खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और आम आदमी की सेहत से जुड़ी गंभीर खबर सामने आई है। क्या आप भी बाजार से पनीर खरीदकर बड़े चाव से खाते हैं? अगर हां, तो यह खबर आपको अंदर तक हिला कर रख देगी। मेरठ जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है।READ ALSO:-मरीजों की जेब पर महंगाई की तगड़ी मार: 20% तक महंगी होंगी कैंसर और जीवन रक्षक दवाएं, जानिए दवाओं के दाम और 'ईरान युद्ध' का क्या है कनेक्शन?
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मेरठ के जानी थाना क्षेत्र के नंगला कुंभा गांव में चल रहे मिलावट के इस काले और खौफनाक कारोबार का पर्दाफाश करते हुए, संयुक्त टीम ने दो अवैध पनीर फैक्ट्रियों पर अचानक छापा मारा। इस दौरान मौके से 28 क्विंटल (2800 किलोग्राम) ऐसा नकली पनीर बरामद किया गया, जिसमें दूध की एक बूंद भी नहीं थी, बल्कि इसे खतरनाक केमिकल्स और रिफाइंड तेल से तैयार किया जा रहा था। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो चंद रुपयों के लालच में मासूम लोगों की जान से खेल रहे हैं।
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गांव में चल रही थी 'सफेद जहर' की फैक्ट्री: अधिकारियों के उड़े होश

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FSDA को पिछले काफी समय से गुप्त सूचना मिल रही थी कि जानी इलाके के कुछ गांवों में बड़े पैमाने पर नकली दूध और पनीर बनाने का काला कारोबार फल-फूल रहा है। इसी सूचना को पुख्ता करने के बाद बुधवार को FSDA और पुलिस की एक बड़ी संयुक्त टीम ने पूरी तैयारी के साथ जानी थाना क्षेत्र के नंगला कुंभा गांव में धावा बोल दिया।
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टीम ने गांव में स्थित जाबिर और हामिद नाम के दो व्यक्तियों की डेयरियों और फैक्ट्रियों पर एक साथ छापेमारी की। खाद्य विभाग की टीम जब फैक्ट्रियों के अंदर दाखिल हुई, तो वहां का नजारा और बदबू देखकर बड़े-बड़े अधिकारियों के भी होश उड़ गए। वहां साफ-सफाई का कोई नामोनिशान नहीं था और चारों तरफ मक्खियां भिनभिना रही थीं।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि वहां पनीर बनाने के लिए प्राकृतिक दूध (Natural Milk) का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हो रहा था। इसके बजाय, बड़े-बड़े ड्रमों में पाम ऑयल (Palm Oil), घटिया क्वालिटी का रिफाइंड, सफेद रंग के अज्ञात केमिकल्स, डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध का घोल तैयार किया जा रहा था। इसी जहरीले मिश्रण को फाड़कर उसे 'पनीर' की शक्ल दी जा रही थी।
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28 क्विंटल पनीर, लाखों का माल: कहां खपाई जानी थी यह खेप?

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अधिकारियों ने मौके से तैयार रखा हुआ 28 क्विंटल (2800 किलो) से अधिक नकली पनीर जब्त किया। इसके अलावा भारी मात्रा में रिफाइंड तेल, केमिकल की कैन और यूरिया जैसे संदिग्ध पाउडर भी बरामद किए गए।
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पूछताछ और शुरुआती जांच में यह खौफनाक खुलासा हुआ है कि यह 'सफेद जहर' रोजाना मेरठ शहर के अलावा दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के कई इलाकों में सप्लाई किया जा रहा था। शादियों के सीजन और त्योहारों के दौरान जब पनीर की असली मांग बढ़ जाती है और दूध की कमी होती है, तब ये मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। इस नकली पनीर को मुख्य रूप से स्थानीय ढाबों, सस्ते रेस्टोरेंट, चाट-पकौड़ी के ठेलों और शादियों के कैटरर्स को औने-पौने दामों (100 से 150 रुपये किलो) में बेचा जाता था, जिसे बाद में आम जनता महंगे दामों पर असली समझकर खा रही थी।
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जेसीबी से खोदा गया गड्ढा, जमीन में गाड़ा गया 2800 किलो जहर

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बरामद किया गया नकली पनीर इतना खतरनाक और जहरीला था कि इसे खुला छोड़ना इंसानों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था। एफएसडीए (FSDA) टीम ने सबसे पहले इस पनीर और वहां मौजूद कच्चे माल के कई सैंपल (नमूने) लिए, जिन्हें जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला (State Laboratory) भेज दिया गया है।
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सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में एक जेसीबी (JCB) मशीन मंगवाई गई। गांव के बाहर एक खाली मैदान में 10 से 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया और पूरे 28 क्विंटल नकली पनीर को उस गड्ढे में डालकर ऊपर से ब्लीचिंग पाउडर और मिट्टी डालकर हमेशा के लिए दफना दिया गया, ताकि कोई जानवर भी इसे खाकर बीमार न पड़े। दोनों अवैध फैक्ट्रियों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
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आरोपियों के खिलाफ दर्ज होगी FIR, लगेगा रासुका?

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मेरठ के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Food Safety Officer) ने बताया कि जाबिर और हामिद के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (Food Safety and Standards Act) की सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत जानी थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा रही है।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि मिलावटखोरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अगर लैब रिपोर्ट में पनीर के अंदर जानलेवा रसायनों की पुष्टि होती है, तो इन आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोगों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
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स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है यह केमिकल वाला पनीर?

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मेडिकल एक्सपर्ट्स और डाइटिशियन के मुताबिक, रिफाइंड तेल, यूरिया, डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध से बना यह पनीर किसी 'स्लो पॉइजन' (Slow Poison) से कम नहीं है।
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    लिवर और किडनी डैमेज: इस पनीर में इस्तेमाल होने वाले भारी रसायन और खराब तेल सीधे हमारे लिवर (Liver) और किडनी (Kidneys) पर हमला करते हैं, जिससे वे धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकते हैं।
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    पेट की गंभीर बीमारियां: इसे खाने से तुरंत फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और आंतों में गंभीर अल्सर हो सकता है।
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    कैंसर का खतरा: लंबे समय तक ऐसे सिंथेटिक और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैंसर (Cancer) पैदा करने वाले सेल विकसित हो सकते हैं।
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    हृदय रोग: खराब पाम ऑयल और रिफाइंड के इस्तेमाल से नसों में कोलेस्ट्रॉल तेजी से जमता है, जिससे कम उम्र में ही हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा बढ़ जाता है।
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खबरीलाल विशेष: घर बैठे कैसे करें असली और नकली पनीर की पहचान?

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बाजार में बिक रहे इस सफेद जहर से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। आप अपने घर की रसोई में इन 4 आसान तरीकों से असली और नकली पनीर की पहचान कर सकते हैं:
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    आयोडीन टेस्ट (Iodine Test): पनीर के एक छोटे टुकड़े को पानी में उबाल लें। ठंडा होने पर इस पर टिंचर आयोडीन (मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध) की कुछ बूंदें डालें। अगर पनीर का रंग नीला (Blue) पड़ जाए, तो समझ लें कि उसमें भारी मात्रा में स्टार्च या मैदा मिलाया गया है और वह नकली है।
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    मसलकर देखें (Texture Test): बाजार से पनीर खरीदते समय उसका एक छोटा टुकड़ा लें और उसे अपने अंगूठे और उंगलियों के बीच हल्के हाथों से मसलें। असली पनीर बिल्कुल चिकना और मुलायम होगा, जबकि नकली पनीर (जो रिफाइंड या केमिकल से बना है) रबर की तरह खिंचेगा और टूटकर चूरा (भुरभुरा) हो जाएगा।
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    दाल का टेस्ट: पनीर के एक टुकड़े को पानी में उबालें और उसमें सोयाबीन या अरहर की कच्ची दाल का पाउडर डाल दें। 10 मिनट बाद अगर पनीर का रंग हल्का लाल होने लगे, तो यह स्पष्ट संकेत है कि पनीर में डिटर्जेंट या यूरिया की मिलावट की गई है।
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    खुशबू और स्वाद (Smell and Taste): असली पनीर में दूध की एक प्राकृतिक, मीठी और सौंधी खुशबू आती है। अगर पनीर से साबुन, दवाइयों या किसी तरह के तेल (रिफाइंड) की महक आ रही है, तो उसे तुरंत फेंक दें।
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प्रशासन की यह कार्रवाई निश्चित तौर पर सराहनीय है, लेकिन आम जनता को भी त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में सतर्क रहने की जरूरत है। जहां तक हो सके, भरोसेमंद डेयरियों से ही पनीर खरीदें या घर पर ही दूध फाड़कर ताजा पनीर बनाने की आदत डालें।
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