Chandrashekhar Azad Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। दलित छात्रा ललिता गौतम की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद परिजनों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज के विरोध में सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ जा रहे थे। इसी दौरान शुक्रवार दोपहर 12 बजे सिवाया टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। (Internal link to related article) पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद चंद्रशेखर आजाद वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए, जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।READ ALSO:-यूपी में मानसून का प्रहार: 48 घंटे में 12 की मौत, नजीबाबाद में ऐतिहासिक बारिश से डूबे शहर, 13 जिलों में घोषित हुआ अवकाश
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सिवाया टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग

\r\n\r\n
शुक्रवार दोपहर को जब नवनिर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आजाद अपने समर्थकों के साथ मेरठ की ओर बढ़ रहे थे, तो प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। सिवाया टोल प्लाजा पर पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर दी थी और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 400 से ज्यादा पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। चंद्रशेखर आजाद के काफिले में पूर्व एडीजी (ADG) प्रेम प्रकाश और लगभग 300 से अधिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। जैसे ही उनका काफिला सिवाया टोल प्लाजा पर पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से साफ मना कर दिया। पुलिस अधिकारियों का तर्क था कि उनके वहां जाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

सड़क पर बैठे चंद्रशेखर आजाद, पुलिस से तीखी नोकझोंक

\r\n\r\n
जब पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद को आगे जाने से रोका, तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि "वहां जाने से माहौल खराब हो सकता है," लेकिन सांसद अपनी जिद पर अड़े रहे। उन्होंने पुलिस से स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम वहां जाकर ही रहेंगे।" (External link: source URL) जब पुलिस ने बैरिकेड्स नहीं हटाए, तो चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद टोल प्लाजा पर काफी देर तक गहमागहमी और नारेबाजी का दौर चलता रहा। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

परिवार को टोल प्लाजा पर बुलाने पर बनी सहमति

\r\n\r\n
करीब एक घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और बातचीत के बाद, पुलिस अधिकारियों ने सांसद चंद्रशेखर आजाद के सामने एक प्रस्ताव रखा। पुलिस ने कहा कि वे सुरक्षा कारणों से उन्हें गांव या घटनास्थल तक नहीं जाने दे सकते, लेकिन वे ललिता गौतम के परिवार को स्वयं सिवाया टोल प्लाजा पर ही ले आएंगे। काफी विचार-विमर्श के बाद चंद्रशेखर आजाद इस बात के लिए राजी हो गए कि वह पीड़ित परिवार से वहीं मुलाकात करेंगे। इसके बाद पुलिस की एक टीम ललिता के परिवार को सिवाया टोल प्लाजा लाने के लिए रवाना हुई। यह घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे प्रशासन (Chandrashekhar Azad Meerut) मामले को शांत करने के लिए दबाव में आ गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कौन हैं ललिता गौतम? क्या है पूरा मामला?

\r\n\r\n
यह पूरा विवाद मेरठ की एक दलित छात्रा ललिता गौतम की मौत से जुड़ा है। ललिता गौतम बीए (BA) की छात्रा थी। बीते 15 मई को वह अपनी परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन परीक्षा देने के बाद वह घर वापस नहीं लौटी। परिवार वालों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। दो दिन बाद, 17 मई को ललिता का शव रहस्यमयी परिस्थितियों में एक गन्ने के खेत से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। (परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया गया और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या कर शव को गन्ने के खेत में फेंक दिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस इस मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

परिजनों के प्रदर्शन पर SSP का थप्पड़ और लाठीचार्ज

\r\n\r\n
ललिता गौतम की मौत के बाद न्याय की गुहार लगाते हुए परिजनों और स्थानीय लोगों ने कलेक्ट्रेट के बाहर भारी प्रदर्शन किया था। उनका मुख्य आरोप था कि पुलिस हत्यारों को बचाने का प्रयास कर रही है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखकर मेरठ के एसएसपी (SSP) अविनाश पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एसएसपी ने अपना आपा खो दिया और न्याय मांग रहे परिजनों और प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ जड़ दिए। इस घटना ने आग में घी का काम किया। इसके तुरंत बाद, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं और उन्हें वहां से खदेड़ दिया। पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद दलित समाज में भारी आक्रोश फैल गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल

\r\n\r\n
मेरठ की इस घटना ने उत्तर प्रदेश पुलिस की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां एक गरीब दलित परिवार अपनी बेटी की हत्या (Chandrashekhar Azad Meerut) का न्याय मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें सांत्वना देने के बजाय उन पर लाठियां भांजी जा रही हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। पुलिस का यह रवैया न केवल अमानवीय है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन माना जा रहा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर एसएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा थप्पड़ मारना पुलिस महकमे की छवि को धूमिल कर रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चंद्रशेखर आजाद का हस्तक्षेप और राजनीतिक प्रभाव
\r\n\r\n
नवनिर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आजाद हमेशा से दलितों और शोषितों की आवाज उठाते रहे हैं। ललिता गौतम के परिवार पर हुए लाठीचार्ज की खबर मिलते ही उनका मेरठ कूच करना इसी रणनीति का हिस्सा है। उनके इस कदम से राज्य सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है। चंद्रशेखर आजाद की मांग है कि ललिता गौतम के हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो, और पीड़ित परिवार पर लाठीचार्ज करने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय व अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ललिता गौतम हत्याकांड और उसके बाद परिजनों पर हुआ पुलिसिया कहर, प्रशासन की एक बड़ी नाकामी को दर्शाता है। Chandrashekhar Azad Meerut प्रकरण ने इस मामले को अब एक राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना दिया है। न्याय की उम्मीद में बैठे परिवार को लाठियां मिलना लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सांसद चंद्रशेखर आजाद के धरने और परिवार से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और मेरठ प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं। दोषियों को सजा और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई ही इस उबलते हुए आक्रोश को शांत कर सकती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम की संदिग्ध मौत और परिजनों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सांसद चंद्रशेखर आजाद को शुक्रवार को सिवाया टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल ने रोक दिया। रोकने पर चंद्रशेखर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। बाद में पुलिस की मध्यस्थता से तय हुआ कि पीड़ित परिवार को टोल प्लाजा पर ही लाकर सांसद से मिलवाया जाएगा। परिजनों का आरोप है कि छात्रा का गैंगरेप कर हत्या की गई और न्याय मांगने पर पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाईं।
विज्ञापन
विज्ञापन