ख़बरीलाल न्यूज़ डेस्क (06 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'कानपुर-मेरठ किडनी कांड' (Kidney Transplant Scam) में पुलिस को एक बेहद अहम और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मानव अंगों की खरीद-फरोख्त करने वाले इस खौफनाक सिंडिकेट के सबसे बड़े राजदार और मास्टरमाइंड, मेरठ निवासी परवेज सैफी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। परवेज की गिरफ्तारी से न केवल इस पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) से पर्दा उठने की उम्मीद है, बल्कि उन सफेदपोश डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के चेहरे भी बेनकाब होंगे, जो पैसों के लालच में इंसानियत का सौदा कर रहे थे।READ ALSO:-नशे के दानव ने निगला एक और परिवार: मेरठ में विवाद के बाद पति-पत्नी ने लगाई खुद को आग, तड़प-तड़प कर दोनों की दर्दनाक मौत, दो मासूम हुए अनाथ
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पुलिस महकमे के सूत्रों का मानना है कि परवेज महज एक मोहरा नहीं, बल्कि इस पूरे गिरोह का एक बराबर का साझेदार (Equal Partner) था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब फरार चल रहे मुख्य आरोपियों और डॉक्टरों की गिरफ्तारी का रास्ता भी साफ हो गया है।
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500-500 की नोटों की गड्डियों का वह वायरल वीडियो और गिरफ्तारी

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परवेज सैफी का नाम पिछले कुछ दिनों से पूरे प्रदेश में गूंज रहा था। दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बेहद तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में परवेज सैफी, फरार चल रहे एक अन्य मुख्य आरोपी डॉ. अफजाल के साथ बैठा हुआ था और दोनों 500-500 रुपये की नोटों की भारी-भरकम गड्डियों से खेलते और उन्हें हवा में उछालते हुए नजर आ रहे थे।
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यह वीडियो इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि मानव अंगों की तस्करी के इस काले कारोबार में कितनी बड़ी रकम का लेन-देन हो रहा था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस और एसटीएफ (STF) की टीमों ने परवेज की तलाश में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पुलिस की सर्विलांस और स्वाट (SWAT) टीमों ने सटीक मुखबिरी के आधार पर घेराबंदी कर इस शातिर अपराधी को दबोच लिया।
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डकैती और लूट का पुराना इतिहास: कौन है परवेज सैफी?

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किडनी ट्रांसप्लांट जैसे हाई-प्रोफाइल मेडिकल क्राइम में शामिल होने वाला परवेज सैफी कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह एक बेहद शातिर और आदतन अपराधी है।
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डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि मेरठ निवासी परवेज का एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ मेरठ और आसपास के थानों में डकैती (Dacoity), लूट और गैंगस्टर एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में पहले से ही 7 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। एक डकैत से लेकर अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोह का सबसे अहम राजदार बनने तक का उसका यह सफर पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला है।
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क्या था सिंडिकेट में परवेज का काम? 'लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट' का जिम्मा

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कड़ी पूछताछ के दौरान परवेज ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने पुलिस को बताया कि वह इस गिरोह में केवल एक ड्राइवर या दलाल नहीं था, बल्कि मुनाफे में उसकी 'बराबर की साझेदारी' थी।
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इस पूरे रैकेट में परवेज का मुख्य काम 'लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्टेशन' (Logistic and Transportation) संभालना था। जब भी किसी डोनर (किडनी देने वाले) और रिसीवर (किडनी लेने वाले) का सौदा तय हो जाता था, तो गुपचुप तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता था।
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    डॉक्टरों की टीम का 'पिक एंड ड्रॉप': परवेज ही वह शख्स था जो ऑपरेशन करने वाले मुख्य सर्जन डॉ. रोहित और उनकी पूरी मेडिकल टीम को मेरठ से कानपुर के आहूजा अस्पताल तक अपनी निजी गाड़ी से सुरक्षित लाता और ले जाता था।
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    अंकित करता था गाड़ियों की बुकिंग: पुलिस की जांच में एक और नाम सामने आया है— 'अंकित'। मेरठ का रहने वाला अंकित इस गिरोह के लिए लग्जरी और बिना शक वाली गाड़ियों की बुकिंग करता था, ताकि टोल प्लाजा और पुलिस चेकिंग से आसानी से बचा जा सके। परवेज ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डॉ. रोहित की टीम को अब तक 3 बार अपनी गाड़ी से कानपुर लेकर आ चुका था।
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क्या है पूरा 'किडनी कांड'? 30 मार्च को हुआ था खुलासा

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इस खौफनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़ हाल ही में 30 मार्च 2026 को हुआ था। कानपुर के केशवपुरम इलाके में स्थित आहूजा अस्पताल (Ahuja Hospital) में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा था।
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छापेमारी के दौरान यह खौफनाक सच सामने आया कि यहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की जा रही थी। पुलिस ने मौके से अहम दस्तावेज जब्त किए थे। पता चला कि मेरठ की रहने वाली एक महिला मरीज पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इस ट्रांसप्लांट के लिए दलालों के जरिए बिहार के बेगूसराय के रहने वाले एक गरीब युवक आयुष की किडनी खरीदी गई थी। आयुष को पैसों का लालच देकर कानपुर लाया गया था और फर्जी रिश्तेदार बनाकर उसकी किडनी निकाल ली गई।
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अब तक 8 लोग सलाखों के पीछे, IMA उपाध्यक्ष का नाम भी शामिल

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इस मामले ने भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) और पूरे मेडिकल जगत में भूचाल ला दिया था। पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई के चलते अब तक इस मामले में 8 रसूखदार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
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जेल भेजे गए प्रमुख आरोपी:

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    डॉ. प्रीति आहूजा (आहूजा अस्पताल की संचालिका और तत्कालीन IMA कानपुर की उपाध्यक्ष)
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    सुरजीत आहूजा (डॉ. प्रीति के पति और अस्पताल के प्रबंधक)
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    राजेश (सिंडिकेट का दलाल)
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    राम प्रकाश और अन्य चार गुर्गे। डॉ. प्रीति आहूजा जैसी प्रतिष्ठित डॉक्टर की इस रैकेट में संलिप्तता ने समाज को झकझोर कर रख दिया है।
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5 फरार डॉक्टरों की तलाश: 8 टीमें कर रही हैं ताबड़तोड़ छापेमारी

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परवेज सैफी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी जीत है, लेकिन असली 'सफेदपोश' मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि ऑपरेशन को अंजाम देने वाले डॉक्टरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर 8 विशेष टीमों का गठन किया गया है।
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ये डॉक्टर हैं पुलिस के रडार पर:

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    डॉ. रोहित (मुख्य सर्जन)
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    डॉ. वैभव
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    डॉ. अमित
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    डॉ. अफजाल (वायरल वीडियो वाला)
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  9. \r\n
    डॉ. अली
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ये सभी डॉक्टर फिलहाल अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और बिहार में इनकी लोकेशन ट्रेस कर रही हैं। परवेज से पूछताछ के बाद पुलिस को इनकी संभावित छिपने की जगहों (Hideouts) के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं।
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मेडिकेयर हॉस्पिटल के संचालकों से पूछताछ, दी गई हिदायत

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इस बड़े खुलासे के बाद कानपुर के कई अन्य अस्पताल भी जांच के घेरे में आ गए हैं। इसी कड़ी में पुलिस ने मसवानपुर स्थित मेडीकेयर हॉस्पिटल के संचालकों को भी हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की।
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कन्नौज निवासी अस्पताल संचालक रोहन और नरेंद्र को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनके अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगाले गए और संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सवाल-जवाब किए गए। हालांकि, शुरुआती पूछताछ में उनके खिलाफ सीधे तौर पर पुख्ता सबूत नहीं मिलने पर उन्हें फिलहाल छोड़ दिया गया है। लेकिन डीसीपी वेस्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है। रोहन और नरेंद्र को सख्त हिदायत दी गई है कि वे बिना पुलिस की अनुमति के शहर (कानपुर) छोड़कर नहीं जा सकते और जब भी जांच एजेंसी उन्हें बुलाएगी, उन्हें हाजिर होना पड़ेगा।
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आगे क्या? परवेज सैफी का पकड़ा जाना इस गिरोह के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। पुलिस अब उन बैंक खातों (Bank Accounts) और हवाला नेटवर्क को खंगाल रही है, जिसके जरिए 500-500 की गड्डियों का यह काला धन इधर-उधर किया जाता था। आने वाले दिनों में इस 'किडनी कांड' में कुछ और बड़े सफेदपोशों की गिरफ्तारी होने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इंसान की जिंदगी से खेलने वाले किसी भी डॉक्टर या दलाल को बख्शा नहीं जाएगा।
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