खबरीलाल विशेष रिपोर्ट
\r\n\r\nमेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक परिवार जो पहले ही अपनी वयोवृद्ध सदस्या के निधन के शोक में डूबा था, उस पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इंचौली थाना क्षेत्र के मखदुमपुर गंगा घाट पर शुक्रवार दोपहर अपनी 102 वर्षीय दादी का अंतिम संस्कार करने पहुंचे परिवार के चार चिराग गंगा की तेज लहरों में समा गए।Read also:-मेरठ में मौत का 'जाम': सरकारी ठेके की शराब पीते ही 3 लोगों ने तोड़ा दम, परिजनों के हंगामे के बाद सील हुई दुकान, पुलिस महकमे में हड़कंप
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हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर मौजूद सैकड़ों लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। हादसे के बाद से प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और लापता युवकों की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
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शोक से शुरू हुआ सफर, मातम में बदला
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, इंचौली थाना क्षेत्र की लावड़ चौकी के अंतर्गत आने वाले ग्राम जलालपुर की रहने वाली 102 वर्षीय बुजुर्ग महिला भगवती देवी का शुक्रवार को निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पूरा परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग मखदुमपुर गंगा घाट पहुंचे थे। दोपहर करीब 3 बजे अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक प्रक्रियाएं संपन्न हो चुकी थीं। चिता को मुखाग्नि देने के बाद परिवार के कुछ युवा सदस्य परंपरा के अनुसार गंगा में स्नान करने के लिए घाट पर गए।
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इनमें भगवती देवी के भांजे के बच्चे 22 वर्षीय अभिषेक और 17 वर्षीय हिमांशु (पुत्र कमल सिंह) अपने चचेरे भाइयों 15 वर्षीय दीपांशु, 17 वर्षीय प्रियांशु (पुत्र सोनू) और प्रदीप के साथ पानी में उतरे थे।
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एक को बचाने के चक्कर में काल के गाल में समाए चार
\r\n\r\nचश्मदीदों के रोंगटे खड़े कर देने वाले बयानों के मुताबिक, शुरुआत में सभी युवक घाट के किनारे ही नहा रहे थे जहां पानी बेहद कम था। लेकिन नहाते-नहाते वे अनजाने में गहरे पानी की ओर खिसकते चले गए। गंगा का जलस्तर और अंदरूनी बहाव (Undercurrent) काफी तेज था। अचानक एक युवक का पैर फिसला और वह संतुलन खोकर डूबने लगा।
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अपने भाई को डूबता देख बाकी युवक भी उसे बचाने के लिए गहरे पानी में कूद पड़े, लेकिन पानी का बहाव इतना क्रूर था कि वह एक-एक करके सबको अपने साथ खींच ले गया। वहां मौजूद रिश्तेदार राहुल ने अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय दिया। राहुल ने छलांग लगाई और किसी तरह डूब रहे प्रदीप के बाल उसके हाथ में आ गए। राहुल ने पूरी ताकत लगाकर प्रदीप को तो सुरक्षित बाहर खींच लिया, लेकिन अभिषेक, हिमांशु, दीपांशु और प्रियांशु गंगा की खौफनाक लहरों के बीच आंखों के सामने ही बह गए।
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चीख-पुकार और घाट पर मची अफरा-तफरी
\r\n\r\nजैसे ही घाट पर मौजूद अन्य परिजनों और ग्रामीणों को इस बात का अहसास हुआ कि चार किशोर पानी में डूब गए हैं, वहां कोहराम मच गया। जो लोग कुछ मिनट पहले शांति से बैठे थे, वे बदहवास होकर गंगा की ओर दौड़ पड़े। दोस्तों और रिश्तेदारों के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण और अन्य श्रद्धालु भी वहां जुट गए, लेकिन पानी की गहराई और तेज धार को देखकर किसी की भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं हुई।
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लापता युवकों में से अभिषेक की उम्र 22 वर्ष थी और वह एलएलबी (LLB) की पढ़ाई कर रहा था। परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं। एक साथ चार होनहार बच्चों के इस तरह लापता होने से जलालपुर गांव में चूल्हा तक नहीं जला है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई चमत्कार की आस लगाए बैठा है।
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प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी और महा-रेस्क्यू ऑपरेशन
\r\n\r\nचार युवकों के डूबने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सीओ मवाना पंकज लवानिया तुरंत पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके कुछ ही देर बाद एसपी देहात (SP Rural) अभिजीत कुमार, एसडीएम संतोष सिंह, तहसीलदार निरंकार सिंह और नायब तहसीलदार नितेश सैनी ने भी घाट पर डेरा डाल दिया।
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दमकल विभाग की टीम को तुरंत मौके पर बुलाकर शुरुआती सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और 44वीं वाहिनी पीएसी (PAC) के विशेषज्ञ गोताखोरों की टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मोर्चे पर लगा दिया गया। सर्च ऑपरेशन को और तेज करने के लिए वाइल्ड लाइफ विभाग (वन्यजीव विभाग) की विशेष मोटर बोट्स को भी नदी में उतारा गया है।
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खराब मौसम बना विलेन, शनिवार सुबह फिर शुरू हुई तलाश
\r\n\r\nशुक्रवार की शाम ढलने के साथ ही सर्च ऑपरेशन में दिक्कतें आने लगीं। रात के समय गंगा के तेज बहाव और खराब मौसम के चलते विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य हो गई थी, जिसके कारण गोताखोरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात 11 बजे सर्च ऑपरेशन को रोकना पड़ा।
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शनिवार की सुबह पौ फटने के साथ ही यानी सुबह 6 बजे से रेस्क्यू टीमों ने अपना काम दोबारा शुरू कर दिया है। टीमों ने अब तक घटनास्थल से लेकर आगे करीब डेढ़ किलोमीटर तक गंगा के हर हिस्से को बारीकी से खंगाल लिया है। जाल फेंके जा रहे हैं और आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन अभी तक चारों युवकों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। गोताखोर लगातार नदी की गहराई नाप रहे हैं।
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एसडीएम संतोष सिंह का कहना है कि हमारी टीमें हर संभव प्रयास कर रही हैं। बहाव तेज होने के कारण सर्च एरिया को बढ़ाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिजनों के संपर्क में हैं और उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।
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सुरक्षा पर उठते सवाल
\r\n\r\nइस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि घाटों पर गहराई का सटीक अंदाजा लगाने के लिए कोई मजबूत बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं होते हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को नदी के अंदरूनी बहाव का अंदाजा नहीं होता, जो ऐसे जानलेवा हादसों का कारण बनता है। प्रशासन को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए घाटों पर गोताखोरों की स्थायी तैनाती और मजबूत बैरिकेडिंग सुनिश्चित करनी होगी।
\r\n\r\nफिलहाल, सभी की निगाहें मखदुमपुर घाट पर टिकी हैं और हर कोई प्रार्थना कर रहा है कि रेस्क्यू टीम को जल्द से जल्द कामयाबी मिले।
Sabse pehle comment karne wale banein.