मेरठ: दोस्ती के रिश्ते को तार-तार कर देने वाली एक खौफनाक वारदात में मेरठ पुलिस ने विजय हत्याकांड का खुलासा कर दिया है. विजय की बेरहमी से हत्या करने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसका ही दोस्त निर्दोष निकला. मामूली कहासुनी और तीन महीने पुरानी रंजिश के चलते निर्दोष ने अपने दोस्त का चॉपर से गला रेत दिया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है.READ ALSO:-3 मिनट की देरी और खत्म हो जाती जिंदगी! भतीजी की चीख, सिपाही की लात... मेरठ में सुसाइड का LIVE DRAMA, दरवाजा टूटा और...
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
श्मशान घाट के पास मिली थी खून से लथपथ लाश
\r\n\r\n
बुधवार, 1 अक्टूबर की सुबह मवाना थाना क्षेत्र के बेरियों वाले श्मशान घाट के पास उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोगों ने आम के बाग में एक युवक की खून से सनी लाश देखी. मृतक का गला आधे से ज्यादा कटा हुआ था और चेहरे पर भी गहरे घाव थे. सूचना मिलते ही मवाना पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची. मृतक की पहचान विजय के रूप में हुई, जिसका आपराधिक इतिहास भी था.
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
कैसे कातिल तक पहुंची पुलिस?
\r\n\r\n
पुलिस ने जांच शुरू की और सबसे पहले विजय के करीबियों से पूछताछ की. जांच में सामने आया कि 30 सितंबर की रात को विजय को आखिरी बार उसके दोस्त निर्दोष के साथ देखा गया था. पुलिस ने जब निर्दोष को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और पूरी कहानी बयां कर दी.
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
शराब, कहासुनी और खूनी अंत
\r\n\r\n
आरोपी निर्दोष ने पुलिस को बताया कि 30 सितंबर की रात वह और विजय साथ बैठकर शराब पी रहे थे. इसी दौरान उनके बीच किसी पुरानी बात को लेकर कहासुनी हो गई. विवाद इतना बढ़ा कि निर्दोष ने अपना आपा खो दिया और पास रखे चॉपर से विजय के गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद वह मौके से फरार हो गया.
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
तीन महीने से सुलग रही थी बदले की आग
\r\n\r\n
एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, हत्या की असली वजह तीन महीने पुरानी एक रंजिश थी. करीब तीन महीने पहले भी एक शराब पार्टी के दौरान विजय और निर्दोष में जमकर झगड़ा हुआ था. उसी दिन से निर्दोष, विजय से बदला लेने की फिराक में था. 30 सितंबर की रात उसे मौका मिला और उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया.
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दिलचस्प बात यह है कि मृतक विजय खुद भी एक हत्या का आरोपी था. वह एक साधु की त्रिशूल से हत्या करने के मामले में पांच साल जेल में रहा था और कुछ समय पहले ही जमानत पर बाहर आया था.
विज्ञापन
विज्ञापन