मेरठ (Meerut News Today): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ पुलिस का 'ऑपरेशन लंगड़ा' और 'ऑपरेशन क्लीन' बदस्तूर जारी है। मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर अमल करते हुए यूपी एसटीएफ (UP STF) अपराधियों के लिए काल साबित हो रही है। इसी कड़ी में एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। बुधवार तड़के एसटीएफ ने मेरठ में एक खौफनाक मुठभेड़ के दौरान एक लाख रुपये के इनामी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के शिक्षक दानिश अली की निर्मम हत्या के मुख्य आरोपी जुबैर को मार गिराया है।READ ALSO:-बिजनौर में बड़ी साजिश: रात के अंधेरे में बाबा साहेब की मूर्ति खंडित, सुबह भड़के ग्रामीण, छावनी में तब्दील हुआ पूरा गांव
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जुबैर कोई आम अपराधी नहीं था, बल्कि वह खूंखार 'मुनीर गैंग' (Muneer Gang) का एक खतरनाक गुर्गा था, जिसके नाम से ही लोग खौफ खाते थे। यह एनकाउंटर (Meerut Encounter) उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि जुबैर पुलिस महकमे के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था। आइए इस पूरे एनकाउंटर की कहानी और जुबैर की खौफनाक क्राइम हिस्ट्री को विस्तार से जानते हैं।
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मेरठ में किसी की जान लेने आया था जुबैर
\r\n\r\nएसटीएफ एसपी (प्रभारी, मेरठ यूनिट) बृजेश कुमार सिंह ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को अपने खुफिया तंत्र और मुखबिरों से एक बेहद अहम सूचना मिली थी। एसटीएफ को पुख्ता इनपुट मिला था कि एक लाख का इनामी जुबैर मेरठ शहर में मौजूद है। सूचना यह भी थी कि जुबैर यहां छिपने नहीं, बल्कि शहर में किसी बड़ी वारदात (हत्या) को अंजाम देने के नापाक इरादे से आया था। वह अपने अन्य खतरनाक साथियों का इंतजार कर रहा था और शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर अलीपुर थाना क्षेत्र (Alipur Police Station) में स्थित एक वीरान और बंद पड़ी फैक्ट्री को उसने अपना ठिकाना बनाया हुआ था।
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रात के अंधेरे में घेराबंदी और 36 राउंड की खौफनाक फायरिंग
\r\n\r\nपक्की सूचना मिलते ही एसटीएफ की टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की। बुधवार तड़के लगभग 4 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा था, एसटीएफ के जांबाज कमांडो ने उस बंद फैक्ट्री की घेराबंदी शुरू कर दी। एसटीएफ ने जुबैर को चारों तरफ से घेर लिया और उसे सरेंडर (Surrender) करने की सख्त चेतावनी दी।
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लेकिन, खुद को पुलिस के मजबूत घेरे में फंसा देख जुबैर ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपने हथियारों से पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। उसने पुलिस का घेरा तोड़ने की भरपूर कोशिश की। इसके बाद एसटीएफ (UP STF) ने भी आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई में फायरिंग की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों तरफ से भीषण गोलाबारी हुई। इस मुठभेड़ में कुल 36 राउंड गोलियां चलीं, जिनमें से 20 राउंड फायरिंग अकेले इस खूंखार बदमाश जुबैर ने की। एसटीएफ की सटीक जवाबी फायरिंग में जुबैर के सीने और पेट में गोलियां लगीं और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस उसे तुरंत गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर दौड़ी, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से एसटीएफ ने एक तेज रफ्तार बाइक, 32 बोर की दो अवैध पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
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कौन था जुबैर? 11 साल में 24 जघन्य मुकदमों का इतिहास
\r\n\r\nजुबैर की क्राइम कुंडली बेहद खौफनाक रही है। मूल रूप से वह अलीगढ़ के थाना बरला क्षेत्र के नौशा गांव का निवासी था। हालांकि, फरारी के दौरान वह दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में अपना भेष और ठिकाना बदलकर रह रहा था।
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जुबैर ने साल 2015 में अपराध की काली दुनिया में अपना पहला कदम रखा था। जरायम की दुनिया में तेजी से नाम कमाने की चाहत में वह साल 2017 में कुख्यात मुनीर गैंग से जुड़ गया। मुनीर के साथ रहकर उसने हत्या, लूट और रंगदारी के कई गुर सीखे। बाद में जुबैर ने अपना खुद का एक खौफनाक गैंग तैयार कर लिया और अवैध हथियारों की तस्करी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जुबैर के खिलाफ दिल्ली और अलीगढ़ के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में 24 से अधिक मुकदमे दर्ज थे।
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AMU टीचर को मारी थीं 5 गोलियां: मुखबिरी के शक में लिया था इंतकाम
\r\n\r\nयूपी पुलिस जुबैर की सरगर्मी से तलाश 24 दिसंबर 2025 को हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात के बाद से कर रही थी। उस मनहूस रात करीब 8:45 बजे, AMU के एबीके बॉयल स्कूल में कंप्यूटर टीचर के पद पर तैनात राव दानिश अली अपने कुछ दोस्तों के साथ कैनेडी हॉल पार्क में टहल रहे थे।
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तभी मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन के पास स्कूटी सवार नकाबपोश जुबैर ने उन्हें रोका। जुबैर ने दानिश की आंखों में आंखें डालकर खौफनाक अंदाज में कहा, "अब तो पहचानोगे, मैं कौन हूं।" इतना कहते ही इससे पहले कि दानिश कुछ समझ पाते, जुबैर ने अपनी पिस्टल से उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। दानिश के सिर और शरीर में 5 गोलियां लगीं। उनके भाई फराज अली उन्हें तुरंत लहूलुहान हालत में मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक दानिश दम तोड़ चुके थे।
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पुलिस की गहन जांच में हत्या का जो मकसद सामने आया, वह और भी चौंकाने वाला था। दरअसल, साल 2018 में शाहबेज नाम के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी, जिसे जुबैर ने अपने भाइयों यासिर और फहद के साथ मिलकर अंजाम दिया था। उस मामले में जुबैर को 7 साल की कड़ी सजा हुई थी। जुबैर के मन में यह शक बैठ गया था कि दानिश अली ने ही पुलिस को उसके खिलाफ मुखबिरी की थी। इसी शक और इंतकाम की आग में जलते हुए उसने जेल से बाहर आने के बाद दानिश की इतनी बेहरमी से हत्या कर दी। इस हत्याकांड के बाद ही उस पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था।
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'द किलिंग मशीन' मुनीर गैंग का खौफनाक इतिहास
\r\n\r\nजुबैर जिस गैंग से ताल्लुक रखता था, उसका सरगना मुनीर था। मुनीर बिजनौर का रहने वाला था और जुर्म की दुनिया में उसे 'द किलिंग मशीन' (The Killing Machine) के नाम से जाना जाता था। 2009-10 में एएमयू (AMU) में दाखिला लेने के बाद मुनीर ने अपराध का रास्ता चुना और 'द किलिंग मशीन ए गैंग' बनाया।
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मुनीर ने 2 अप्रैल 2016 को बिजनौर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के तेजतर्रार डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया था। इससे पहले 2015 में उसने रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या कर पिस्टल लूटी थी और एएमयू कैंपस में छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या की थी। तंजील अहमद हत्याकांड में मुनीर को फांसी की सजा हुई थी, लेकिन 20 नवंबर 2022 को बीएचयू अस्पताल में बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई थी। जुबैर उसी खूंखार विरासत को आगे बढ़ा रहा था।
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यूपी में 3 दिन में 4 खूंखार बदमाश ढेर
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में अपराधियों का सफाया तेजी से हो रहा है। महज तीन दिनों के भीतर यूपी पुलिस के एनकाउंटर (UP Police Encounter) में चार दुर्दांत बदमाश ढेर हो चुके हैं। जुबैर से पहले, सोमवार रात चंदौली में पुलिस ने मात्र 26 घंटे के भीतर हत्या की वारदात को अंजाम देने वाले साइको किलर गुरप्रीत सिंह को मार गिराया था। इसके अलावा, मंगलवार देर रात गाजियाबाद में कैश वैन से 27 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट करने वाले दो बदमाशों—समीर और जुबैर—को भी पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। मेरठ में एसटीएफ के इस हालिया एक्शन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में अब अपराध और अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।
Sabse pehle comment karne wale banein.