मेरठ/मुजफ्फरनगर (UP Crime News): जब आप या आपका कोई परिजन बीमार होता है, तो आप उन्हें इस भरोसे के साथ अस्पताल में भर्ती कराते हैं कि वहाँ मौजूद प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्से (Nurses) उनका सही इलाज करेंगे। लेकिन क्या हो, अगर आपको पता चले कि आईसीयू (ICU) में आपके मरीज को ड्रिप लगाने वाला या इंजेक्शन देने वाला स्टाफ पूरी तरह से अनपढ़ या अनट्रेंड है? उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।READ ALSO:-सूर्या हत्याकांड और गोहत्या पर CM योगी का रौद्र रूप: "नालायक औलादों को समझा लो, वरना पीढ़ियां याद रखेंगी अंजाम!"
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पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर की पुलिस ने एक बेहद सटीक और गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए मेरठ में चल रही एक 'फर्जी डिग्री फैक्ट्री' का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह पैसों की एवज में ANM (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफरी) और GNM (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) की फर्जी मार्कशीट और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर रहा था।
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आइए, इस पूरे खौफनाक सिंडिकेट की कार्यप्रणाली, पुलिस की छापेमारी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले इसके असर को विस्तार से समझते हैं।
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'विधु कंप्यूटर सेंटर' : शिक्षा और स्वास्थ्य का कसाईखाना

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यह पूरा गोरखधंधा मेरठ के एक भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित 'विधु कंप्यूटर सेंटर' की आड़ में चल रहा था। बाहर से यह एक आम साइबर कैफे या फोटोस्टेट की दुकान जैसा दिखता था, लेकिन इसके भीतर हाई-टेक मशीनों के जरिए देश के भविष्य और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।
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मुजफ्फरनगर पुलिस को अपने मुखबिरों से इस बात की भनक लगी थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ दलाल सक्रिय हैं जो बिना किसी परीक्षा या ट्रेनिंग के नर्सिंग की डिग्रियां बेच रहे हैं। पुलिस की एक विशेष टीम ने जब इस कंप्यूटर सेंटर पर अचानक छापा मारा, तो वहाँ मौजूद लोग फर्जी मार्कशीट डिजाइन करने और प्रिंट करने में व्यस्त थे।
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मौके से 10 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

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पुलिस ने इस सेंटर को सील करते हुए मौके से इस पूरे नेटवर्क को चलाने वाले 10 शातिर आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
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    शिवानंद (Shivanand)
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  3. \r\n
    मनीष (Manish)
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  4. \r\n
  5. \r\n
    कुलदीप (Kuldeep)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    इस्माईल (Ismail)
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  8. \r\n
  9. \r\n
    आदिल (Aadil)
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  10. \r\n
  11. \r\n
    रितेश (Ritesh)
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  12. \r\n
  13. \r\n
    जयंत भारती (Jayant Bharti)
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  14. \r\n
  15. \r\n
    सचिन पाल (Sachin Pal)
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  16. \r\n
  17. \r\n
    संदीप कुमार (Sandeep Kumar)
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  18. \r\n
  19. \r\n
    नितेश (Nitesh)
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  20. \r\n
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पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया? (Seized Items)
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छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में ऐसे दस्तावेज और उपकरण मिले हैं, जो इस गिरोह के विशाल नेटवर्क की गवाही देते हैं।
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बरामद सामग्री का विवरण
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इस्तेमाल का तरीका
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फर्जी सर्टिफिकेट और मार्कशीट
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भारी मात्रा में तैयार और कुछ अधबने ANM/GNM सर्टिफिकेट बरामद।
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10 मोबाइल फोन
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ग्राहकों से संपर्क, व्हाट्सएप पर डील और पैसों के लेन-देन के लिए।
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प्रिंटर और लेमिनेशन मशीन
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असली जैसी दिखने वाली मार्कशीट को हूबहू प्रिंट करने के लिए।
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हार्ड डिस्क और CPU
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ग्राहकों का डेटाबेस और विभिन्न संस्थानों के फर्जी लोगो (Logos) व डिजाइन।
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एक बाइक
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फर्जी दस्तावेजों की ग्राहकों तक होम डिलीवरी करने के लिए।
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अस्पतालों में मौत के सौदागर: ICU तक पहुंची फर्जी डिग्रियां
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इस रैकेट का सबसे डरावना और खौफनाक पहलू यह है कि यह सिर्फ एक 'कागजी धोखाधड़ी' नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर 'हत्या का प्रयास' है।
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    नामचीन अस्पतालों में घुसपैठ: पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि इस गिरोह से फर्जी ANM और GNM डिग्रियां खरीदने वाले सैकड़ों युवक-युवतियां आज देश के विभिन्न राज्यों के नामचीन प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम्स में बाकायदा 'नर्स' के पद पर नौकरी कर रहे हैं।
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    मरीजों की जान से सीधा खिलवाड़: जिन लोगों ने कभी किसी मेडिकल कॉलेज की सीढ़ियां नहीं चढ़ीं, उन्हें मरीजों के शरीर की एनाटॉमी, दवाओं के साइड इफेक्ट्स या इमरजेंसी मेडिकल प्रोटोकॉल का कोई ज्ञान नहीं होता। पुलिस के मुताबिक, ये 'मुन्नाभाई' अस्पतालों के आईसीयू (ICU) जैसी अति-संवेदनशील जगहों पर तैनात हैं, जहां वे मरीजों को इंजेक्शन लगा रहे हैं और उनकी देखभाल कर रहे हैं। एक गलत इंजेक्शन किसी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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कोरोना काल (2020) से चल रहा था धंधा

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पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे यह धंधा साल 2020 से चला रहे हैं।
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    आपदा में तलाशा अवसर: कोरोना महामारी (COVID-19) के दौरान अचानक अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की भारी कमी हो गई थी। हर जगह नर्सों और कंपाउंडरों की डिमांड बढ़ गई थी।
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    मांग और आपूर्ति का खेल: इसी का फायदा उठाकर इस गिरोह ने अपना नेटवर्क फैलाया। जो लोग जल्दी पैसा कमाना चाहते थे, उन्हें इस गिरोह ने मुंह मांगे दामों (लाखों रुपयों) में रातों-रात ANM और GNM की डिग्रियां थमा दीं।
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अब क्या होगा? 'SIT' करेगी पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश

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चूंकि मामला सीधे तौर पर जन-स्वास्थ्य (Public Health) से जुड़ा है, इसलिए पुलिस महकमे ने इस केस की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT - Special Investigation Team) का गठन कर दिया है।
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SIT के मुख्य टास्क:

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    डेटा खंगालना: सबसे पहले जब्त किए गए कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और मोबाइलों से उन सभी 'फर्जी ग्राहकों' की लिस्ट निकाली जाएगी, जिन्होंने यहाँ से डिग्रियां खरीदी हैं।
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  3. \r\n
    अस्पतालों पर एक्शन: जिन-जिन अस्पतालों में ये फर्जी नर्सें काम कर रही हैं, वहां पुलिस की टीमें पहुंचेंगी। यह भी जांच की जाएगी कि क्या अस्पतालों का प्रबंधन भी इस मिलीभगत में शामिल था, या उन्होंने बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन किए ही भर्तियां कर ली थीं।
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    गिरफ्तारी का दौर: पुलिस का साफ कहना है कि फर्जी मार्कशीट बनाने वालों के साथ-साथ, जिन्होंने ये डिग्रियां खरीदी हैं और अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उन सभी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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यह घटना उन सभी संस्थानों के लिए एक बड़ा सबक है जो मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति से पहले उनके दस्तावेजों की संबंधित काउंसिल से उचित जांच (Verification) नहीं कराते हैं। पुलिस की यह सर्जिकल स्ट्राइक निश्चित रूप से कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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