मेरठ (05/10/2025):
\r\n\r\n
शनिवार को मेरठ के मदर स्थित बालाजी मंदिर में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान, अखिल भारतीय की पत्र निर्माता खादा के श्री श्री 108 श्री महेंद्र दास जी महाराज ने धर्मांतरण के संवेदनशील मुद्दे पर एक शक्तिशाली संदेश दिया। उन्होंने 'I Love मोहम्मद' जैसे नारों की अपनी व्याख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसका सच्चा अर्थ है "भगवान मेरे दिल में हैं" और इस भावना का सम्मान होना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने छल-कपट और लालच देकर कराए जा रहे धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आह्वान किया।READ ALSO:-गाजियाबाद की सड़क पर 'मौत' की रफ्तार: 100 की स्पीड से आई कार ने 3 सहेलियों को रौंदा, 15 साल की दोस्ती का दर्दनाक अंत
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
"धर्मांतरण सामाजिक विभाजन की जड़ है"
\r\n\r\n
महाराज महेंद्र दास ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, "इतिहास गवाह है, जब-जब दबाव, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन कराया गया है, तब-तब समाज में केवल विभाजन, घृणा और संघर्ष ने ही जन्म लिया है।" उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज भी विदेशी धन और मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे सुनियोजित अभियान हमारे देश के गांवों, जंगलों और निर्धन बस्तियों को अपना निशाना बना रहे हैं, जो कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक समरसता के लिए एक बड़ा खतरा है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
धर्म-स्वातंत्र्य कानून: आस्था पर सुरक्षा कवच
\r\n\r\n
उन्होंने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया, “ये धर्म-स्वातंत्र्य कानून किसी व्यक्ति की आस्था को छीनने के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की आस्था को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए एक सुरक्षा कवच हैं।” उन्होंने उत्तर प्रदेश के कानून का विशेष उल्लेख किया, जिसमें विवाह के माध्यम से जबरन धर्मांतरण पर 20 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है, ताकि कोई किसी को धर्म बदलने के लिए मजबूर न कर सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संविधान देता है आस्था की आजादी, मजबूरी की नहीं
\r\n\r\n
महाराज ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा, “संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह स्वतंत्रता जन-व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। आप अपनी आस्था का प्रचार करें, लेकिन किसी पर दबाव डालकर, उसे लालच देकर या उसके साथ छल करके धर्म अपनाने को मजबूर नहीं कर सकते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म-स्वातंत्र्य का अधिकार जितना धर्म बदलने की स्वतंत्रता देता है, उतना ही अपने मूल धर्म में सुरक्षित रहने का भी अधिकार देता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस अवसर पर जूना अखाड़ा के नागा तरुण गिरी जी महाराज और स्वामी प्रद्युम्न जी महाराज भी उपस्थित रहे, जिन्होंने महेंद्र दास जी महाराज के विचारों का समर्थन करते हुए धर्मांतरण के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन