उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद दर्दनाक और व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करने वाली खबर सामने आई है। शनिवार को एक भयानक मेरठ कंकरखेड़ा हादसा (Meerut Kankarkhera Hadsa) हुआ, जिसमें नगर निगम के एक संविदा कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान जान चली गई। स्ट्रीट लाइट ठीक करने के लिए बिजली के पोल पर चढ़ा कर्मचारी अचानक हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया और सीधे जमीन पर आ गिरा। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जिला अस्पताल में घंटों तक भारी हंगामा किया। स्थिति को बेकाबू होता देख प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मुआवजे का ऐलान कर मामले को शांत कराया। READ ALSO:-मेरठवासियों को मिला विकास का 'डबल तोहफा'! 13 करोड़ से शुरू हुआ बागपत रोड का चौड़ीकरण, लिसाड़ी के 25 हजार लोगों का 32 साल पुराना 'पानी' का इंतजार भी खत्म
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मेरठ कंकरखेड़ा हादसा: कैसे घटी यह दर्दनाक घटना?
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के शोभापुर इलाके में 36 वर्षीय अमित पुत्र विजेंदर अपने परिवार के साथ निवास कर रहे थे। अमित मेरठ नगर निगम (Meerut Nagar Nigam) के स्ट्रीट लाइट सेक्शन में एक संविदा कर्मचारी (Contractual Worker) के रूप में कार्यरत थे। वह रोजमर्रा की तरह शनिवार को भी अपनी ड्यूटी पर गए थे।
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दोपहर के समय अमित को कंकरखेड़ा फ्लाई ओवर के पास खराब पड़ी एक स्ट्रीट लाइट को ठीक करने का काम सौंपा गया। लाइट को दुरुस्त करने के लिए अमित जैसे ही बिजली के पोल पर चढ़े, अचानक उन्हें जोरदार करंट लगा। करंट का झटका इतना भयंकर था कि अमित पोल से सीधा नीचे पक्की जमीन पर आ गिरे। आनन-फानन में वहां मौजूद लोग और साथी कर्मचारी उन्हें उठाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने से पहले ही अमित ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक मेरठ कंकरखेड़ा हादसा ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
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ठेकेदार पर घोर लापरवाही का आरोप
\r\n\r\nअमित की मौत की खबर जैसे ही उनके परिजनों और साथी कर्मचारियों को मिली, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लोगों ने इस घटना को हादसा कम और हत्या ज्यादा बताया। आक्रोशित लोगों ने नगर निगम के ठेकेदार को अमित की मौत का सीधा जिम्मेदार ठहराया।
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परिजनों और कर्मचारियों का स्पष्ट आरोप था कि ठेकेदार द्वारा बिना 'शट डाउन' (बिजली आपूर्ति बंद किए बिना) लिए ही कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर पोल पर चढ़ा दिया जाता है। सुरक्षा उपकरणों (Safety Gears) का भी भारी अभाव रहता है। अमित भी बिना शट डाउन के पोल पर चढ़ा था, जिसके कारण काम करते वक्त उसे करंट लगा और वह सीधा नीचे आ गिरा। पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए आनन-फानन में शव को जिला अस्पताल भिजवाया।
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जिला अस्पताल में परिजनों और व्यापारियों का भारी हंगामा
\r\n\r\nशव जिला अस्पताल पहुंचते ही पीड़ित परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग वहां एकत्रित हो गए और उन्होंने नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। संविदा कर्मचारी की मौत की सूचना जंगल में आग की तरह फैली, जिसके बाद मेरठ व्यापार मंडल से जुड़े कई प्रमुख व्यापारी नेता, जिनमें जीतू सिंह नागपाल और शैंकी वर्मा शामिल थे, तुरंत जिला अस्पताल पहुंच गए।
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शुरुआती दौर में नगर निगम की तरफ से किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के अस्पताल न पहुंचने पर व्यापारी नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई। पूरा अस्पताल परिसर नगर निगम और ठेकेदार विरोधी नारों से गूंज उठा। हंगामा बढ़ता देख देहलीगेट थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची और धरने पर बैठे लोगों को समझाने का प्रयास किया।
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पत्नी आरती और 4 बच्चों के भविष्य पर खड़ा हुआ संकट
\r\n\r\nव्यापारी नेता शैंकी वर्मा और जीतू नागपाल ने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा कि मृतक अमित बेहद गरीब था और मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। उसकी पत्नी आरती भी परिवार का भरण-पोषण करने के लिए घर-घर जाकर छोटे-मोटे काम करती है। अमित के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब घर के मुखिया के अचानक चले जाने से इस परिवार के सामने जीविका चलाने और भुखमरी का बड़ा संकट आकर खड़ा हो गया है।
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परिजनों और नेताओं ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं:
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- \r\n पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।\r\n \r\n
- \r\n मृतक की पत्नी आरती को नगर निगम में स्थायी नौकरी दी जाए।\r\n \r\n
- \r\n चारों अनाथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा उठाया जाए।\r\n \r\n
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अपर नगर आयुक्त ने संभाला मोर्चा, दिया 5 लाख का चेक
\r\n\r\nजिला अस्पताल में इमर्जेंसी वार्ड के सामने लगभग तीन घंटे तक यह भारी हंगामा चलता रहा। हंगामे और धरने की सूचना मिलते ही नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद अपर नगर आयुक्त (AMC) लवी त्रिपाठी सीधे जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने धरना दे रहे आक्रोशित परिजनों और व्यापारी नेताओं से आमने-सामने बात की।
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व्यापारी नेता जीतू नागपाल व शैंकी वर्मा ने परिवार के भरण-पोषण का मुद्दा बेहद मजबूती से उनके सामने उठाया। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच तीखी गहमागहमी होती रही। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें ठोस लिखित आश्वासन और मदद नहीं मिलेगी, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
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इसी बीच संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने अपर नगर आयुक्त से इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया। दबाव बढ़ता देख, कुछ ही देर बाद अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने संविदा कर्मचारियों को आपात स्थिति में मिलने वाली मदद के तौर पर पांच लाख रुपये (5 Lakh Rupees) का एक चेक मंगाकर मृतक अमित की पत्नी आरती को सौंपा।
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नौकरी और बच्चों की शिक्षा पर भी बनी सहमति
\r\n\r\nकेवल चेक देने से बात नहीं बनी। व्यापारी नेताओं ने जीविका चलाने के लिए आरती को नौकरी दिलाए जाने का भी कड़ा आग्रह किया, जिसे अंततः प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया। अपर नगर आयुक्त ने आरती को आगे की कागजी प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए सोमवार को नगर निगम कार्यालय बुलाया है।
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इसके अलावा बच्चों की शिक्षा के खर्च का महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठा। इस पर मौके से ही एडीएम सिटी (ADM City) बृजेश कुमार सिंह से टेलीफोनिक वार्ता की गई, जिन्होंने बच्चों की पढ़ाई का उचित समाधान निकालने का पूरा भरोसा दिलाया।
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लगातार तीन घंटे तक चले इस भारी हंगामे के बाद, जब प्रशासन ने तीनों मुख्य मांगें (मुआवजा, नौकरी और शिक्षा) मान लीं और 5 लाख का चेक सौंप दिया, तब जाकर परिजनों ने अपना धरना समाप्त किया। धरना समाप्त होने के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे सुरक्षित मोर्चरी भिजवा दिया है। रविवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिवार के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
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यह मेरठ कंकरखेड़ा हादसा एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि सरकारी विभागों में संविदा कर्मचारियों की जान की कीमत कितनी सस्ती समझी जाती है। अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने आश्वासन तो दे दिया है कि अन्य मांगों को भी जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में ठेकेदारों की ऐसी जानलेवा लापरवाही पर कोई सख्त लगाम लगेगी? बिना शट डाउन और बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराने वाले ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी और 'अमित' को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।
Sabse pehle comment karne wale banein.