मेरठ (Meerut News): भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। शहर के नौचंदी थाना क्षेत्र स्थित सूरजकुंड में सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की डिस्पेंसरी और एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ के दफ्तर पर पड़ी सीबीआई की रेड ने पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। करीब 19 घंटे तक चले इस मैराथन सर्च ऑपरेशन के बाद सीबीआई की टीम ने CGHS की एडिशनल डायरेक्टर (स्वास्थ्य) डॉ. नताशा वर्मा और उनके निजी सुरक्षा गार्ड (सिक्योरिटी गार्ड) सनी सिंह को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-मेरठ मर्डर मिस्ट्री: बेडरूम में खून से लथपथ मिली 26 वर्षीय पत्नी की लाश, 6 साल की मासूम ने बताई 'काले कपड़े वाले' कातिल की खौफनाक दास्तान
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आरोप है कि एक कर्मचारी का ट्रांसफर रुकवाने की एवज में 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, जिसका सौदा 50 हजार रुपये में तय हुआ था। सीबीआई ने पूरी प्लानिंग के साथ जाल बिछाया और गार्ड को रंगेहाथों दबोच लिया, जिसके बाद सीधे तौर पर एडिशनल डायरेक्टर की संलिप्तता भी सामने आ गई। टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ गाजियाबाद ले गई है, जहां उन्हें 24 घंटे के भीतर सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस 19 घंटे की सर्जिकल स्ट्राइक और रिश्वतखोरी के इस पूरे खेल की इनसाइड स्टोरी।
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गुरुवार की शाम: जब सफेद गाड़ियों ने डिस्पेंसरी में मारी एंट्री
\r\n\r\nयह पूरा घटनाक्रम गुरुवार शाम का है। सूरजकुंड स्थित CGHS डिस्पेंसरी में रोजमर्रा का काम चल रहा था। कर्मचारी अपने-अपने काम में व्यस्त थे और मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक दो सफेद रंग की गाड़ियां डिस्पेंसरी के मुख्य द्वार से तेजी से अंदर दाखिल हुईं।
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अंदर पहुंचते ही गाड़ियों से कुछ तेजतर्रार अधिकारी उतरे और बिना कोई समय गंवाए सीधे एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नताशा वर्मा के दफ्तर का रुख किया। किसी को कुछ समझ आता, इससे पहले ही टीम के कुछ सदस्यों ने डिस्पेंसरी का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
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दफ्तर में मची खलबली, अंदर ही कैद हो गया पूरा स्टाफ
\r\n\r\nशुरुआती कुछ मिनटों तक तो डिस्पेंसरी में मौजूद स्टाफ और मरीजों को लगा कि शायद कोई रूटीन निरीक्षण (Inspection) है। लेकिन जैसे ही टीम ने एडिशनल डायरेक्टर के दफ्तर को अपने कब्जे में लिया और कड़े तेवर दिखाए, वहां खलबली मच गई। खबर आग की तरह फैल गई कि दफ्तर पर सीबीआई (CBI) का छापा पड़ा है।
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सीबीआई की टीम ने आते ही सबसे पहला काम यह किया कि वहां मौजूद अन्य विभागों के स्टाफ और कर्मचारियों को बाहर निकलने से रोक दिया। टीम ने सभी से अपनी-अपनी जगह पर बैठे रहने और जांच में सहयोग करने की अपील की। नतीजा यह हुआ कि कई घंटों तक पूरा स्टाफ डिस्पेंसरी के अंदर ही नजरबंद रहा। जब देर रात तक कर्मचारी घर नहीं पहुंचे, तो उनके परेशान परिजन उन्हें ढूंढते हुए डिस्पेंसरी के गेट तक आ पहुंचे, लेकिन सुरक्षा कारणों से किसी को भी अंदर जाने या बाहर आने की इजाजत नहीं दी गई।
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रात भर दौड़ती रहीं गाड़ियां: घरों तक पहुंचा सर्च ऑपरेशन
\r\n\r\nसीबीआई की यह कार्रवाई सिर्फ दफ्तर तक सीमित नहीं रही। कुल तीन गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची सीबीआई टीम पूरी रात एक्शन मोड में रही। रात भर ये तीनों गाड़ियां मेरठ की सड़कों पर दौड़ती रहीं।
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टीम ने दफ्तर के दस्तावेजों को तो खंगाला ही, साथ ही डॉ. नताशा वर्मा और उनके निजी सिक्योरिटी गार्ड सनी सिंह के आवासों पर भी सघन तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया गया। वहां से भी कई अहम दस्तावेज, बैंक पासबुक और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की खबर है। रात भर चली इस मैराथन छानबीन के बाद, शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे टीम दोनों आरोपियों को लेकर वापस दफ्तर आई और गिरफ्तारी की कागजी प्रक्रिया को पूरा किया।
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ट्रांसफर का खेल और 80 हजार की डिमांड: ऐसे खुला राज
\r\n\r\nइस पूरी कार्रवाई के पीछे की कहानी विभाग के अंदर से ही शुरू हुई थी। सूत्रों के अनुसार, जब डॉ. नताशा वर्मा ने मेरठ CGHS में एडिशनल डायरेक्टर का चार्ज संभाला था, उसके कुछ समय बाद ही उन्होंने एक कर्मचारी का तबादला (Transfer) मुरादाबाद कर दिया था।
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कर्मचारी अपना ट्रांसफर रुकवाना चाहता था। आरोप है कि इसके लिए उससे 80,000 रुपये की रिश्वत की मांग की गई। काफी मिन्नतों और मोलभाव के बाद 50,000 रुपये में बात तय हो गई। लेकिन वह कर्मचारी इस भ्रष्टाचार के आगे झुकने को तैयार नहीं था। परेशान होकर उसने इस पूरी घूसखोरी की शिकायत सीधे दिल्ली सीबीआई (CBI) मुख्यालय में कर दी। सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन किया और जाल बिछाने की योजना तैयार कर ली।
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कार में ली जा रही थी 50 हजार की रिश्वत, रंगेहाथों दबोचा गया गार्ड
\r\n\r\nसीबीआई की छानबीन में यह बात सामने आई कि डॉ. नताशा वर्मा सीधे तौर पर पैसे नहीं लेती थीं, बल्कि इस काम के लिए उन्होंने अपने भरोसेमंद निजी सुरक्षा गार्ड सनी सिंह को जिम्मेदारी दी हुई थी।
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योजना के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता कर्मचारी केमिकल लगे हुए 50 हजार रुपये के नोट लेकर पहुंचा, तो गार्ड सनी सिंह ने उसे अपनी कार के पास बुलाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने कार में बैठे सनी को 50 हजार रुपये थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में आस-पास मुस्तैद सीबीआई की टीम ने झपट्टा मारकर सनी सिंह को दबोच लिया। हाथ धुलवाते ही केमिकल का रंग लाल हो गया, जो रंगेहाथ रिश्वत लेने का सबसे बड़ा सबूत था।
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गार्ड ने उगला सच, नपीं एडिशनल डायरेक्टर
\r\n\r\nसीबीआई की गिरफ्त में आते ही गार्ड सनी सिंह के पसीने छूट गए। सख्ती से पूछताछ होने पर उसने तुरंत टूटते हुए सच उगल दिया और सीधे डॉ. नताशा वर्मा का नाम ले लिया। सनी ने कुबूल किया कि वह यह रकम एडिशनल डायरेक्टर के कहने पर ही ले रहा था। इसके बाद सीबीआई ने डॉ. नताशा को भी उनके दफ्तर से हिरासत में ले लिया और दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे टीम दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत (CBI Court) में पेश करने के लिए रवाना हो गई।
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9 महीने में दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक: भ्रष्टाचार का अड्डा बना CGHS!
\r\n\r\nमेरठ की इस CGHS डिस्पेंसरी का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। यह महज 9 महीने के अंदर सीबीआई की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 12 अगस्त 2025 की रात को भी सीबीआई ने बिल्कुल इसी अंदाज में यहां छापा मारा था।
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उस समय तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर डॉ. अजय कुमार और कार्यालय अधीक्षक (Office Superintendent) लवेश सोलंकी को गिरफ्तार किया गया था। उन दोनों पर एक बिल पास करने की एवज में 5 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगने का आरोप था। उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह साफ हो गया है कि स्वास्थ्य विभाग के इस दफ्तर में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।
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फिलहाल, इस ताज़ा गिरफ्तारी ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में पेशी के बाद क्या डॉ. नताशा वर्मा की रिमांड ली जाती है, और पूछताछ में इस रैकेट से जुड़े और कितने सफेदपोश चेहरों के नाम बेनकाब होते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.