मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में रहने वाले उन भवन स्वामियों और संपत्ति मालिकों के लिए एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर है, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में अपना हाउस टैक्स (House Tax) जमा करने में लापरवाही बरती है। मेरठ नगर निगम (Meerut Nagar Nigam) ने शहर के बकायेदारों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। यदि आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 का अपना गृहकर, जलकर और सीवरकर जमा नहीं किया है, तो अब आपकी जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है।Read also:-महंगाई का जोरदार झटका: कच्चे तेल की आग से जलेंगे FMCG उत्पादों के दाम, साबुन से लेकर खाने का तेल तक सब होगा महंगा!
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1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष (FY 2026-27) शुरू हो चुका है, और इसी के साथ नगर निगम ने उन लगभग 1.10 लाख भवन स्वामियों पर शिकंजा कस दिया है, जो टैक्स के दायरे में तो आते हैं लेकिन टैक्स चुकाने से कतराते हैं। अब इन सभी बकायेदारों को अपनी बकाया राशि पर 12 प्रतिशत का भारी भरकम ब्याज (Interest) चुकाना होगा। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि नगर निगम के नए नियम क्या हैं, इसका आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा और टैक्स जमा करने की नई प्रक्रिया कब से शुरू होगी।
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12% ब्याज की मार और खत्म हुई 20% की आकर्षक छूट

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नगर निगम के नियमों के अनुसार, जो नागरिक समय पर यानी वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में अपना हाउस टैक्स और अन्य कर जमा कर देते हैं, उन्हें निगम की तरफ से बिल में 20 प्रतिशत की आकर्षक छूट (Rebate) दी जाती है। यह छूट आम जनता को समय पर टैक्स भरने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी जाती है।
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लेकिन, जिन 1.10 लाख भवन स्वामियों ने 31 मार्च 2026 तक यानी वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति तक अपना गृहकर, जलकर और सीवरकर जमा नहीं किया है, उनके लिए यह 20% की छूट हमेशा के लिए समाप्त कर दी गई है। इतना ही नहीं, नया वित्तीय वर्ष 2026-27 शुरू होते ही निगम ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन बकायेदारों के मूल बिल पर 12 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज जोड़ दिया है।
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इसका सीधा सा मतलब यह है कि जो बिल आप पहले 20% छूट के साथ आसानी से भर सकते थे, अब वही बिल आपको न केवल बिना किसी छूट के, बल्कि 12% पेनाल्टी (Penalty) के साथ चुकाना पड़ेगा। इससे बकायेदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। निगम अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए राजस्व इकट्ठा करना बेहद जरूरी है, और टैक्स चोरी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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बकायेदारों को भेजे जाएंगे डिमांड नोटिस और रिकवरी बिल

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मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के अनुसार, जिन 1.10 लाख लोगों ने टैक्स जमा नहीं किया है, नगर निगम उनकी पूरी सूची तैयार कर चुका है। अब इन सभी भवन स्वामियों को नए वित्तीय वर्ष में बकाये की राशि (Arrears), उस पर लगा 12% ब्याज, और चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) की नई मांग (Current Demand) को जोड़कर एक संयुक्त बिल और डिमांड नोटिस भेजा जाएगा।
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अगर नोटिस मिलने के बाद भी संपत्ति मालिक अपना बकाया चुकाने में आनाकानी करते हैं, तो नगर निगम उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत संपत्ति कुर्क करने और बैंक खाते सीज करने जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है। हालांकि, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए, यदि किसी भवन स्वामी को अपने नए गृहकर बिल या ब्याज को लेकर कोई वैध आपत्ति (Objection) है, तो निगम उन्हें अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का एक और उचित अवसर जरूर प्रदान करेगा।
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रिकॉर्ड वसूली: निगम ने की 125 करोड़ रुपये की शानदार कमाई

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मेरठ नगर निगम के लिए बीता हुआ वित्तीय वर्ष (2025-26) राजस्व वसूली के लिहाज से काफी अच्छा रहा है। उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से मेरठ नगर निगम को इस वर्ष गृहकर, जलकर और सीवरकर के रूप में कुल 133 करोड़ रुपये वसूलने का भारी भरकम लक्ष्य (Target) दिया गया था।
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वित्तीय वर्ष की समाप्ति (31 मार्च) पर निगम के कर विभाग ने अपनी दिन-रात की मेहनत और सख्ती के दम पर इस लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 125 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड वसूली करने का दावा किया है। आंकड़ों के मुताबिक, यह భారీ वसूली शहर के करीब 1.85 लाख जागरूक भवन स्वामियों से की गई है, जिन्होंने समय पर अपना दायित्व निभाया है।
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पिछले साल से 37 करोड़ की बंपर छलांग

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अगर हम निगम के इस प्रदर्शन की तुलना पिछले साल से करें, तो यह एक बड़ी उपलब्धि नजर आती है:
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    वित्तीय वर्ष 2024-25: लक्ष्य 110 करोड़ रुपये था, जिसके एवज में निगम केवल 88 करोड़ रुपये ही वसूल पाया था।
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    वित्तीय वर्ष 2025-26: लक्ष्य 133 करोड़ रुपये था, और निगम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 125 करोड़ रुपये वसूले।
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साफ तौर पर देखा जा सकता है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार मेरठ नगर निगम ने 37 करोड़ रुपये अधिक राजस्व इकट्ठा किया है। हालांकि निगम अपने 100% लक्ष्य (133 करोड़) को पूरी तरह नहीं छू सका, लेकिन 125 करोड़ का आंकड़ा निगम के खजाने के लिए एक बड़ी राहत है। यह पैसा मेरठ शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत, नई स्ट्रीट लाइट्स लगाने, साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और सीवर लाइनों के निर्माण जैसे जनहित के कार्यों में खर्च किया जाएगा।
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जीआईएस सर्वे (GIS Survey) ने खोला टैक्स चोरों का कच्चा चिट्ठा

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मेरठ में इतनी बड़ी मात्रा में राजस्व वसूली के पीछे सबसे बड़ा हाथ जीआईएस सर्वे (Geographic Information System Survey) का रहा है। पहले शहर में बहुत सी ऐसी संपत्तियां थीं जो नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थीं या कमर्शियल (व्यावसायिक) होने के बावजूद आवासीय (Residential) टैक्स दे रही थीं।
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ड्रोन और सैटेलाइट के माध्यम से हुए अत्याधुनिक जीआईएस सर्वे के बाद निगम क्षेत्र में कुल 3.05 लाख संपत्तियों की पहचान की गई है। इस सर्वे ने उन हजारों संपत्तियों को टैक्स के दायरे में ला खड़ा किया है, जो सालों से टैक्स की चोरी कर रही थीं। निगम अब इसी सर्वे डेटाबेस के आधार पर हर एक घर और कमर्शियल बिल्डिंग का सटीक टैक्स असेसमेंट कर रहा है।
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आपत्तियों का निस्तारण: 18,000 शिकायतों का हुआ समाधान

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नए जीआईएस सर्वे और टैक्स असेसमेंट के बाद शहर में भारी हड़कंप मच गया था। कई लोगों के बिल कई गुना बढ़कर आ गए थे। इसके चलते बीते वित्तीय वर्ष में नगर निगम के कर विभाग को टैक्स से संबंधित लगभग 18,000 आपत्तियां (Objections) प्राप्त हुई थीं।
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निगम प्रशासन ने टैक्सपेयर्स की इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और विशेष कैंप लगाकर 31 मार्च तक इन सभी आपत्तियों का सफलतापूर्वक निस्तारण (Resolution) कर दिया है। सबसे अच्छी बात यह रही कि जिन भवन स्वामियों की आपत्तियों का समाधान हुआ, उन्होंने संतुष्ट होकर तुरंत अपना संशोधित गृहकर जमा भी कर दिया, जिससे निगम के राजस्व में अचानक भारी उछाल आया।
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तकनीकी रुकावट: एक महीने तक जमा नहीं होगा हाउस टैक्स

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अगर आप एक जागरूक नागरिक हैं और अपना हाउस टैक्स जमा करने के लिए नगर निगम के चक्कर काटने की सोच रहे हैं, तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा। नए वित्तीय वर्ष के लागू होते ही नगर निगम ने टैक्स जमा करने की प्रक्रिया को एक महीने के लिए पूरी तरह से रोक दिया है।
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ऐसा क्यों किया गया है? दरअसल, यह समय पोर्टल के तकनीकी अपग्रेडेशन (Portal Update) का होता है। पूरे एक महीने तक निगम का आईटी विभाग (IT Department) टैक्स पोर्टल को अपडेट करेगा। इस दौरान:
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    सभी 3.05 लाख संपत्तियों का नया वित्तीय वर्ष 2026-27 का गृहकर बिल जनरेट किया जाएगा।
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    जिन 1.10 लाख लोगों ने टैक्स नहीं दिया है, उनके खाते में 12% ब्याज (Interest) और पिछला बकाया (Arrears) जोड़ा जाएगा।
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    सिस्टम में नई दरों और नियमों को फीड किया जाएगा।
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निगम अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा तकनीकी काम अप्रैल के अंत तक पूरा हो जाएगा। मई के महीने से पोर्टल को आम जनता के लिए फिर से खोल दिया जाएगा और नए जनरेट किए गए बिलों का वितरण शहर भर में शुरू हो जाएगा।
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निष्कर्ष: मेरठ के नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे मई में जैसे ही पोर्टल चालू हो, तुरंत अपना हाउस टैक्स जमा करें ताकि वे भविष्य में लगने वाले किसी भी भारी ब्याज और पेनाल्टी से खुद को बचा सकें। शहर का विकास हमारे द्वारा दिए गए टैक्स पर ही निर्भर करता है, इसलिए समय पर टैक्स चुकाना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
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