मेरठ, 22 जून 2026:
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उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और घनी आबादी वाले जिलों में शुमार मेरठ में विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले संविदा (आउटसोर्स) कर्मचारियों के शोषण का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। मेरठ विद्युत विभाग में एल.टी. (Low Tension) और एच.टी. (High Tension) लाइनों के रखरखाव और अनुरक्षण (Maintenance) का कार्य करने वाले सैकड़ों संविदा कर्मी इस भीषण गर्मी और प्रतिकूल मौसम में भी आर्थिक, मानसिक और श्रम शोषण का शिकार हो रहे हैं।READ ALSO:-IRCTC Tatkal Booking: दलालों का खेल खत्म! तत्काल टिकट के लिए रेलवे ने लागू किया नया नियम, अब सेकंडों में बुक होगी कन्फर्म सीट
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इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नीति आयोग द्वारा प्रमाणित संस्था 'निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति (पंजी.)' ने सीधे प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है। समिति के पदाधिकारियों ने मेरठ के मंडल आयुक्त (Divisional Commissioner) महोदय को एक विस्तृत तीन पन्नों का शिकायत पत्र सौंपकर सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक और विधिक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
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क्या है पूरा मामला? रडार पर आई 'ग्लोब टेक' कंपनी

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विद्युत विभाग, मेरठ में निर्बाध बिजली आपूर्ति और जर्जर तारों की मरम्मत के लिए 01 अप्रैल 2024 से आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाता कंपनी "ग्लोब टेक क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड" के माध्यम से सैकड़ों कर्मचारियों को तैनात किया गया था। अनुबंध के समय यह तय हुआ था कि कंपनी सरकारी नियमों, श्रम कानूनों और कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का पूर्ण निष्ठा से पालन करेगी।
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परंतु, निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति के महामंत्री और अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस कंपनी ने पिछले कुछ समय से अनुबंध की शर्तों को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कंपनी पर आरोप है कि वह कर्मचारियों को मिलने वाले अल्प वेतन में से भी अवैध रूप से कटौती कर रही है और उनके जीवन की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है।
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आर्थिक शोषण का खेल: वेतन रोकना और मनमानी कटौती

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शिकायत पत्र में कंपनी के वित्तीय अनैतिक व्यवहार का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है। समिति ने आरोप लगाया है कि:
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    वेतन रोकना: वर्तमान समय में कंपनी द्वारा लगभग 25 से 30 कर्मचारियों का वेतन पूरी तरह से और अवैध रूप से रोक कर रखा गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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    मनमानी कटौती: मेरठ शहर में तैनात लगभग 435 कर्मचारियों के अप्रैल माह के वेतन में बिना किसी वैधानिक आदेश, नोटिस या उचित कारण के भारी कटौती कर दी गई है।
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जब कर्मचारियों ने इस असंगत कटौती का स्पष्ट विवरण (Salary Slip/Breakup) या संतोषजनक स्पष्टीकरण मांगना चाहा, तो कंपनी प्रबंधन ने उन्हें कोई भी ब्यौरा देने से साफ मना कर दिया। इस तानाशाही रवैये के कारण पूरे मेरठ मंडल के संविदा विद्युत कर्मियों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
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मौत के साए में 'नो सेफ्टी': सुरक्षा उपकरणों का घोर अभाव

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विद्युत विभाग में लाइनमैन और तकनीकी सहायकों का कार्य अत्यंत उच्च जोखिम (High Risk) वाला होता है। जरा सी चूक या तकनीकी खराबी सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकती है। जून महीने की इस भीषण तपिश और उमस के बीच, ये संविदा कर्मी दिन-रात 24×7 शहर की विद्युत व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए खंभों और ट्रांसफार्मरों पर चढ़ते हैं।
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समिति ने अपने पत्र में लिखा है:
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"यह स्थिति कर्मचारियों के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है। कंपनी द्वारा आज तक कर्मचारियों को आवश्यक बुनियादी सुरक्षा उपकरण जैसे— सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, इंसुलेटेड ग्लव्स (बिजली रोधी दस्ताने), सेफ्टी शूज और अन्य अनिवार्य सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। बिना इन उपकरणों के ऊंचे खंभों और एच.टी. लाइनों पर काम करना किसी भी समय किसी बड़ी दुर्घटना, अंग-भंग या जनहानि का कारण बन सकता है।"
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श्रम कानूनों की धज्जियां: साप्ताहिक अवकाश से भी रखा वंचित

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श्रम कानूनों (Labor Laws) और सरकारी अनुबंध की शर्तों के अनुसार, प्रत्येक आउटसोर्स कर्मचारी को मानसिक और शारीरिक थकान से उबरने के लिए प्रति सप्ताह एक साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) या पूरे महीने में न्यूनतम चार अवकाश मिलना अनिवार्य है।
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लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। ग्लोब टेक क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अधिकांश कर्मचारियों को इस अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश के लाभ से पूरी तरह वंचित रखा जा रहा है। उनसे बिना किसी विश्राम के लगातार कोल्हू के बैल की तरह काम लिया जा रहा है। लगातार काम के दबाव के कारण कर्मचारियों को अपने परिवार और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए समय नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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विभागीय चेतावनियों को ठेंगा दिखा रही कंपनी

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ऐसा नहीं है कि इस मामले से विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारी अनभिज्ञ थे। पत्र में यह भी खुलासा किया गया है कि विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा इस सेवा प्रदाता कंपनी को कई बार लिखित रूप से चेतावनी पत्र और निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन पत्रों में कंपनी को कर्मचारियों का रुका वेतन देने, सुरक्षा उपकरण बांटने और अनुबंधीय दायित्वों का पालन करने की हिदायत दी गई थी।
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परंतु, सरकारी अधिकारियों के इन आदेशों को कंपनी प्रबंधन लगातार हवा में उड़ाता आ रहा है। विभाग द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कंपनी के खिलाफ अब तक कोई भी बड़ी या प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई (जैसे ब्लैकलिस्ट करना या टेंडर निरस्त करना) नहीं की गई, जिससे कंपनी के हौसले बुलंद हैं।
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मंडल आयुक्त से समिति की प्रमुख मांगें
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समिति के जिला अध्यक्ष विक्रम कुमार और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार के नेतृत्व में सौंपे गए इस प्रार्थना-पत्र में मंडल आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निम्नलिखित 7 सूत्रीय मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है:
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क्र.सं.
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समिति की प्रमुख मांगें (Key Demands)
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रोके गए सभी 25-30 कर्मचारियों के वेतन का तत्काल और पूर्ण भुगतान कराया जाए।
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2.
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अप्रैल माह में 435 कर्मचारियों के वेतन से की गई अवैध कटौती की उच्च स्तरीय जांच हो।
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3.
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सभी ऑन-फील्ड संविदा कर्मियों को सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, ग्लव्स और शूज तुरंत दिए जाएं।
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4.
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श्रम कानूनों के उल्लंघन के लिए कंपनी के खिलाफ कठोर दंडात्मक और विधिक कार्रवाई की जाए।
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5.
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विभागीय निर्देशों की बार-बार अवहेलना करने के लिए कंपनी की जवाबदेही तय हो।
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6.
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अनुबंध के अनुसार सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को सप्ताह में 1 दिन का अनिवार्य अवकाश मिले।
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भविष्य में इस प्रकार के श्रम और आर्थिक शोषण को रोकने के लिए एक निगरानी तंत्र बने।
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समिति ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए विभाग द्वारा कंपनी को पूर्व में जारी किए गए विभिन्न चेतावनी पत्रों, वेतन कटौती के डिजिटल स्क्रीनशॉट्स और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतिलिपियां (Photocopies) भी साक्ष्य के रूप में संलग्न की हैं। इस पत्र की प्रतियां पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के प्रबंध निदेशक, श्रम आयुक्त मेरठ और जिलाधिकारी (DM) मेरठ को भी आवश्यक सूचना और कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
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आंदोलन की चेतावनी

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मेरठ के विद्युत संविदा कर्मियों का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और आउटसोर्सिंग प्रणाली की कमियों को उजागर करता है। यदि समय रहते मंडल आयुक्त द्वारा इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया गया, तो यह मामला एक बड़े श्रमिक आंदोलन का रूप ले सकता है। समिति के पदाधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी जायज मांगों को अनसुना किया गया, तो वे काम बंद करने और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे, जिससे पूरे मेरठ की विद्युत आपूर्ति ठप हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस शोषक कंपनी पर कब और कितनी सख्त लगाम कसता है।
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