नई दिल्ली: “बेटियां पराया धन होती हैं”, “जिस घर में डोली जाए, उसी घर से अर्थी उठनी चाहिए”—हमारे भारतीय समाज में बेटियों की शादी और उनके ससुराल को लेकर ये कुछ ऐसी कहावतें हैं, जो दशकों से महिलाओं के पैरों की बेड़ियां बनी हुई हैं। इन्हीं पुरानी और रूढ़िवादी सोच के कारण न जाने कितनी बेटियां अपनी पूरी जिंदगी एक 'टॉक्सिक' (जहरीले) और घुटन भरे वैवाहिक रिश्ते में गुजार देती हैं। समाज क्या कहेगा, इस डर से अक्सर माता-पिता भी अपनी बेटियों को हर जुल्म सहकर 'एडजस्ट' करने की ही नसीहत देते हैं।READ ALSO:-मेरठवासियों को मिला विकास का 'डबल तोहफा'! 13 करोड़ से शुरू हुआ बागपत रोड का चौड़ीकरण, लिसाड़ी के 25 हजार लोगों का 32 साल पुराना 'पानी' का इंतजार भी खत्म
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लेकिन, इस घिसी-पिटी और दमघोंटू मानसिकता पर एक जोरदार तमाचा जड़ते हुए, एक रिटायर्ड जज पिता ने समाज के सामने एक ऐसी ऐतिहासिक मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। इस पिता ने साबित कर दिया है कि 'तलाक' (Divorce) किसी बेटी की जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नई और आजाद जिंदगी की खूबसूरत शुरुआत हो सकता है।
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ब्लैक टी-शर्ट और ढोल-नगाड़ों से हुआ 'आजादी' का स्वागत

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यह प्रेरक मामला सोशल मीडिया के माध्यम से तब सामने आया, जब एक भव्य स्वागत का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कोई नई नवेली दुल्हन विदा होकर नहीं आ रही थी, बल्कि एक बेटी अपने पति से तलाक लेकर हमेशा के लिए अपने मायके लौट रही थी।
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तलाक के बाद बेटी की घर वापसी पर परिवार के लोग ढोल की थाप पर नाचते दिखे।

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रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी के तलाक को किसी मातम या शर्मिंदगी की तरह नहीं, बल्कि एक त्योहार की तरह मनाया। जैसे ही उनकी बेटी अपनी कार से घर के दरवाजे पर पहुंची, वहां का नजारा किसी जश्न से कम नहीं था। पिता ने खास तौर पर ढोल-नगाड़े बजवाए थे। इस जश्न को और भी खास बनाने के लिए डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा और उनके परिवार के अन्य सभी सदस्यों ने एक विशेष ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहनी हुई थी। इस काले रंग की टी-शर्ट के ठीक बीच में बड़े और चमकीले अक्षरों में लिखा था- ‘I Love My Bitiya’ (मैं अपनी बेटी से प्यार करता हूँ)।
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तलाक के बाद परिवार के सदस्य बेटी का हाथ पकड़कर खुशी-खुशी घर लेकर गए।

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परिवार के सदस्यों ने खुशी से नाचते हुए, तालियां बजाते हुए और बेटी के ऊपर गुलाब के फूलों की बारिश करते हुए उसे गले लगाया और घर के अंदर लेकर गए। बेटी के चेहरे पर भी उस घुटन भरी शादी से बाहर निकलने का सुकून और अपने परिवार का यह अभूतपूर्व समर्थन देखकर एक अलग ही चमक थी।
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क्या था पूरा मामला: 8 साल पहले 'आर्मी मेजर' से हुई थी शादी

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इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक लंबी और दर्दनाक दास्तां छिपी है। अपनी बेटी का इस तरह खुले दिल से स्वागत करने वाले पिता डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने आठ साल पहले बड़े ही अरमानों और धूमधाम के साथ अपनी इकलौती बेटी की शादी भारतीय सेना (Indian Army) के एक मेजर के साथ की थी।
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एक 'आर्मी मेजर' दामाद पाकर हर पिता को गर्व होता है, डॉ. शर्मा ने भी यही सोचा था कि उनकी बेटी हमेशा खुश रहेगी। लेकिन बंद दरवाजों के पीछे की सच्चाई कुछ और ही थी। डॉ. शर्मा ने भरे मन से लेकिन एक दृढ़ निश्चय के साथ कहा, "मेरी बेटी अपने ससुराल में बिल्कुल भी खुश नहीं थी। उसे वहां लगातार परेशान किया जाता था और मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा था।" जब पिता को यह एहसास हुआ कि उनकी लाडली बेटी जिस रिश्ते में है, वह उसके लिए एक सजा बन गया है, तो उन्होंने 'समाज क्या कहेगा' की परवाह किए बिना अपनी बेटी का हाथ थामने का फैसला किया।
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"खुश रखना मेरा फर्ज है, मुझे कोई एलिमनी नहीं चाहिए"

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आमतौर पर तलाक के मामलों में कानूनी लड़ाई, गुजारा भत्ता (Alimony) और दहेज के सामान की वापसी को लेकर सालों तक अदालतों में केस चलते रहते हैं। लेकिन एक रिटायर्ड जज होने के बावजूद, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने इन सब चीजों से ऊपर उठकर अपनी बेटी की मानसिक शांति को चुना।
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उन्होंने गर्व के साथ समाज को संदेश देते हुए कहा, "अगर मेरी बेटी अपनी शादी के बाद खुश नहीं थी, तो उसे खुश रखना मेरा पहला फर्ज है। मैंने लड़के वालों से कोई एलिमनी (तलाक के बाद मिलने वाला गुजारा भत्ता) या शादी में दिया गया कोई भी सामान वापस नहीं लिया। मुझे उनके पैसों या सामान का कोई लालच नहीं है। मेरी सबसे बड़ी दौलत मेरी बेटी है और मैं सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी को वापस अपने घर लाया हूं।"
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पिता का यह बयान सीधे तौर पर उन माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सबक है, जो झूठी शान और समाज के डर से अपनी बेटियों को एक बुरे रिश्ते में घुटने के लिए छोड़ देते हैं।
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सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है तारीफ

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इस अनोखे और दिल छू लेने वाले जश्न की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म (Instagram, X, Facebook) पर आग की तरह फैल रहे हैं। लोग इस पिता की हिम्मत, उनके खुले विचारों और बेटी के प्रति उनके अटूट प्यार की जमकर सराहना कर रहे हैं।
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नेटीजन्स (Netizens) का कहना है कि अगर देश का हर पिता डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा जैसी सोच रखने लगे, तो कोई भी बेटी ससुराल की प्रताड़ना का शिकार होकर डिप्रेशन में नहीं जाएगी या अपनी जान देने जैसा खौफनाक कदम नहीं उठाएगी। कई महिलाओं ने इस वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा है कि "काश! हर बेटी को ऐसा ही पिता नसीब हो, जो मुश्किल वक्त में ढाल बनकर खड़ा रहे।"
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खबरीलाल का नज़रिया: डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा द्वारा अपनी बेटी को दिया गया यह प्यार और सम्मान सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक 'साइलेंट रिवोल्यूशन' (शांतिपूर्ण क्रांति) है। यह उन तमाम बेटियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो सोचती हैं कि शादी टूटने के बाद उनकी जिंदगी खत्म हो गई है। तलाक एक खराब रिश्ते का अंत है, जिंदगी का नहीं। 'खबरीलाल' डॉ. शर्मा जैसे पिताओं को सलाम करता है, जो अपनी बेटियों को यह अहसास दिलाते हैं कि मायके के दरवाजे उनके लिए कभी बंद नहीं होते।
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