उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक, मेरठ (Meerut) की प्रतिष्ठित IIMT यूनिवर्सिटी इन दिनों एक बेहद दुखद और गंभीर विवाद के केंद्र में है। विश्वविद्यालय के सरोजनी नायडू गर्ल्स हॉस्टल (Sarojini Naidu Girls Hostel) में रहने वाली एमबीए (MBA) द्वितीय वर्ष की होनहार छात्रा अनु गुप्ता (अनु गोयल) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे कैंपस को झकझोर कर रख दिया है। एक युवा और होनहार जीवन का इस तरह खत्म होना न केवल दुखद है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।READ ALSO:-मेरठ में पुलिस का बड़ा एक्शन: आशियाना कॉलोनी में चल रही अवैध हथियारों की फैक्ट्री का भंडाफोड़, अंतरजनपदीय गिरोह के 2 शातिर तस्कर गिरफ्तार
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इस दर्दनाक घटना के बाद आक्रोशित छात्रों के भारी हंगामे और धरने के दबाव में यूनिवर्सिटी प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। छात्राओं के साथ अभद्रता करने और आधी रात को गर्ल्स हॉस्टल में घुसने के आरोप में हॉस्टल डायरेक्टर डॉ. लखविंदर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही दो महिला वार्डन पर भी गाज गिरी है। इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो इस बात की पड़ताल करेगी कि अनु की मौत आत्महत्या है या हत्या। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
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कैसे हुआ हादसा: रूम नंबर 67 और वो खौफनाक सुबह
\r\n\r\nअनु गुप्ता IIMT यूनिवर्सिटी के सरोजनी नायडू गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित रूम नंबर 67 में रहती थी। वह एमबीए (चतुर्थ सेमेस्टर) की छात्रा थी और पढ़ाई में काफी अव्वल थी।
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घटना 20 मई 2026 (बुधवार) की सुबह की है। रोजमर्रा की तरह हॉस्टल में सफाई का काम चल रहा था। सुबह करीब 9:30 बजे वहां काम करने वाली एक मेड की नजर हॉस्टल के नीचे बने जिम के बाहर पड़ी। वहां अनु का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। उसके चेहरे पर चोट के गहरे निशान थे। मेड की चीख पुकार सुनकर अन्य छात्राएं वहां पहुंचीं और तुरंत कॉलेज प्रशासन व पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
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छात्रों का आक्रोश और रात भर चला धरना प्रदर्शन
\r\n\r\nजैसे ही अनु की मौत की खबर कैंपस में फैली, यूनिवर्सिटी के छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों का आरोप था कि अनु की मौत कोई सामान्य हादसा या आत्महत्या नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की प्रताड़ना का नतीजा है।
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- \r\n बुधवार रात को सैकड़ों छात्रों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।\r\n \r\n
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- \r\n स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार सुबह 10 बजे यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) डॉ. दीपा शर्मा और सीओ सदर देहात सुधीर सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।\r\n \r\n
- \r\n छात्र नेताओं और विवि प्रशासन के बीच करीब एक घंटे तक लंबी और तीखी वार्ता हुई। आश्वासन मिलने के बाद सुबह 11:30 बजे छात्रों ने धरना समाप्त किया।\r\n \r\n
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पिता का दर्द: "मेरी बेटी को मरने के लिए मजबूर किया गया"
\r\n\r\nसहारनपुर के रहने वाले अनु के पिता ओमकार गोयल ने इस मामले में मेरठ के गंगानगर थाने में IIMT यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नामजद मुकदमा (FIR) दर्ज कराया है। अपनी पुलिस तहरीर में एक लाचार पिता ने जो लिखा है, वह किसी का भी दिल पसीजने के लिए काफी है।
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उन्होंने तहरीर में साफ तौर पर लिखा है: "मेरी बेटी पढ़ाई में काफी होनहार थी। 20 मई 2026 को हमें सूचना मिली कि उसने सुसाइड कर लिया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार उस पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा था और उसका उत्पीड़न किया जा रहा था, जिसकी वजह से मेरी बच्ची ने यह खौफनाक कदम उठाया।" पिता ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
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दीवार पर लिखा था 'HOPE': 30 हजार रुपये का वो दबाव जिसने ले ली जान!
\r\n\r\nसबसे झकझोर देने वाला पहलू तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला जांच के लिए अनु के कमरे (रूम नंबर 67) में पहुंचीं। अनु के कमरे की दीवार पर अंग्रेजी में बड़ा-बड़ा 'HOPE' (उम्मीद) लिखा हुआ था। जो लड़की अपनी दीवार पर उम्मीद लिखती हो, वह अचानक जिंदगी से कैसे निराश हो सकती है?
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छात्राओं ने डॉ. मीनाक्षी भराला को अनु की मौत की असली वजह बताई, जो सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी के सिस्टम की खामियों को उजागर करती है:
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- \r\n अनु का प्लेसमेंट चंडीगढ़ की एक अच्छी कंपनी में हो चुका था और उसे जल्द ही वहां ज्वाइन करना था।\r\n \r\n
- \r\n कंपनी में उसे अपना अटेंडेंस सर्टिफिकेट (उपस्थिति प्रमाण पत्र) सबमिट करना था।\r\n \r\n
- \r\n छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन इस सर्टिफिकेट के एवज में अनु पर 30,000 रुपये की 'अटेंडेंस फीस' जमा करने का भारी दबाव बना रहा था।\r\n \r\n
- \r\n अनु इस गैर-वाजिब फीस और दबाव के कारण कई दिनों से गहरे मानसिक तनाव (Mental Trauma) से गुजर रही थी। छात्राओं के अनुसार, उसे मानसिक रूप से टॉर्चर करके मरने के लिए उकसाया गया।\r\n \r\n
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गर्ल्स हॉस्टल में रात 2 बजे मेल डायरेक्टर की एंट्री और धमकियां
\r\n\r\nछात्रों के हंगामे के बीच IIMT यूनिवर्सिटी की ही एक अन्य छात्रा आस्था चौधरी का एक वीडियो सामने आया, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। आस्था ने वीडियो में रोते हुए बताया कि हॉस्टल में छात्राओं को किस कदर डराया-धमकाया जा रहा है।
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बुधवार देर रात (करीब 2 बजे) हॉस्टल डायरेक्टर डॉ. लखविंदर सिंह गर्ल्स हॉस्टल में घुस आए और छात्राओं के साथ अभद्रता की। जब छात्रा ने इस घटना का वीडियो बना लिया, तो डायरेक्टर ने उसे फोन कर गंभीर धमकियां दीं। छात्रा का सीधा सवाल था— "जब छात्राओं के माता-पिता तक को हॉस्टल के अंदर जाने की अनुमति नहीं है, तो एक मेल स्टाफ (पुरुष कर्मचारी) आधी रात को गर्ल्स हॉस्टल में कैसे और क्यों घुस सकता है?" इस गंभीर खुलासे और महिला आयोग की फटकार के बाद, यूनिवर्सिटी प्रशासन को झुकना पड़ा। छात्राओं से अभद्रता करने वाले हॉस्टल डायरेक्टर डॉ. लखविंदर सिंह को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया। लापरवाही बरतने के आरोप में दो महिला वार्डन— सुमन गर्ग और सुमनलता को भी जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया है।
\r\n\r\nन पीने का पानी, न कूलर, और खाने में कीड़े: महिला आयोग के सामने खुली पोल
\r\n\r\nगुरुवार शाम जब यूपी महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला ने कैंपस का निरीक्षण किया, तो छात्राओं ने उन्हें बदहाली की ऐसी तस्वीरें दिखाईं, जो किसी भी नामी यूनिवर्सिटी के लिए शर्मनाक हैं:
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- \r\n भयंकर गर्मी और बदबूदार कमरे: 40 डिग्री सेल्सियस के चिलचिलाते तापमान में हॉस्टल में कूलर की कोई व्यवस्था नहीं है। कमरों में सीलन और बदबू फैली है।\r\n \r\n
- \r\n दूषित पानी और खाना: छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। मेस के खाने में अक्सर कीड़े निकलते हैं, जिसके वीडियो भी आयोग को सौंपे गए।\r\n \r\n
- \r\n फीस वसूली: सुविधाओं के नाम पर जीरो होने के बावजूद, यूनिवर्सिटी हर साल मनमाने तरीके से हॉस्टल की फीस बढ़ा रही है। अब तक फीस में तीन गुना तक की बढ़ोतरी की जा चुकी है।\r\n \r\n
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प्रशासनिक एक्शन: जांच और मुआवजे के लिए बनीं 2 समितियां
\r\n\r\nलगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए IIMT यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार की मदद के लिए दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया है।
\r\n\r\n| \r\n समिति का नाम \r\n | \r\n \r\n मुख्य कार्य \r\n | \r\n \r\n सदस्य संख्या और विवरण \r\n | \r\n
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| \r\n जांच समिति (Inquiry Committee) \r\n | \r\n \r\n अनु की मौत (हत्या या सुसाइड) और उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच करना। \r\n | \r\n \r\n कुल 13 सदस्य: इसमें 7 सदस्य विवि प्रशासन से (चीफ प्रॉक्टर डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. मुक्ता शर्मा, डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. विनीता शुक्ला, डॉ. वत्सला तोमर, डॉ. अक्षय राज) और 6 छात्र प्रतिनिधि (आस्था चौधरी, वैष्णवी, अंशु, सौरभ, दीपांशु, ध्रुव) शामिल हैं। \r\n | \r\n
| \r\n मुआवजा समिति (Compensation Committee) \r\n | \r\n \r\n मृत छात्रा के परिवार को दी जाने वाली उचित आर्थिक सहायता राशि का निर्धारण करना। \r\n | \r\n \r\n कुलसचिव प्रो. (डॉ.) वीपी राकेश की अध्यक्षता में। इसमें भी विवि के 7 अधिकारी और 6 छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं। \r\n | \r\n
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अनु गुप्ता की मौत ने निजी शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव, छिपी हुई फीस वसूली और सुरक्षा में सेंधमारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को सतह पर ला दिया है। एक युवा छात्रा का जीवन वापस नहीं आ सकता, लेकिन 13 सदस्यीय जांच समिति और पुलिस की जांच से यह तय होना चाहिए कि इस त्रासदी के असली जिम्मेदार कौन हैं। न्याय की उम्मीद में पूरा शहर और छात्र समुदाय अब पुलिस और प्रशासन की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

Sabse pehle comment karne wale banein.