मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक और हृदय विदारक घटना सामने आई है। जिस परिवार में पहले से ही एक बुजुर्ग की मौत का मातम पसरा था, वहां चंद घंटों के भीतर ही चार जवान बेटों के गंगा में डूबने से कोहराम मच गया। यह मेरठ मखदुमपुर गंगा घाट हादसा उस वक्त हुआ जब एक 102 वर्षीय बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए पांच युवक गंगा नदी में स्नान करने के लिए उतरे थे। तेज बहाव और गहरे पानी का अंदाजा न लग पाने के कारण पांचों युवक डूबने लगे। चीख-पुकार सुनकर एक युवक को तो किसी तरह बचा लिया गया, लेकिन चार युवक गंगा की तेज धारा में बह गए।READ ALSO:-मौत का 'अंधा मोड़': बिजनौर NH-734 पर भीषण हादसा; 20 फीट नीचे खेत में पलटी अर्टिगा कार, मची चीख-पुकार, 7 लोगों की हालत गंभीर
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देर शाम तक पुलिस, गोताखोरों और प्रशासन की टीम द्वारा सघन सर्च ऑपरेशन (Search Operation) चलाए जाने के बावजूद चारों युवकों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। इस घटना ने पूरे जलालपुर गांव और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है।
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कैसे हुआ यह दर्दनाक मेरठ मखदुमपुर गंगा घाट हादसा?

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंचौली थाना क्षेत्र के लावड़ चौकी अंतर्गत आने वाले गांव जलालपुर की निवासी 102 वर्षीय बुजुर्ग महिला भगवती देवी का शुक्रवार को निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार और गांव के लोग मखदुमपुर गंगा घाट पहुंचे थे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, भगवती देवी के भांजे के बच्चे और उनके चचेरे भाई गंगा में स्नान करने के लिए उतरे।
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इनमें अभिषेक, हिमांशु, दीपांशु, प्रियांशु और प्रदीप शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घाट के किनारे जहां बाकी लोग मौजूद थे, वहां पानी कम था। लेकिन ये पांचों युवक नहाते-नहाते किनारे से काफी दूर और गहरे पानी की तरफ चले गए। गंगा का जलस्तर और बहाव तेज होने के कारण अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया।
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एक को बचाने के चक्कर में डूबे चारों किशोर

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इस मेरठ मखदुमपुर गंगा घाट हादसा के चश्मदीद रिश्तेदार राहुल ने दिल दहला देने वाला मंजर बयां किया। राहुल ने बताया, "हम सभी किनारे पर मौजूद थे। नहाते समय अचानक एक किशोर गहरे पानी में जाकर डूबने लगा और बचाव के लिए चीखने लगा। उसे बचाने के लिए उसके साथ मौजूद अन्य चारों किशोर भी गहरे पानी में कूद पड़े, लेकिन पानी का भंवर इतना तेज था कि वे सभी डूबने लगे।"
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राहुल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नदी में छलांग लगा दी। राहुल के अनुसार, "मेरे हाथ में प्रदीप के बाल आ गए और मैंने पूरी ताकत लगाकर उसे किनारे की तरफ खींच लिया, जिससे उसकी जान बच गई।" लेकिन बदकिस्मती से अभिषेक, हिमांशु, दीपांशु और प्रियांशु गंगा की तेज लहरों में ओझल हो गए।
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डूबने वाले युवकों की पहचान

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हादसे की सूचना मिलते ही एसपी देहात (SP Rural) अभिजीत कुमार मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने डूबने वाले चारों युवकों की पहचान कर ली है, जो आपस में चचेरे-तहेरे भाई हैं:
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    अभिषेक (22 वर्ष): कमल सिंह का बेटा। (अभिषेक वर्तमान में एलएलबी - LLB की पढ़ाई कर रहा था।)
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    हिमांशु (17 वर्ष): कमल सिंह का बेटा।
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    दीपांशु (15 वर्ष): सोनू का बेटा।
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    प्रियांशु (17 वर्ष): सोनू का बेटा।
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कमल सिंह और सोनू के दोनों बेटों के एक साथ गंगा में समा जाने की खबर जैसे ही जलालपुर गांव पहुंची, वहां मातम छा गया। एक साथ चार बच्चों के डूबने की सूचना पाकर परिवार के लोग और भारी संख्या में ग्रामीण रोते-बिलखते हुए मखदूमपुर घाट की तरफ दौड़ पड़े। परिजनों ने घाट के किनारे ही डेरा डाल लिया है और उनकी आंखें गंगा की लहरों की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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 गोताखोरों की मदद से गंगा नदी में घंटों तक तलाश अभियान चलाया गया, लेकिन देर शाम तक चारों युवकों का कोई पता नहीं चल सका।

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प्रशासन का एक्शन: मोटरबोट और गोताखोरों से सर्च अभियान

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चार युवकों के डूबने की घटना से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मवाना सर्किल के सीओ (CO) पंकज लवानिया तुरंत पुलिस फोर्स के साथ मखदुमपुर घाट पहुंच गए। इसके साथ ही एसडीएम संतोष सिंह, तहसीलदार निरंकार सिंह और नायब तहसीलदार नितेश सैनी ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की कमान संभाली।
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सर्च ऑपरेशन में लगाई गई पूरी ताकत:

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    गोताखोर और पीएसी (PAC): स्थानीय गोताखोरों के साथ-साथ पीएसी की फ्लड कंपनी को युवकों की तलाश में लगाया गया है।
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    दमकल विभाग (Fire Brigade): दमकल विभाग की टीम भी उपकरणों के साथ मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।
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    वाइल्ड लाइफ मोटरबोट: मखदुमपुर घाट का क्षेत्र काफी सुदूर और विस्तृत है। इसे देखते हुए वाइल्ड लाइफ (वन्यजीव) विभाग की मोटरबोट को भी सर्च अभियान में शामिल किया गया है ताकि नदी के दूरस्थ किनारों तक तलाशी ली जा सके।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जब तक युवकों का पता नहीं चल जाता, तब तक रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी रहेगा। हालांकि, दो घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गोताखोरों को कोई सफलता हाथ नहीं लगी थी।
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मेरठ मखदुमपुर गंगा घाट हादसा एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि नदियों और जलाशयों में स्नान करते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। अनजान घाटों और गहरे पानी में जाने का जोखिम जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन को भी घाटों पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ-साथ गोताखोरों की स्थायी तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए। फिलहाल, सभी की प्रार्थनाएं उन चार युवकों और उनके बदहवास परिवार के साथ हैं, जो इस अकल्पनीय दुख के क्षण से गुजर रहे हैं।
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शुक्रवार को मेरठ के मखदुमपुर गंगा घाट पर एक 102 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए पांच युवक गंगा स्नान के दौरान गहरे पानी में डूब गए। एक रिश्तेदार ने साहस दिखाते हुए प्रदीप नामक युवक को बचा लिया, लेकिन अभिषेक, हिमांशु, दीपांशु और प्रियांशु तेज बहाव में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम, एसपी देहात और सीओ मवाना मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग, गोताखोरों और वाइल्ड लाइफ की मोटरबोट की मदद से गंगा में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। चारों युवक जलालपुर गांव के रहने वाले थे, जिनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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