न्यूज़ डेस्क, मथुरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर आज सुबह कोहरे ने ऐसा कहर बरपाया कि देखने वालों की रूह कांप गई। घने कोहरे (Dense Fog) और बेहद कम विजिबिलिटी के चलते एक्सप्रेस-वे के माइलस्टोन 127 (थाना बलदेव क्षेत्र) पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यहां रफ्तार और धुंध के जानलेवा कॉम्बिनेशन ने 7 बसों और 3 कारों को आपस में भिड़ा दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि देखते ही देखते गाड़ियां आग का गोला बन गईं। इस हृदयविदारक घटना में 4 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।READ ALSO:-कोहरे का 'रेड अलर्ट': दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरना हुआ मना, स्पीड लिमिट घटाकर 60 किमी/घंटा की गई; 15 फरवरी तक सख्ती
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ग्राउंड जीरो: मंजर ऐसा कि पत्थर दिल भी पिघल जाए
\r\n\r\nजब भास्कर की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का दृश्य विचलित कर देने वाला था। गाड़ियां पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थीं। लोहे के मलबे में अभी भी इंसानी शरीर के अंग फंसे हुए दिखाई दे रहे थे, जो इस हादसे की भयावहता को बयां करने के लिए काफी थे। वहां मौजूद एक युवक ने रोते हुए बताया कि उसने अपनी आंखों के सामने लोगों को जलते हुए देखा और खुद बस से 8-9 अधजले शवों को बाहर निकाला।
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क्या हुआ था उस वक्त? चश्मदीदों की जुबानी
\r\n\r\nहादसे के वक्त गोंडा से दिल्ली जा रही यात्री शालिनी उस खौफनाक पल को याद कर सिहर उठती हैं। उन्होंने बताया, "मैं गहरी नींद में थी। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई बम फटा हो। आंख खुली तो देखा बस में चीख-पुकार मची थी। छोटे बच्चे सीटों से नीचे गिरे पड़े थे। लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूद रहे थे। मैं भी किसी तरह नीचे कूदी। मेरे उतरते ही एक के बाद एक तीन बसों में जोरदार धमाके हुए और वे आग की लपटों में घिर गईं।"
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वहीं, एक अन्य यात्री महिमा पांडे ने बताया, "सबसे पहले आगे चल रही एक अर्टिगा कार किसी वाहन से टकराई। उसके रुकते ही पीछे से आ रही बसें एक-दूसरे में घुसती चली गईं। हमारी बस में तीन बार टक्कर लगी। पलभर में ही आग लग गई। मेरा सारा सामान जलकर राख हो गया, लेकिन शुक्र है कि जान बच गई। यह मंजर मैं ताउम्र नहीं भूल पाऊंगी।"
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सरकारी आंकड़े और हकीकत में अंतर
\r\n\r\nप्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 66 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, मौके पर मौजूद चश्मदीदों और स्थानीय लोगों का दावा कुछ और ही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 20 एम्बुलेंस के जरिए 150 से ज्यादा लोगों को अस्पताल भेजा गया है। एम्बुलेंस कर्मचारी अमित कुमार ने बताया कि घायलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उनकी सही गिनती करना उस वक्त मुमकिन नहीं था। घायलों को वृंदावन के जिला संयुक्त चिकित्सालय और आस-पास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी घायल की हालत बहुत ज्यादा गंभीर नहीं बताई जा रही है।
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6 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, लगा लंबा जाम
\r\n\r\nहादसे की सूचना मिलते ही डीएम चंद्र प्रकाश सिंह, पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। कोहरे और आग की लपटों के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। कटर की मदद से बसों की बॉडी को काटकर फंसे हुए लोगों को निकाला गया। करीब 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हुआ।
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हादसे के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे के आगरा से नोएडा जाने वाले लेन पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने क्रेन की मदद से जल चुकी गाड़ियों और मलबे को हटाकर यातायात को सुचारू कराया।
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सीएम योगी ने लिया संज्ञान, मुआवजे का मरहम
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सीएम ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया है। प्रशासन को जांच के आदेश दिए गए हैं कि आखिर चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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सवाल जो अब भी कायम हैं
\r\n\r\nहर साल सर्दियों में यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के कारण ऐसे हादसे होते हैं। प्रशासन की तमाम चेतावनियों और स्पीड लिमिट कम करने के दावों के बावजूद, "मौत का यह हाईवे" और कितने लोगों की जान लेगा? आज का हादसा फिर एक बार सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करता है।
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नोट: यात्रियों से अपील है कि कोहरे के दौरान वाहनों की गति नियंत्रित रखें और फॉग लाइट्स का प्रयोग अवश्य करें। सावधानी ही सुरक्षा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.