मेरठ। यह कहानी उस अपराध की नहीं है जो मेरठ की एक सड़क पर हुआ, बल्कि यह उस साहस की है जो उसी सड़क पर देखने को मिला। यह कहानी उस आरोपी की नहीं है जो आज टूटा हाथ लेकर माफी मांग रहा है, बल्कि यह उन गुमनाम नायकों की है जिन्होंने एक 14 साल की बेटी को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। किठौर में हुई यह घटना समाज के लिए एक मिसाल है कि अगर लोग चुप रहने की बजाय हिम्मत दिखाएं, तो अपराधियों के हौसले खुद-ब-खुद पस्त हो जाते हैं।READ ALSO:-मेरठ सेंट्रल मार्केट पर सुप्रीम कोर्ट का 'फाइनल काउंटडाउन', अफसरों की अटकी सांसें, आज होगी आर-पार की सुनवाई!
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3 अक्टूबर को जब आरोपी जानू एक नाबालिग लड़की को वीडियो बनाने का विरोध करने पर पीट रहा था और उसका गला दबा रहा था, तब वह शायद सोच रहा होगा कि डर के मारे कोई बीच में नहीं आएगा। लेकिन उसका सोचना गलत साबित हुआ।
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पीड़ित लड़की ने अपने बयान में बताया, "जब वह मुझे मार रहा था, तब आसपास दो-तीन लोग खड़े थे। वे लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और मुझे बचाया।" ये दो-तीन लोग सिर्फ गिनती नहीं हैं, ये वो इंसानियत की मिसाल हैं जिन्होंने तमाशबीन बनने से इनकार कर दिया। अगर उस दिन वे लोग आगे न आते, तो शायद यह घटना और भी भयावह रूप ले सकती थी। उन्हीं की हिम्मत देखकर आरोपी के हाथ कांप गए और उसे पीछे हटना पड़ा।
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इसके बाद की कहानी सबको पता है। लड़की के परिवार ने FIR दर्ज कराई, CCTV फुटेज सामने आया और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आज वह कानून की गिरफ्त में है और अपने किए की सजा भुगतेगा। समाजवादी पार्टी और भाजपा इस पर सियासत भी कर रहे हैं।
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लेकिन इस पूरी कहानी के असली नायक वही लोग हैं, जिन्होंने सबसे पहले आवाज उठाई। उन्होंने यह साबित कर दिया कि समाज की सामूहिक शक्ति के आगे बड़े से बड़ा अपराधी भी बौना हो जाता है। आज जब आरोपी जानू कैमरे पर गिड़गिड़ा रहा है, तो यह सिर्फ पुलिस के डंडे का डर नहीं है, बल्कि यह उन आम लोगों की जीत है, जिन्होंने एक बेटी की अस्मिता के लिए चुप रहने से इनकार कर दिया था।
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