मेरठ (Meerut) निवासियों और इस शहर से होकर गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। नमो भारत (Namo Bharat) और मेरठ मेट्रो (Meerut Metro) कॉरिडोर के निर्माण के कारण दिल्ली रोड (Delhi Road) पर जो भीषण जाम लगता था, अब उसका स्थायी समाधान होने जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ छावनी में बजी 'जनगणना 2027' की रणभेरी: दर्शन एकेडमी में शुरू हुआ मास्टर प्रशिक्षण, इस बार डिजिटल और जातिगत गणना पर होगा फोकस
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लंबे समय से अधर में लटके सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) के प्रोजेक्ट ने आखिरकार रफ्तार पकड़ ली है। जगदीश मंडप से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर (टीपी नगर) तक सड़क को दोनों ओर से चौड़ा किया जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी कर ली है और भवन स्वामियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा भी वितरित कर दिया गया है।
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जगदीश मंडप के पास क्यों बना है बॉटलनेक (Bottleneck)?

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दरअसल, दिल्ली रोड पर जगदीश मंडप के पास आकर नमो भारत और मेरठ मेट्रो का कॉरिडोर 'भूमिगत' (Underground) हो रहा है। सड़क के बीचोबीच रैंप (Ramp) और टनल (Tunnel) निर्माण के कारण यहां सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। दिल्ली रोड मेरठ शहर की मुख्य 'लाइफलाइन' है, जहां भारी और हल्के वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। सड़क संकरी होने के कारण इस 'बॉटलनेक' पर रोजाना लंबा जाम (Traffic Jam) लग जाता है, जिससे एम्बुलेंस से लेकर ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करने के लिए एनसीआरटीसी (NCRTC) और जिला प्रशासन ने मिलकर सड़क के दोनों ओर चौड़ीकरण का बीड़ा उठाया है।
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70 भवनों का अधिग्रहण, बंटा 55 करोड़ का मुआवजा

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सड़क को दोनों ओर से चौड़ा करने के लिए जिला प्रशासन को सड़क किनारे बनी दुकानों और भवनों की जमीन की आवश्यकता थी। इसके लिए कुल 70 दुकानों और अन्य भवनों के आगे के हिस्से को अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए चिन्हित किया गया था।
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    मुआवजे का वितरण: प्रशासन ने अब तक 70 में से 65 भवन और जमीन मालिकों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले 55 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम मुआवजा राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर (Transfer) कर दी है।
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    विवादित मामले: केवल 5 भवन या भूखंड ऐसे बचे हैं जिनका भुगतान अभी नहीं हो पाया है। इनके मालिकों के बीच आपसी विवाद चल रहा है या फिर मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इनकी मुआवजा राशि को कोर्ट में जमा कराकर जमीन पर कब्जा ले लिया जाएगा, ताकि विकास कार्य में कोई बाधा न आए।
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एक नजर में: दिल्ली रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट

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    सड़क की कुल लंबाई: 800 मीटर के हिस्से में दोनों ओर सड़क चौड़ी होगी (जगदीश मंडप से टीपी नगर तक)।
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    कितनी बढ़ेगी चौड़ाई: सड़क के दोनों ओर 3-3 मीटर अतिरिक्त चौड़ाई बढ़ाई जाएगी।
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    अधिग्रहित भवन: कुल 70 दुकानें और मकान अधिग्रहण की जद में आए हैं।
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    मुआवजा राशि: 55 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।
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    निर्माण एजेंसी: सड़क चौड़ीकरण का पूरा कार्य कॉरिडोर का निर्माण कर रही एजेंसी एनसीआरटीसी (NCRTC) द्वारा ही कराया जाएगा।
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मालिकों ने खुद शुरू की अपने भवनों की तोड़फोड़

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इस प्रोजेक्ट की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि इसमें प्रशासन और जनता के बीच टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई। जिन भवनों का अधिग्रहण किया गया है, वह मुख्य रूप से दुकानों या मकानों का आगे का हिस्सा (Front portion) है।
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जैसे ही भवन स्वामियों के बैंक खातों में मुआवजे की मोटी रकम पहुंची, उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक दबाव के दिल्ली रोड पर खुद ही अपने भवनों के उस अधिग्रहित हिस्से को तोड़ना (Demolition) शुरू कर दिया है। जेसीबी और मजदूरों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि जैसे ही जमीन पूरी तरह खाली हो जाएगी, तुरंत उस पर कब्जा लेकर उसे सड़क निर्माण के लिए एनसीआरटीसी (NCRTC) को सौंप दिया जाएगा।
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एनसीआरटीसी की चूक: चार खसरों की जमीन अब 'सीधे' खरीदी जाएगी

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इस पूरी प्रक्रिया में निर्माण एजेंसी एनसीआरटीसी (NCRTC) की ओर से एक तकनीकी चूक भी सामने आई है। शुरुआत में एनसीआरटीसी ने सर्वे करके प्रशासन को जो भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया था, उसमें बैरीपुरा (Bairipura) को जाने वाले मार्ग के मोड़ (जगदीश मंडप के ठीक सामने) के कुछ खसरों को छोड़ दिया गया था।
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अब जब काम शुरू हुआ, तो पता चला कि इस मोड़ पर बनी 6 दुकानों और कुल 4 खसरों की भूमि को हटाए बिना सड़क का चौड़ीकरण तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। क्योंकि ये खसरे मूल अधिग्रहण प्रक्रिया में छूट गए थे, इसलिए अब प्रशासन इन बचे हुए भवनों के मालिकों से 'सीधी खरीद' (Direct Purchase) करने की बातचीत कर रहा है। हालांकि, भवन स्वामी अब नए और बढ़े हुए सर्किल रेट (Circle Rate) के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिसे जल्द ही सुलझा लिए जाने की उम्मीद है।
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क्या कहते हैं जिलाधिकारी (DM)?
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मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी. के. सिंह ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर सकारात्मक रुख जाहिर करते हुए कहा, "दिल्ली रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। अधिकांश भवन और भूमि मालिकों को उनकी देय मुआवजा राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। लोगों ने सहयोग करते हुए अपने भवनों को हटाना भी शुरू कर दिया है। जो कुछ विवादित मामले बचे हैं और जो खसरे छूट गए थे, उन्हें भी सीधे खरीदने का प्रयास तेजी से चल रहा है। जल्द ही इस पूरे हिस्से में सड़क चौड़ीकरण का कार्य विधिवत शुरू हो जाएगा, जिससे शहरवासियों को जाम से स्थायी निजात मिलेगी।"
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