पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और क्रांतिधरा नगरी मेरठ के पर्यटन मानचित्र पर जल्द ही एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। शहर के प्रसिद्ध 'ऑक्सीजन बैंक' यानी गांधीबाग (कम्पनी बाग) में मेरठ विकास प्राधिकरण (MEDA) एक भव्य और अत्याधुनिक प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है। इस खास परियोजना के तहत मेरठ में लाइट एंड साउंड शो (Light and Sound Show) की शुरुआत की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की वीरगाथा और उसमें मेरठ के अतुलनीय योगदान को आधुनिक तकनीक के साथ प्रदर्शित करना है। यह प्रोजेक्ट न केवल शहर की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित होगा।READ ALSO:-UP में HSRP का 'महा-अलर्ट': 6 लाख से ज्यादा वाहनों पर लटकी ₹15,000 के चालान की तलवार; बिना हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नहीं बनेगा प्रदूषण सर्टिफिकेट!
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कैंट बोर्ड और मेडा (MEDA) के बीच ऐतिहासिक सहमति
\r\n\r\nइस महत्वकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) और मेरठ छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) के बीच एक अहम समझौता हुआ है।
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- \r\n बैठक और जमीन का आवंटन: मेडा के उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना और कैंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जाकिर हुसैन के बीच हुई विशेष बैठक में इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई।\r\n \r\n
- \r\n स्थान का चयन: शो के लिए कैंट बोर्ड ने गांधीबाग में मुख्य गेट से प्रवेश करते ही बाईं ओर कैफेटेरिया के पास की जमीन मेडा को उपलब्ध कराई है। यह स्थान लोगों की आवाजाही के लिहाज से बेहद सुलभ है।\r\n \r\n
- \r\n लीज और राजस्व का बंटवारा: समझौते के तहत यह जमीन अगले पांच वर्षों के लिए मेडा को सौंप दी गई है। शो के संचालन से जो भी आय (टिकट शुल्क आदि) होगी, उसका 50 प्रतिशत हिस्सा मेडा द्वारा कैंट बोर्ड को राजस्व के रूप में दिया जाएगा।\r\n \r\n
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5 करोड़ का भारी-भरकम बजट और अत्याधुनिक सेटअप
\r\n\r\nमेरठ में लाइट एंड साउंड शो का बुनियादी ढांचा किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के शो से कम नहीं होगा। इस पूरे सेटअप को तैयार करने के लिए मेडा लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। इस भारी भरकम बजट से शो को तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और आकर्षक बनाया जाएगा।
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- \r\n बड़ी एलईडी स्क्रीन और विजुअल्स: शो के लिए एक विशाल दीवार का निर्माण किया जाएगा जिस पर उच्च गुणवत्ता (High Definition) वाली एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n लेजर और साउंड इफेक्ट्स: लेजर लाइट्स, 3D मैपिंग और शानदार सराउंड साउंड इफेक्ट्स के माध्यम से 1857 की क्रांति के दृश्यों को इस तरह पेश किया जाएगा कि दर्शक खुद को उस ऐतिहासिक दौर में महसूस करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n बैठने की व्यवस्था: प्रारंभिक योजना के अनुसार, इस ओपन-एयर थियेटर में एक बार में 100 लोगों के बैठने की सुविधाजनक व्यवस्था की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n संचालन की जिम्मेदारी: मेडा खुद इसका संचालन नहीं करेगा, बल्कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए एक पेशेवर निजी एजेंसी का चयन किया जाएगा जो इस शो के नियमित संचालन और रखरखाव (Maintenance) की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी।\r\n \r\n
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1857 की क्रांति का इतिहास: जब मेरठ से उठी थी आजादी की चिंगारी
\r\n\r\nमेरठ का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 10 मई 1857 को इसी शहर से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह की पहली संगठित चिंगारी उठी थी। भारतीय सैनिकों (सिपाहियों) ने चर्बी वाले कारतूसों के इस्तेमाल से इनकार करते हुए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था।
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इस 'लाइट एंड साउंड शो' की स्क्रिप्ट में इन्हीं ऐतिहासिक घटनाओं को पिरोया जाएगा:
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- \r\n क्रांतिकारियों का दिल्ली कूच करना।\r\n \r\n
- \r\n धन सिंह गुर्जर जैसे स्थानीय नायकों की भूमिका।\r\n \r\n
- \r\n काली पलटन मंदिर और औघड़नाथ मंदिर के ऐतिहासिक किस्से।\r\n \r\n
- \r\n अंग्रेजी सेना के खिलाफ आम जनता का आक्रोश और बलिदान।\r\n \r\n
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यह शो युवा पीढ़ी को किताबों से बाहर निकालकर दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम से अपने शहर के असली नायकों और आजादी की कीमत से रूबरू कराएगा।
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मेरठ में लाइट एंड साउंड शो: पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
\r\n\r\nमेरठ का गांधीबाग शहर के बीचों-बीच स्थित है और यह अपनी हरियाली के कारण 'ऑक्सीजन बैंक' के नाम से भी जाना जाता है। रोजाना सुबह और शाम यहां हजारों की संख्या में स्थानीय लोग, बच्चे और बुजुर्ग सैर करने आते हैं।
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- \r\n पर्यटकों का आकर्षण: शाम के समय जब प्राकृतिक छटा के बीच यह लेजर और साउंड शो शुरू होगा, तो यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बन जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n स्थानीय रोजगार: कैंटीन, टिकट काउंटर, पार्किंग और आसपास के बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों को फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।\r\n \r\n
- \r\n नाइट टूरिज्म को बढ़ावा: दिल्ली के लाल किले और अंडमान की सेलुलर जेल की तर्ज पर यह शो मेरठ में भी 'नाइट टूरिज्म' (Night Tourism) के कल्चर को विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।\r\n \r\n
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10 मई (क्रांति दिवस) से कार्य शुरू करने का लक्ष्य
\r\n\r\nइस परियोजना की समय सीमा को लेकर कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन ने जानकारी दी है कि 10 मई, जिसे मेरठ में 'क्रांति दिवस' के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, उसी दिन के आसपास इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अपने आप में उन अमर शहीदों के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
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कुल मिलाकर, मेडा और कैंट बोर्ड की यह संयुक्त पहल मेरठ के इतिहास को सहेजने और उसे आधुनिक स्वरूप में दुनिया के सामने पेश करने का एक बेहतरीन प्रयास है। 5 करोड़ रुपये की लागत से गांधीबाग में बनने जा रहा यह मेरठ में लाइट एंड साउंड शो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'ओपन-एयर म्यूजियम' की तरह काम करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि 1857 की क्रांति में मेरठ के योगदान की गूंज सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सीमित न रहे, बल्कि हर शाम लाइट और साउंड की बेहतरीन जुगलबंदी के जरिए लोगों के दिलों में देशप्रेम की भावना को जगाती रहे। शहरवासियों को अब बस उस दिन का बेसब्री से इंतजार है, जब वे इस शानदार ऐतिहासिक शो का पहली बार लुत्फ उठा सकेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.