मेरठ, उत्तर प्रदेश — पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करने की 50 साल पुरानी मांग शनिवार को एक बड़े 'जन आंदोलन' में बदल गई। केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले पश्चिमी यूपी के सभी 22 जिलों के वकीलों ने एक साथ 'न्यायिक बहिष्कार' किया और सड़कों पर उतरकर सरकार पर दबाव बनाया।READ ALSO:-Meerut: हाईकोर्ट बेंच की मांग के समर्थन में उतरा बेगमपुल व्यापार संघ, 20 सितंबर को 2 घंटे घेरेंगे बेगमपुल चौराहा
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22 जिलों में एक साथ 'न्यायिक बहिष्कार'
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अधिवक्ताओं के इस आंदोलन में सभी जनपदों में अदालती कामकाज ठप रहा। वकीलों के साथ-साथ व्यापारियों, किसानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मुहिम का समर्थन किया। मेरठ में विरोध प्रदर्शन सबसे बड़ा था, जहाँ सुबह साढ़े दस बजे कचहरी से बेगमपुल तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। मार्च में हजारों की संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। बेगमपुल चौराहे पर मानव श्रृंखला बनाकर वकीलों ने दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया।
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संघर्ष समिति के चेयरमैन संजय शर्मा और संयोजक राजेंद्र सिंह राणा ने दावा किया कि इस आंदोलन को भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है।
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क्यों जरूरी है हाई कोर्ट बेंच?
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पश्चिमी यूपी के लोगों को न्याय के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट तक सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। यह यात्रा न केवल महंगी होती है, बल्कि इसमें बहुत समय भी बर्बाद होता है। वकीलों का तर्क है कि इससे मुवक्किलों को समय पर और सस्ता न्याय नहीं मिल पाता है। पिछले 50 सालों में लाखों मामले लंबित हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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अधिवक्ताओं ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर का उदाहरण भी दिया, जहां केवल 4 जिलों की आबादी के लिए एक बेंच का गठन किया गया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करोड़ों जनता को अभी भी न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
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पीएम से मिलने की तैयारी
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संघर्ष समिति ने यह भी ऐलान किया है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 सितंबर को मेरठ मेट्रो के उद्घाटन के लिए आते हैं, तो वे उनसे मिलकर बेंच की मांग करेंगे। यह कदम सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
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संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में बेंच का विरोध केवल प्रयागराज के कुछ अधिवक्ता कर रहे हैं, जबकि पूर्वांचल समेत राज्य के अन्य हिस्सों में भी लोग अपनी-अपनी बेंच की मांग कर रहे हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आंदोलन का समर्थन भी कर रहे हैं।
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