स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, लेकिन समाज में कुछ ऐसे सफेदपोश अपराधी भी मौजूद हैं, जिनके लिए चंद रुपयों का मुनाफा इंसानी जिंदगी से कहीं ज्यादा कीमती है। अगर आप भी अपनी त्वचा, बालों या इम्युनिटी को बेहतर बनाने के लिए बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से 'विटामिन ई' (Vitamin E) के मशहूर हरे रंग के कैप्सूल खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि असली दवा के धोखे में आप कोई नकली या बेहद कम पावर वाला साधारण सा सप्लीमेंट खा रहे हों।READ ALSO:-'एक दूल्हा, तीन दुल्हन' की वायरल शादी का पर्दाफाश! अमरोहा में व्यूज की भूख में बहनों ने रचा फर्जीवाड़ा, पुलिस जांच में कबूला सच
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) में दवाओं के नाम पर चल रहे एक ऐसे ही बड़े और खौफनाक खेल का पर्दाफाश हुआ है। मेरठ (Meerut) के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त टीम ने बागपत और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर तक फैले एक हाई-टेक नकली दवा निर्माण और पैकेजिंग रैकेट (Fake Medicine Racket) को रंगे हाथों पकड़ा है। ख़बरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि यह पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और किस तरह आम जनता को मौत के मुहाने पर धकेला जा रहा था।
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मुखबिर की सटीक सूचना और इंचौली में गुप्त छापेमारी
\r\n\r\nइस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 24 जुलाई को हुई। औषधि निरीक्षक (Drug Inspector) संतोष कुमार पटेल ने बताया कि विभाग को एक बेहद पुख्ता और गुप्त सूचना मिली थी कि मेरठ के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं की पैकिंग का अवैध कारोबार चल रहा है।
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इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल के कुशल नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खरदोनी-शेखपुर (Khardauni-Sheikhpur) स्थित एक संदिग्ध मकान की घेराबंदी कर अचानक छापेमारी की।
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अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां एक मिनी फैक्ट्री चल रही थी। छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से भारी मात्रा में अवैध सामग्री जब्त की, जिसमें शामिल हैं:
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- \r\n 6 लाख (6,00,000) विटामिन-ई के खुले कैप्सूल\r\n \r\n
- \r\n अत्याधुनिक ब्लिस्टर पैकिंग मशीन (Blister Packing Machine)\r\n \r\n
- \r\n भारी-भरकम कंप्रेसर मशीन और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले अन्य तकनीकी उपकरण।\r\n \r\n
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क्या था 'ऑपरेशन' का तरीका (Modus Operandi)? 3 जिलों का खौफनाक नेक्सस
\r\n\r\nइस रैकेट की जड़ें केवल मेरठ तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इसके तार बागपत (Baghpat) और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड (Uttarakhand) से भी गहराई से जुड़े हुए थे। जांच के दौरान एफडीए की टीम ने इस सिंडिकेट की सप्लाई चेन को पूरी तरह से डिकोड कर लिया है।
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1. बागपत (उत्पादन का अड्डा): कहानी शुरू होती है बागपत जिले के खेकड़ा क्षेत्र से। यहां स्थित 'प्रेसकाट फार्म जेल प्राइवेट लिमिटेड' (Prescot Farm Gel Pvt. Ltd.) नाम की कंपनी को सरकार द्वारा केवल फूड हेल्थ सप्लीमेंट (Food Supplement) एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स श्रेणी के उत्पादों के निर्माण का लाइसेंस दिया गया था। लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, यह कंपनी केवल 10 एमजी (10mg) वाले साधारण विटामिन-ई कैप्सूल का निर्माण कर सकती थी, जिसे दवा नहीं बल्कि आहार पूरक माना जाता है। लेकिन कंपनी ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए छह लाख बिना पैकिंग वाले खुले कैप्सूल अवैध रूप से थोक में बेच दिए।
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2. उत्तराखंड (फर्जी बिलिंग का खेल): यह कच्चा माल सीधे मेरठ नहीं आया। पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड) स्थित 'आरएस ग्लोबल फार्म' (RS Global Farm) का इस्तेमाल किया गया। इन कैप्सूलों की फर्जी बिलिंग इसी आरएस ग्लोबल फार्म के संचालकों की मिलीभगत से की गई, ताकि कागजों पर सब कुछ कानूनी लगे।
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3. मेरठ (पैकेजिंग और ब्रांडिंग का मुख्य केंद्र): अंत में, ये लाखों कैप्सूल मेरठ के इंचौली स्थित खरदौनी गांव में लाए गए। यहां मुख्य आरोपित विकास चौहान अपनी मशीनरी के साथ तैयार बैठा था। बागपत से आए 10 एमजी (10mg) के इन मामूली कैप्सूलों को, बिना किसी सुरक्षा मानक के, अवैध रूप से प्रोसेस किया गया और देश की सबसे प्रसिद्ध फार्मास्युटिकल कंपनियों में से एक के ब्रांड 'एवियन 400 एमजी सॉफ्ट जेल कैप्सूल' (Evion 400mg) की हूबहू नकल वाली पन्नियों में पैक कर दिया गया।
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मरीजों की जान से कैसे हो रहा था खिलवाड़?
\r\n\r\nयह सिर्फ एक कॉपीराइट या ब्रांडिंग का मामला नहीं है; यह सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर अपराध है। डॉक्टर मरीजों को उनकी बीमारी की गंभीरता के हिसाब से 400 एमजी की हाई-डोज़ दवा (Allopathic Medicine) लिखते हैं। लेकिन जब मरीज 400 एमजी की उम्मीद में 10 एमजी का फूड सप्लीमेंट खाता है, तो उसे बीमारी में कोई लाभ नहीं मिलता। गंभीर स्थितियों में सही डोज़ न मिलने के कारण मरीज की जान भी जा सकती है। यह फूड सेफ्टी लाइसेंस (Food Safety License) की आड़ में चल रहा एक विशुद्ध 'मौत का व्यापार' था।
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4 नामजद आरोपितों पर FIR दर्ज, तलाश में जुटी पुलिस
\r\n\r\nलाखों लोगों की जिंदगी से खेलने वाले इस जघन्य अपराध को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। औषधि निरीक्षक की तहरीर पर मेरठ के इंचौली थाने (Inchauli Police Station) में सुसंगत और गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। एफआईआर (FIR) में निम्नलिखित चार लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है:
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- \r\n विकास चौहान: (निवासी खरदौनी, मेरठ) - इसी के मकान में नकली पैकिंग का मुख्य काम हो रहा था।\r\n \r\n
- \r\n राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण कुंडा: (निवासी खरदौनी, मेरठ) - विकास चौहान का मुख्य सहयोगी और ऑपरेटर।\r\n \r\n
- \r\n रोहित कुमार: (निवासी रुद्रपुर, उत्तराखंड) - आरएस ग्लोबल फार्म का प्रोपराइटर, जो फर्जी बिलिंग में शामिल था।\r\n \r\n
- \r\n अमृत पटेल: (बागपत) - प्रेसकाट फार्म जेल प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक और उत्तरदायी व्यक्ति, जिसने अवैध रूप से माल सप्लाई किया।\r\n \r\n
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आगे क्या? (जांच अभी बाकी है)
\r\n\r\nवर्तमान में चारों नामजद आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर (फरार) हैं। मेरठ पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन कर दिया है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
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औषधि निरीक्षक संतोष कुमार पटेल ने स्पष्ट किया है कि नकली दवाएं बनाने का यह काला खेल काफी लंबे समय से धड़ल्ले से चल रहा था। शुरुआती जांच में यह केवल 'टिप ऑफ द आइसबर्ग' (Tip of the iceberg) लग रहा है। विभाग को पूरा अंदेशा है कि जब मुख्य आरोपी गिरफ्तार होंगे और उनसे सख्ती से पूछताछ की जाएगी, तो मेरठ और आसपास के जिलों के कई बड़े मेडिकल स्टोर संचालकों, सफेदपोश डिस्ट्रीब्यूटर्स और दलालों के नाम भी बेनकाब होंगे।
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ख़बरीलाल की विशेष अपील: आम जनता से भी यह अपील है कि कोई भी दवा खरीदते समय हमेशा पक्का बिल (Invoice) जरूर मांगें। यदि आपको दवा की पैकिंग, उसके रंग या क्यूआर कोड (QR Code) पर जरा सा भी संदेह हो, तो तुरंत अपने जिले के औषधि निरीक्षक या पुलिस को सूचित करें। आपकी सतर्कता से न केवल आपकी बल्कि कई अन्य लोगों की जान बच सकती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.