मेरठ (Meerut Development News): उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शुमार मेरठ की सबसे बड़ी और पुरानी बीमारी 'ट्रैफिक जाम' का अब स्थायी और हाई-टेक इलाज होने जा रहा है। रैपिड रेल (नमो भारत) और प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट के बीच, शहर की अंदरूनी यातायात व्यवस्था को सुगम और निर्बाध बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाते हुए मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा/MDA) ने शहर के 8 सबसे व्यस्त चौराहों और 1 प्रमुख सड़क (किला रोड) के चौड़ीकरण का मेगा प्लान तैयार कर लिया है।READ ALSO:-मेरठ को 'जाम के जंजाल' से निकालने का ऐतिहासिक 'मेगा ब्लूप्रिंट': 27 नई पार्किंग, 32 हाई-टेक चौराहे और आबूलेन और पीएल शर्मा रोड होंगे ई-रिक्शा मुक्त!
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इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए मेडा ने करोड़ों रुपये के टेंडर भी आमंत्रित कर दिए हैं। इन टेंडरों के पास होते ही शहर के चौराहों की न सिर्फ सूरत बदल जाएगी, बल्कि वहां लगने वाले घंटों के जाम से जनता को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। आइए, इस पूरे प्रोजेक्ट और इसके बजट को विस्तार से समझते हैं।
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30 मई को खुलेंगे बिड (Bids), एक साल में बदल जाएगी शहर की तस्वीर
\r\n\r\nमेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर है और इसे फास्ट-ट्रैक मोड पर पूरा करना चाहता है। मेडा के अधिकारियों के अनुसार, इन 8 चौराहों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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- \r\n बिड खुलने की तारीख: इस प्रोजेक्ट से संबंधित तकनीकी और वित्तीय बिड 30 मई को खोली जाएंगी।\r\n \r\n
- \r\n डेडलाइन (समयसीमा): कार्यदायी संस्था (Contractor) का चयन होने के बाद, इन चौराहों के चौड़ीकरण के कार्य को पूरा करने के लिए मात्र एक साल (12 महीने) की सख्त समयसीमा (Deadline) तय की गई है।\r\n \r\n
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प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले साल तक शहरवासियों को एक स्मार्ट और जाम-मुक्त ट्रैफिक सिस्टम का तोहफा दिया जा सके।
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किन चौराहों का होगा कायाकल्प और कितना है बजट? (Budget Breakdown)
\r\n\r\nमेरठ शहर के जिन चौराहों को चौड़ा करने के लिए चुना गया है, वे शहर के सबसे प्रमुख 'चोक पॉइंट्स' (Choke Points) माने जाते हैं, जहां पीक आवर्स (Peak Hours) में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। मेडा ने हर चौराहे की भौगोलिक स्थिति और आवश्यकता के अनुसार करोड़ों का बजट आवंटित किया है।
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चौराहों के नाम और उन पर खर्च होने वाली अनुमानित धनराशि का विवरण:
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- \r\n मंगल पांडे चौक: शहर के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक चौराहों में से एक इस चौक के चौड़ीकरण पर 2.93 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n फुटबॉल चौक व रेलवे चौराहा: कैंट और शहर को जोड़ने वाले इन बेहद व्यस्त चौराहों के संयुक्त प्रोजेक्ट के लिए सबसे अधिक 4.16 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n शहीद भगवान चौक: इस चौराहे को चौड़ा कर जाम मुक्त बनाने के लिए 3.36 करोड़ रुपये की धनराशि तय की गई है।\r\n \r\n
- \r\n लालकुर्ती के पास बाउंड्री रोड चौक: कैंट इलाके के इस महत्वपूर्ण जंक्शन के लिए 3.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे।\r\n \r\n
- \r\n शिव मंदिर मोहनपुरी चौक: मोहनपुरी जैसे घनी आबादी वाले इलाके के इस चौराहे को संवारने के लिए 3.36 करोड़ रुपये का बजट आवंटित है।\r\n \r\n
- \r\n भूमिया माता का पुल: इस संकरे और भारी ट्रैफिक वाले पुल वाले चौराहे के चौड़ीकरण पर 2.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n बच्चा पार्क चौराहा: मेरठ शहर के 'दिल' कहे जाने वाले और सबसे ज्यादा व्यावसायिक गतिविधियों वाले 'बच्चा पार्क चौराहे' के चौड़ीकरण के लिए 2.64 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है।\r\n \r\n
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'लेफ्ट टर्न फ्री' (Left Turn Free) फॉर्मूले से मिलेगी जाम से आज़ादी
\r\n\r\nइन चौराहों पर सिर्फ सड़क की चौड़ाई ही नहीं बढ़ाई जाएगी, बल्कि इनकी पूरी इंजीनियरिंग और डिजाइनिंग को स्मार्ट सिटी के मानकों के अनुरूप नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
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इस नए डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत होगी— 'लेफ्ट टर्न फ्री' (Left Turn Free) लेन का निर्माण। अक्सर चौराहों पर रेड लाइट होने की वजह से बायीं तरफ मुड़ने वाले वाहनों को भी रुकना पड़ता है, जिससे बेवजह जाम लगता है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद, चौराहों पर बायीं ओर मुड़ने वाले वाहनों के लिए एक अलग और सुरक्षित लेन होगी। इससे वाहन बिना रुके (बिना रेड लाइट की प्रतीक्षा किए) सीधे और तेजी से निकल सकेंगे।
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चौराहों पर होने वाले अन्य प्रमुख सुधार कार्य:
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- \r\n अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर: चौराहों के आसपास वर्षों से काबिज अवैध कब्जों और अतिक्रमण को पूरी तरह से हटाया जाएगा, ताकि सड़क की पूरी चौड़ाई का इस्तेमाल हो सके।\r\n \r\n
- \r\n बिजली के खंभों की शिफ्टिंग: सड़क के बीचों-बीच या किनारों पर बाधा बन रहे बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और अन्य उपयोगिताओं (Utilities) को वहां से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n ई-रिक्शा के लिए आरक्षित स्टैंड: शहर में जाम का सबसे बड़ा कारण ई-रिक्शा और ऑटो का बेतरतीब खड़ा होना है। नए डिजाइन में चौराहों से एक निश्चित दूरी पर ई-रिक्शा और अन्य यात्री वाहनों को खड़ा करने (पिक एंड ड्रॉप) के लिए विशेष स्थान (Stands) आरक्षित किए जाएंगे। कोई भी रिक्शा चौराहे के मुहाने पर सवारी नहीं भर सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n गोल चक्कर (Roundabouts) का नया डिजाइन: चौराहों के बीच बने पुराने और बेढंगे गोल चक्करों को तोड़कर उन्हें आधुनिक, छोटे और यातायात के अनुकूल आकार में नए सिरे से डिजाइन किया जाएगा।\r\n \r\n
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63 करोड़ रुपये की लागत से 18 महीने में चौड़ी होगी 'किला रोड' (जेल चुंगी से भावनपुर)
\r\n\r\nचौराहों के साथ-साथ शहर की एक सबसे समस्याग्रस्त सड़क का भी कायाकल्प होने जा रहा है। किला रोड (Kila Road), जो कि शहर को देहात क्षेत्रों से जोड़ती है, पर हर समय भयंकर जाम की स्थिति बनी रहती है।
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इस सड़क के दोनों ओर घने बाजार और बड़ी आवासीय कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। बेतहाशा अतिक्रमण और सड़क की कम चौड़ाई के कारण इस मार्ग से भारी वाहनों और कारों का गुजरना किसी बुरे सपने से कम नहीं होता। कई बार तो यहां एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं।
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इस जानलेवा जाम के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने एक वृहद प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अंतर्गत 'जेल चुंगी से लेकर भावनपुर तक' सड़क की चौड़ाई को मानकों के अनुरूप बढ़ाया जाएगा।
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- \r\n बजट: इस बड़े सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट पर लगभग 63 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि खर्च की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n समयसीमा: इस प्रोजेक्ट की व्यापकता को देखते हुए इसे पूर्ण करने के लिए 18 महीने (डेढ़ साल) की समयसीमा निर्धारित की गई है।\r\n \r\n
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चौड़ीकरण के साथ-साथ इस सड़क पर जलभराव रोकने के लिए नालों का निर्माण, मजबूत डिवाइडर और फुटपाथ बनाने का कार्य भी किया जाएगा।
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बदलता और निखरता मेरठ शहर
\r\n\r\nमेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) का यह कदम शहर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में एक 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है। 8 प्रमुख चौराहों और किला रोड जैसी लाइफलाइन सड़क के चौड़ीकरण से न केवल वाहन चालकों का कीमती समय और ईंधन बचेगा, बल्कि शहर में प्रदूषण के स्तर में भी भारी कमी आएगी। 30 मई को टेंडर खुलने के बाद, जल्द ही धरातल पर काम शुरू होने की उम्मीद है। शहरवासियों को अब बस इस बात का इंतजार है कि ये योजनाएं कागजों से निकलकर जल्द से जल्द हकीकत में तब्दील हों, ताकि वे एक 'स्मार्ट और जाम-मुक्त' मेरठ में सुकून की सांस ले सकें।
Sabse pehle comment karne wale banein.