उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में शुमार मेरठ (Meerut) में आगामी जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। किसी भी देश या राज्य के विकास, उसकी भविष्य की नीतियों और संसाधनों के सही बंटवारे के लिए सटीक जनसंख्या आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए मेरठ छावनी परिषद (Meerut Cantonment Board) ने अपने क्षेत्र में इस राष्ट्रीय कार्य का श्रीगणेश कर दिया है।READ ALSO:-यूपी रेरा का ऐतिहासिक फैसला: बिल्डरों की मनमानी और लूट पर लगी लगाम, फ्लैट ट्रांसफर की फीस हुई तय; अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के बायर्स को भी संजीवनी
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गुरुवार को मेरठ कैंट स्थित 'दर्शन एकेडमी' (Darshan Academy) में जनगणना कार्य में लगाए गए कर्मचारियों (प्रगणकों और पर्यवेक्षकों) के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मौके पर छावनी और जिला प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस बार की जनगणना की नई तकनीकों और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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CEO जाकिर हुसैन ने किया शुभारंभ, बताया दो चरणों का पूरा प्लान

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दर्शन एकेडमी में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत मेरठ छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी (CEO) जाकिर हुसैन ने फीता खोलकर की। उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्य की गंभीरता और संवेदनशीलता पर जोर दिया।
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CEO जाकिर हुसैन ने स्पष्ट किया कि मेरठ छावनी क्षेत्र में यह महा-सर्वेक्षण मुख्य रूप से दो प्रमुख चरणों (Two Phases) में संपन्न कराया जाएगा:
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    प्रथम चरण (मकानों का सूचीकरण और अनुमानित गणना): पहले चरण के तहत छावनी क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं के भीतर आने वाले सभी आवासीय और व्यावसायिक भवनों, घरों और परिसरों की पहचान की जाएगी। प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे और यह अनुमानित गणना करेंगे कि किस इलाके में कितने परिवार निवास कर रहे हैं। यह चरण पूरे अभियान की नींव (Base) तैयार करेगा।
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    द्वितीय चरण (व्यक्तियों और जातिगत विवरण की गणना): यह चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण और विस्तृत होगा। दूसरे चरण में प्रगणक परिवारों के बीच जाकर प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जानकारी (जैसे- उम्र, शिक्षा, पेशा, वैवाहिक स्थिति आदि) एकत्र करेंगे। सबसे खास बात यह है कि इस बार सामान्य जानकारी के साथ-साथ 'जातिगत गणना' (Caste-based Data) भी की जाएगी। इससे समाज के विभिन्न वर्गों की सटीक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का खाका तैयार करने में सरकार को मदद मिलेगी।
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पेपरलेस होगी गणना: एडीएम ने दी 'डिजिटल जनगणना' की ट्रेनिंग

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इस बार की जनगणना पिछले सभी दशकों की जनगणना से बिल्कुल अलग और हाई-टेक होने वाली है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित अपर जिलाधिकारी (ADM) वित्त एवं राजस्व तथा जिला जनगणना अधिकारी सूर्यकांत त्रिपाठी ने कर्मचारियों को 'डिजिटल जनगणना' (Digital Census) की बारीकियों से अवगत कराया।
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उन्होंने बताया कि अब भारी-भरकम रजिस्टरों और कागजों का इस्तेमाल कम से कम किया जाएगा। इसके बजाय प्रगणकों को विशेष मोबाइल एप्लिकेशन (Mobile App) और टैबलेट के माध्यम से डेटा फीड करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। डिजिटल डेटा फीडिंग से न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि त्रुटियों (Errors) की गुंजाइश भी न के बराबर रह जाएगी। इसके अलावा, रियल-टाइम डेटा (Real-time data) सीधे केंद्रीय सर्वर पर सुरक्षित रूप से अपलोड होता रहेगा, जिससे आंकड़ों के विश्लेषण में तेजी आएगी।
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225 प्रगणक और पर्यवेक्षक संभालेंगे छावनी का मोर्चा
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इतने बड़े और घनी आबादी वाले छावनी क्षेत्र में घर-घर जाकर सटीक आंकड़े जुटाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए एक मजबूत और प्रशिक्षित वर्कफोर्स की आवश्यकता होती है।
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सहायक अभियंता और प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी पीयूष गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि छावनी क्षेत्र की संपूर्ण आबादी को कवर करने के लिए कुल 225 कर्मचारियों की फौज तैयार की गई है। इनमें प्रगणक (Enumerators - जो घर-घर जाकर डेटा लेंगे) और पर्यवेक्षक (Supervisors - जो प्रगणकों के काम की निगरानी और जांच करेंगे) शामिल हैं। इन सभी 225 कर्मचारियों को दर्शन एकेडमी में बैच बनाकर सघन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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29 अप्रैल तक चलेगा ट्रेनिंग का दौर: यह प्रशिक्षण शिविर 29 अप्रैल तक अनवरत चलेगा। इस दौरान कर्मचारियों को न केवल डिजिटल ऐप चलाना सिखाया जा रहा है, बल्कि 'सॉफ्ट स्किल्स' (Soft Skills) की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि आम जनता से कैसे विनम्रता से बात करनी है, यदि कोई परिवार जानकारी देने में संकोच करे तो उन्हें कैसे समझाना है, और प्राइवेसी (Privacy) के नियमों का सख्ती से कैसे पालन करना है।
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प्रशासनिक अमले की रही मजबूत उपस्थिति

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इस अहम प्रशिक्षण शिविर में जिला प्रशासन और जनगणना विभाग का पूरा अमला मौजूद रहा, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा। कार्यक्रम में उप जिला जनगणना अधिकारी व अतिरिक्त नगर मजिस्ट्रेट (ACM) सदर सत्य प्रकाश और जिला जनगणना पर्यवेक्षक शिव कुमार ने भी विशेष रूप से शिरकत की। अधिकारियों ने ट्रेनिंग ले रहे कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान किया और उन्हें इस राष्ट्रीय कर्तव्य को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने की शपथ दिलाई।
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छावनी के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे ये आंकड़े

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मेरठ छावनी भारत की सबसे पुरानी और बड़ी छावनियों में से एक है। यहां नागरिक और सैन्य आबादी का एक अनूठा मिश्रण है। 2027 की यह डिजिटल और जातिगत जनगणना मेरठ छावनी के भविष्य के विकास के लिए एक 'ब्लूप्रिंट' (Blueprint) का काम करेगी।
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सटीक आंकड़ों से छावनी बोर्ड को यह तय करने में आसानी होगी कि किन इलाकों में सड़क, पानी, सीवर, स्कूल और अस्पतालों जैसी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, जातिगत और आर्थिक आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। कुल मिलाकर, 29 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रशिक्षण के बाद मेरठ छावनी 2027 के इस महा-सर्वेक्षण के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।
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