मेरठ। उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला इन दिनों अपराध की नई और खौफनाक कहानियों का गवाह बन रहा है। हाल ही में एक पत्नी द्वारा अपने पति को सांप से डसवाकर मारने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब शहर से एक और रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। हापुड़ रोड स्थित एमसीसी (MCC) अस्पताल में एक स्टाफ नर्स की उसी के प्रेमी (वार्डबॉय) द्वारा हत्या कर दी गई। हत्या का तरीका इतना खौफनाक था कि सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। जिस अस्पताल में मरीजों को जीवनदान दिया जाता है, उसी अस्पताल के एक कमरे में प्रेमिका को 'जहरीली ड्रिप' (Poisonous IV Drip) लगाकर मौत के घाट उतार दिया गया।Read also:-महा-अलर्ट: यूपी में फटा आसमान! 50 से ज्यादा जिलों में मूसलाधार बारिश और भयंकर बिजली गिरने का 'ऑरेंज अलर्ट', घरों में रहें सुरक्षित
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए आरोपी ने एक ऐसी स्क्रिप्ट लिखी, जो किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं थी। लेकिन, कहते हैं ना कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ देता है। मेरठ पुलिस की पैनी नजर और साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन ने महज कुछ ही घंटों में इस 'परफेक्ट मर्डर' की गुत्थी को सुलझा लिया। आइए विस्तार से जानते हैं इस खौफनाक हत्याकांड की पूरी कहानी, साजिश और पुलिस के खुलासे का सच।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

जिंदगी के संघर्षों से जूझ रही थी नेहा

\r\n\r\n
ब्रह्मपुरी क्षेत्र की रहने वाली 26 वर्षीय नेहा एक बेहद संघर्षशील महिला थीं। करीब ढाई साल पहले नेहा की शादी रवि नाम के युवक से हुई थी। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज एक साल पहले नेहा के पति रवि का देहांत हो गया। पति की मौत के बाद नेहा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पास एक साल का छोटा सा बेटा भी है। अपने और अपने मासूम बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नेहा ने हापुड़ रोड स्थित एमसीसी (MCC) अस्पताल में बतौर स्टाफ नर्स नौकरी शुरू की थी। वह पिछले करीब नौ महीने से इस अस्पताल में काम कर रही थीं। अस्पताल की शिफ्ट, मरीजों की देखभाल और घर पर एक साल के बच्चे की जिम्मेदारी—नेहा की जिंदगी इन्हीं के बीच घूम रही थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्यार का जाल और खूनी साजिश की शुरुआत

\r\n\r\n
एमसीसी अस्पताल में ही सुरेश नाम का एक युवक वार्डबॉय के पद पर तैनात था। साथ काम करने के दौरान नेहा और सुरेश के बीच बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे यह बातचीत नजदीकियों में बदल गई और पिछले करीब आठ महीने से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन इस प्रेम कहानी में एक बड़ा पेंच था। सुरेश पहले से ही शादीशुदा था और उसका एक पांच साल का बेटा भी था। नेहा, जो अपने पति को खो चुकी थी, वह अपनी जिंदगी में एक ठहराव और सुरक्षा चाहती थी। इसलिए उसने सुरेश पर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। नेहा बार-बार सुरेश से कहती थी कि वह उसे अपना ले, लेकिन सुरेश किसी भी कीमत पर अपनी पहली पत्नी और परिवार को छोड़ना नहीं चाहता था। वह नेहा के साथ सिर्फ समय बिता रहा था। जब नेहा का दबाव बर्दाश्त से बाहर होने लगा, तो सुरेश ने उससे छुटकारा पाने के लिए एक ऐसी खौफनाक साजिश रची, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

शनिवार का वह मनहूस दिन: ड्रिप में मिलाया मौत का केमिकल

\r\n\r\n
शनिवार की सुबह थी। नेहा रोज की तरह सुबह करीब 10 बजे अपने एक साल के मासूम बेटे को घर पर छोड़कर अस्पताल की ड्यूटी पर पहुंची थी। उसे क्या पता था कि आज वह अपने बच्चे से आखिरी बार मिलकर आई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अस्पताल पहुंचने के कुछ घंटे बाद नेहा ने चक्कर आने और घबराहट होने की शिकायत की। इसी बात का फायदा सुरेश ने उठाया। उसने तुरंत नेहा को हमदर्दी दिखाते हुए अस्पताल के ही एक वार्ड में बेड पर लेटा दिया। इसके बाद सुरेश ने अपनी खौफनाक योजना को अंजाम देने के लिए अपने एक दोस्त फरहान को भी अस्पताल बुला लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दोपहर करीब 2 बजे का वक्त था। सुरेश ने नेहा को ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाने का बहाना किया। उसने और उसके दोस्त फरहान ने मिलकर उस ड्रिप के अंदर एक बेहद खतरनाक और जहरीला केमिकल मिला दिया। जैसे-जैसे वह केमिकल ड्रिप के जरिए नेहा की नसों में दौड़ने लगा, उसकी हालत बिगड़ने लगी और चंद ही मिनटों में तड़प-तड़प कर नेहा की मौत हो गई। दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल के उस कमरे में नेहा का शव मृत अवस्था में पड़ा मिला।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सुसाइड नोट और सल्फास का ड्रामा: पुलिस को गुमराह करने की चाल

\r\n\r\n
सुरेश जानता था कि अगर नेहा की मौत अस्पताल में संदिग्ध हालत में हुई, तो पुलिस सबसे पहले अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ करेगी। इसलिए उसने हत्या को आत्महत्या (Suicide) दिखाने के लिए एक 'मास्टरमाइंड' प्लान तैयार किया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उसने पहले से ही एक फर्जी सुसाइड नोट लिख कर रखा था। नेहा की मौत की पुष्टि होने के बाद, सुरेश और फरहान ने चुपके से वह सुसाइड नोट नेहा की जेब में डाल दिया। कहानी को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए उन्होंने नेहा की जेब में सल्फास (कीटनाशक) की कुछ गोलियां भी रख दीं। ताकि जब पुलिस आए, तो उन्हें लगे कि नेहा ने खुद सल्फास खाकर और अपनी मर्जी से जान दी है। यह सब करने के बाद दोनों वहां से चुपचाप खिसक गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

परिजनों का हंगामा और पुलिस की तेज-तर्रार एंट्री

\r\n\r\n
अस्पताल प्रबंधन ने जब नेहा का शव देखा तो उन्होंने तुरंत उसके परिवार वालों को सूचना दी। परिजनों को बताया गया कि नेहा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है। लेकिन नेहा की ननद, देवर और परिवार के अन्य लोग इस बात को मानने को तैयार नहीं थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
नेहा के देवर ने सीधा आरोप लगाया कि नेहा कभी आत्महत्या नहीं कर सकती, उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत जहरीला पदार्थ देकर मारा गया है। परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया। मामला बिगड़ता देख अस्पताल में पुलिस को बुलाया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

CCTV, कॉल रिकॉर्ड्स और वो एक सुराग जिसने खोला राज

\r\n\r\n
सूचना मिलते ही सीओ कोतवाली संग्राम सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने सबसे पहले अस्पताल को सील कर क्राइम सीन को सुरक्षित किया। सीओ संग्राम सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए दो विशेष टीमें गठित कीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस ने सबसे पहले उस वार्ड के आस-पास लगे CCTV कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में लिया। फुटेज खंगालने पर पुलिस ने देखा कि सुरेश और उसका दोस्त फरहान संदिग्ध परिस्थितियों में उस वार्ड के अंदर और बाहर आ-जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने नेहा का मोबाइल फोन जब्त किया। कॉल डिटेल्स (CDR) चेक करने पर पता चला कि नेहा और सुरेश के बीच लगातार लंबी बातचीत होती थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस का शक यकीन में तब बदल गया जब उन्होंने नेहा की जेब से मिले सुसाइड नोट की लिखावट (Handwriting) की जांच की। वह लिखावट नेहा की हैंडराइटिंग से बिल्कुल मेल नहीं खा रही थी। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए सुरेश को हिरासत में ले लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पूछताछ में टूट गया आरोपी, कबूला अपना जुर्म

\r\n\r\n
हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस ने जब सुरेश से सख्ती से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ के पुलिंदे नहीं बांध सका और टूट गया। उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "सुरेश ने अपने दोस्त फरहान की मदद से नेहा की ड्रिप में जहरीला पदार्थ मिलाकर उसे चढ़ा दिया था। हत्या को सुसाइड दिखाने के लिए उसने खुद एक फर्जी सुसाइड नोट लिखा और मौके पर छोड़ दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी सुरेश और उसके मददगार दोस्त फरहान, दोनों को देर रात गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए अहम सुबूत

\r\n\r\n
पुलिस ने इस मामले में कोई भी तकनीकी ढील नहीं छोड़ी है। घटनास्थल से मिले कैनुला (जिसके जरिए ड्रिप लगाई गई), सिरिंज, दोनों के मोबाइल फोन, फर्जी सुसाइड नोट, जिस नोटपैड से सुसाइड नोट का पन्ना फाड़ा गया था, और वह जहरीला केमिकल—इन सभी अहम सबूतों को सील करके फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेज दिया गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट इस केस में आरोपियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में सबसे बड़ी गवाही साबित होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एक मासूम छिन गया, समाज के लिए कई सवाल छोड़ गई घटना

\r\n\r\n
यह घटना सिर्फ एक क्राइम न्यूज नहीं है, बल्कि समाज की उस डार्क रियलिटी को दिखाती है जहां रिश्तों के अंधेपन में इंसान हैवान बन जाता है। एक तरफ सुरेश ने अपने 5 साल के बच्चे और पत्नी को धोखा दिया, तो दूसरी तरफ नेहा के एक साल के मासूम बेटे के सिर से अब मां का साया भी हमेशा के लिए उठ गया है। पति के बाद अब मां को खो देने वाले उस एक साल के बच्चे का भविष्य क्या होगा, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों के इस तरह के खौफनाक रवैये ने कार्यस्थलों (Workplaces) की सुरक्षा और लोगों की मानसिकता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल, दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की तैयारी कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन