मवाना/मेरठ (स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव डेस्क): क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए, जो छात्र अभी अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, उनके बैंक खातों में अचानक करोड़ों रुपये का लेन-देन होने लगे? आज के डिजिटल युग में 'शॉर्टकट' से अमीर बनने की चाहत युवाओं को अपराध की उन अंधी सुरंगों में धकेल रही है, जहां से वापसी नामुमकिन है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के मवाना (Mawana) कस्बे में एक ऐसा ही सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने देश की सर्वोच्च आर्थिक जांच एजेंसी 'प्रवर्तन निदेशालय' (Enforcement Directorate - ED) को भी चौंका दिया है।READ ALSO:-बिजनौर में माफियाओं पर 'खाकी' का कड़ा प्रहार: गैंगस्टर अतीक अहमद की 168 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 'उमर इंटरनेशनल' सील
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ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) और सट्टेबाजी (Betting) के काले कारोबार के जरिए मवाना के दो छात्रों ने रातों-रात करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली। इस भारी-भरकम और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए, बुधवार तड़के 4 बजे ईडी की टीमों ने मवाना के दो अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी महा-छापेमारी को अंजाम दिया। आइए इस करोड़ों के स्कैम की पूरी इनसाइड स्टोरी (Inside Story) को विस्तार से समझते हैं।
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भोर का सन्नाटा और सायरन की गूंज: छावनी में तब्दील हुआ मवाना

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बुधवार की अलसुबह, जब पूरा मवाना कस्बा गहरी नींद की आगोश में था, तब दिल्ली और जोनल ऑफिस से आई ईडी की टीमों का भारी-भरकम काफिला मवाना की सीमा में दाखिल हुआ। इस ऑपरेशन को 'टॉप सीक्रेट' (Top Secret) रखा गया था। स्थानीय पुलिस को भी इस कार्रवाई की भनक नहीं लगने दी गई ताकि कोई सूचना लीक न हो। ईडी की टीमों के साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के हथियारबंद जवान मौजूद थे।
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ठीक सुबह 4 बजे, ईडी ने दो अलग-अलग टीमों में बंटकर अपने निशानों पर एक साथ धावा बोला। जांच एजेंसी के रडार पर कोई बड़े नेता या व्यापारी नहीं थे, बल्कि मवाना क्षेत्र के रहने वाले दो युवा छात्र थे:
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    शुभम - निवासी ग्राम साधन (मवाना थाना क्षेत्र)
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    अलेक जैदी - निवासी मोहल्ला खैरात अली का कोटला (मवाना)
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इन दोनों छात्रों पर आरोप है कि वे एक बहुत बड़े और संगठित 'ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क' का अहम हिस्सा हैं। इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर धन अर्जित किया गया और उस काले धन को सफेद करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का सहारा लिया गया।
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रेड- 1: ग्राम साधन में छापा, लेकिन ED को चकमा देकर उड़ गया 'पंछी'

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ईडी की पहली और मुख्य टीम ने मवाना के ग्राम साधन स्थित छात्र 'शुभम' के घर की घेराबंदी की। सीआरपीएफ जवानों ने पूरे घर को चारों तरफ से सील कर दिया। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल छापे का सबसे बड़ा 'ट्विस्ट' (Twist) यह रहा कि ईडी की टीम के दरवाजे तक पहुंचने से कुछ ही मिनटों पहले मुख्य आरोपी शुभम को संभवतः इस रेड की भनक लग गई थी। वह घर के पिछले रास्ते या किसी अन्य गुप्त तरीके से ईडी की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया।
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परिजनों से मैराथन पूछताछ का दौर: मुख्य आरोपी के हाथ न आने पर ईडी अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और घर के अंदर मौजूद परिजनों को अपने कब्जे में ले लिया। सूत्रों के अनुसार, शुभम के भाइयों— अर्चित और अभिनव सहित परिवार के अन्य सदस्यों को अलग-अलग कमरों में बैठाकर कई घंटों तक तीखी पूछताछ की गई। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि:
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    एक साधारण से छात्र के पास अचानक लग्जरी जीवन जीने के लिए करोड़ों रुपये कहां से आ रहे थे?
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    उसके बैंक खातों को कौन ऑपरेट कर रहा था?
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    क्या उसके तार किसी अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी गिरोह (जैसे- महादेव ऐप या अन्य) से जुड़े हुए हैं?
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    परिवार को इस 'करोड़ों के खेल' की कितनी जानकारी थी?
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रेड- 2: अलेक जैदी के घर घंटों चली जांच, डिजिटल फुटप्रिंट से 'आगरा' पहुंची आंच

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उसी वक्त, ईडी की दूसरी टीम ने मवाना के घनी आबादी वाले इलाके मोहल्ला 'खैरात अली का कोटला' में अलेक जैदी के आवास पर धावा बोला। यहां भी सुरक्षा बलों ने गली को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया और बाहरी लोगों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब घर में अलेक जैदी की तलाश की गई तो वह वहां मौजूद नहीं मिला। हालांकि, ईडी की साइबर टीम ने जब डिजिटल ट्रैकिंग और मोबाइल सर्विलांस का सहारा लिया, तो अलेक जैदी की वर्तमान लोकेशन आगरा (Agra) में ट्रेस होने की बात सामने आई है। ईडी की एक समानांतर टीम अब आगरा में भी उसके संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी कर रही है। मवाना स्थित उसके घर पर अधिकारियों ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली और उसके वित्तीय दस्तावेजों व बैंक स्टेटमेंट को खंगाला।
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छापेमारी का 'खजाना': डिजिटल डिवाइस और हवाला के सुराग

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चूंकि यह 'ऑनलाइन गेमिंग स्कैम' पूरी तरह से एक डिजिटल और व्हाइट-कॉलर (White-collar) अपराध है, इसलिए ईडी का मुख्य फोकस नकदी (Cash) से ज्यादा डिजिटल साक्ष्यों (Digital Evidence) पर था। इस छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों ने निम्नलिखित चीजें जब्त की हैं:
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    डिजिटल उपकरणों का जखीरा: कई महंगे स्मार्टफोन, हाई-एंड गेमिंग लैपटॉप, पेन ड्राइव और हार्ड ड्राइव को फॉरेंसिक जांच (Forensic Data Extraction) के लिए जब्त किया गया है।
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    बैंक दस्तावेजों का पुलिंदा: विभिन्न राष्ट्रीय और निजी बैंकों की दर्जनों पासबुक, चेकबुक और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन (Transactions) के प्रिंटआउट हाथ लगे हैं।
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    शेल कंपनियों और क्रिप्टो का अंदेशा: जांच में यह बात सामने आ रही है कि गेमिंग के जरिए कमाए गए पैसे को शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के जरिए भारत से बाहर (खाड़ी देशों या यूरोप) भेजा जा रहा था।
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पड़ोसियों में दहशत और चर्चाओं का बाजार

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सुबह होते ही जब मवाना के लोगों ने गलियों के बाहर सीआरपीएफ के जवानों और ईडी की गाड़ियों का जमावड़ा देखा, तो पूरे कस्बे में सनसनी फैल गई। मोहल्ले के लोगों को इस बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके बीच रहने वाले, उनके सामने बड़े हुए दो सामान्य छात्र ऑनलाइन गेमिंग के जरिए करोड़ों के 'मास्टरमाइंड' बन सकते हैं।
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दिनभर मवाना के चौक-चौराहों, चाय की दुकानों और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर इसी बात की चर्चा रही कि आखिर इन युवाओं ने इतनी जल्दी इतना बड़ा सिंडिकेट कैसे खड़ा कर लिया। कई लोगों ने दबी जुबान में बताया कि पिछले कुछ समय से इन दोनों छात्रों की लाइफस्टाइल में अचानक बड़ा बदलाव आ गया था, जो अब ईडी की रेड के बाद समझ में आ रहा है।
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आगे का रास्ता: क्या खुलेगी किसी बड़े 'सिंडिकेट' की पोल?

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देर शाम तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) मुख्यालय की ओर से इस छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान (Official Statement) जारी नहीं किया गया था। लेकिन आर्थिक अपराधों के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यह मामला केवल दो छात्रों तक सीमित नहीं है। यह किसी बहुत बड़े 'सिंडिकेट' (Syndicate) का केवल एक सिरा (Tip of the Iceberg) है।
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छात्रों का इस्तेमाल अक्सर 'बलि के बकरे' (Mules) या बैंक खातों को किराए पर लेने के लिए किया जाता है, जबकि असली आका दुबई या किसी अन्य देश में बैठकर पूरा नेटवर्क चलाते हैं। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इन छात्रों के बैंक खातों में पैसा किन-किन 'सोर्स' से आया। फरार शुभम और अलेक जैदी की गिरफ्तारी के बाद ही इस करोड़ों के ऑनलाइन गेमिंग स्कैम की असली परतें खुल सकेंगी और कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे। मवाना में हुई यह सर्जिकल स्ट्राइक उन सभी युवाओं के लिए एक कड़ा सबक है, जो रातों-रात अमीर बनने के लिए साइबर अपराध का रास्ता चुन रहे हैं।
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