सठला, तोफापुर, नंगली और बना गांवों के कृषि फीडर (Agriculture Feeder) पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिसके कारण ट्यूबवेलों की आपूर्ति ठप है और सिंचाई का काम रुक गया है।\r\n \r\n
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विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) सतीश चंद्र ने मौके का मुआयना करने के बाद बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से विभाग को 30 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक चपत लगी है। पूरा तंत्र इतना बुरी तरह बिखरा हुआ है कि इसे पूरी तरह से दुरुस्त करने और कृषि फीडर चालू करने में कम से कम तीन दिन का समय और लगेगा। अकेले एसडीओ (SDO) रामजन्म सिंह के क्षेत्र में 60 से अधिक खंभे और 3 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिन्हें बदलने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
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वेस्ट यूपी के अन्य जिलों का हाल: उड़ गए टिन शेड और होर्डिंग
\r\n\r\nबृहस्पतिवार शाम की आंधी केवल मवाना तक सीमित नहीं थी। मेरठ शहर, मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर में भी हवा की गति इतनी तेज थी कि कई प्रमुख चौराहों पर लगे विशाल विज्ञापन होर्डिंग्स हवा में उड़ गए। दुकानों और मकानों की छतों पर रखे भारी टिन शेड (Tin Sheds) भी उड़कर सड़कों पर आ गिरे, जिससे कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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इस दौरान प्रशासन द्वारा मोबाइल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए लगातार लोगों के फोन पर 'सायरन अलर्ट' भेजे गए, जिसमें लोगों से घरों के अंदर रहने, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की गई। यह अलर्ट सिस्टम काफी कारगर साबित हुआ, जिससे कई लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए।
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वर्तमान में प्रशासन, राजस्व विभाग (लेखपाल) और विद्युत निगम की टीमें ग्राउंड जीरो पर काम कर रही हैं। रास्तों से पेड़ों को हटा दिया गया है और बिजली व्यवस्था को बहाल करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी चेतावनी जारी रखी है, जिसके मद्देनजर प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
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