\r\nयह निर्णय न केवल सेना में लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा, बल्कि महिलाओं के लिए देश की दूसरी रक्षा पंक्ति (Second Line of Defence) का हिस्सा बनने का एक नया और महत्वपूर्ण अवसर भी खोलेगा।
\r\nपायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी शुरुआत
\r\nइस नई पहल की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में करने की योजना है। इसका मतलब है कि पहले चरण में, महिलाओं को टेरिटोरियल आर्मी की केवल सीमित संख्या में बटालियनों में शामिल किया जाएगा।
\r\n शुरुआती चरण (Pilot Phase): पहले चरण में, मुख्य रूप से नॉन-डिपार्टमेंटल (Non-Departmental) टेरिटोरियल आर्मी यूनिट्स में महिला कैडर को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नॉन-डिपार्टमेंटल यूनिट्स वे होती हैं जो रेलवे, ऑयल एंड नेचुरल गैस (ONGC) या स्वास्थ्य सेवाओं जैसी विशिष्ट सरकारी सेवाओं से जुड़ी नहीं होती हैं, बल्कि इन्फैंट्री (Infantry) और होम एंड हरिकेन (Home & Hearth) बटालियनों से संबंधित होती हैं।
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- उद्देश्य: इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टेरिटोरियल आर्मी के मौजूदा ढांचे और प्रशिक्षण मानकों में महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं और सुरक्षा मानदंडों को सफलतापूर्वक एकीकृत किया जा सके। \r\n
- भविष्य का विस्तार: सफल क्रियान्वयन और आवश्यक आकलन के बाद, इस मॉडल को धीरे-धीरे टेरिटोरियल आर्मी की अन्य यूनिट्स और बटालियनों में विस्तारित किया जा सकता है। \r\n
\r\nटेरिटोरियल आर्मी (TA) भारतीय सेना की एक इकाई है, जिसे "नागरिकों की सेना" (Army of Citizens) के रूप में जाना जाता है।
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- भूमिका: TA का मुख्य कार्य भारतीय सेना को स्थिर गैरीसन ड्यूटी और नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए उपलब्ध कराना है, ताकि नियमित सेना (Regular Army) को जरूरत पड़ने पर अग्रिम मोर्चों (Front Lines) पर तैनात किया जा सके। \r\n
- संरचना: TA के सदस्य मुख्य रूप से स्वयंसेवक (Volunteers) होते हैं जो अपने सामान्य नागरिक जीवन (जैसे नौकरी या व्यवसाय) को बनाए रखते हैं और केवल प्रशिक्षण के लिए या आपातकालीन स्थिति में ही सेना को अपनी सेवाएं देते हैं। \r\n
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में, टेरिटोरियल आर्मी में केवल पुरुष ही अधिकारी और जवान के रूप में शामिल हो सकते हैं। \r\n
- सैन्य नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी \r\n
- यह फैसला भारतीय सशस्त्र बलों में महिला सशक्तिकरण की व्यापक नीति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय सेना ने महिलाओं के लिए कई दरवाजे खोले हैं: \r\n
- स्थायी कमीशन (Permanent Commission): सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेना की सभी 10 लड़ाकू सहायता और सेवा शाखाओं में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा रहा है। \r\n
- लड़ाकू भूमिकाएं: वायु सेना में लड़ाकू पायलटों को शामिल करने और नौसेना में कई फ्रंटलाइन भूमिकाओं में महिलाओं की तैनाती जैसे बड़े बदलाव पहले ही हो चुके हैं। \r\n
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA): NDA के माध्यम से महिला कैडेटों की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जो भविष्य के नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त कर रही है। \r\n
- टेरिटोरियल आर्मी में महिला कैडर की भर्ती का प्रस्ताव, भारतीय महिलाओं के लिए देश सेवा के नए आयाम खोलता है और यह पुष्टि करता है कि सैन्य और सुरक्षा भूमिकाओं में लैंगिक रूढ़िवादिता अब टूट रही है। \r\n
\r\nटेरिटोरियल आर्मी की चुनिंदा बटालियनों में महिला कैडर को शामिल करने का प्रस्ताव भारतीय सेना के लिए एक प्रगतिशील और महत्वपूर्ण निर्णय है। यह पायलट प्रोजेक्ट महिलाओं को देश की रक्षा में सीधे योगदान देने का अवसर देगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि टेरिटोरियल आर्मी एक अधिक समावेशी और व्यापक बल बन सके। इस पहल को जल्द ही अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.