नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए हालिया धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश हो रहा है। इस 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' की प्रमुख सदस्य 'मैडम सर्जन' डॉक्टर शाहीन दिल्ली ब्लास्ट की साजिश में एक अहम कड़ी साबित हो रही है। जांच एजेंसियों को उसके पास से कई पते वाले पासपोर्ट, पाकिस्तान और थाईलैंड सहित कई देशों की यात्राओं का विवरण मिला है, जिससे उसकी रहस्यमय गतिविधियों का खुलासा हो रहा है।READ ALSO:-खुशखबरी! क्या सस्ता होगा रसोई गैस सिलेंडर? भारत ने अमेरिका के साथ की ऐतिहासिक LPG डील, अब नहीं होगी सप्लाई की कमी!
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जांच एजेंसियां इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं कि इस पूरे आतंकी नेटवर्क ने 'D-6 Mission' के तहत 6 दिसंबर को देश भर में धमाके करने की योजना बनाई थी। इसका मकसद साल 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेना था।
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तीन पासपोर्ट और अलग-अलग ठिकाने: शाहीन का रहस्यमय अतीत
\r\n\r\nजांच में जुटी एजेंसियों को डॉक्टर शाहीन के पास से एक नहीं, बल्कि तीन पासपोर्ट मिले हैं, जिनमें अलग-अलग पते दर्ज हैं:
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- \r\n पहला पासपोर्ट: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के पते पर।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा पासपोर्ट: लखनऊ का पता दर्ज।\r\n \r\n
- \r\n तीसरा पासपोर्ट: फरीदाबाद का पता दर्ज, जिसमें इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का उल्लेख है, जहां उसका भाई परवेज नौकरी करता था।\r\n \r\n
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चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों पासपोर्ट में अभिभावक का नाम भी अलग-अलग है— एक में पिता, दूसरे में पति और तीसरे में भाई को अभिभावक दिखाया गया है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि शाहीन लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर काम कर रही थी।
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विदेश यात्रा का ब्यौरा: पाकिस्तान और थाईलैंड का कनेक्शन
\r\n\r\nडॉक्टर शाहीन दिल्ली ब्लास्ट की साजिश को पुख्ता बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संपर्क भी रखती थी। जांच एजेंसियों ने उसकी यात्रा हिस्ट्री खंगालते हुए पाया है:
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- \r\n शाहीन तीन बार पाकिस्तान की यात्रा कर चुकी है, जिससे उसके सीमा पार आतंकी संगठनों से गहरे संबंधों का पता चलता है।\r\n \r\n
- \r\n वह 2013 में कानपुर से नौकरी छोड़ने के बाद थाईलैंड भी गई थी।\r\n \r\n
- \r\n पाकिस्तान के अलावा उसने 6 बार दूसरे देशों की यात्रा भी की है।\r\n \r\n
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शाहीन के बैंक डिटेल्स, ट्रेवल हिस्ट्री, डिजिटल फुटप्रिंट्स, कॉल डिटेल्स और डायरी से कई अहम सबूत एजेंसियों के हाथ लगे हैं, जो इस मॉड्यूल के अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग (हवाला) और संचालन को समझने में मदद कर रहे हैं। अब तक केवल ₹20 लाख की हवाला फंडिंग का खुलासा हुआ है, जबकि डॉक्टर्स अपनी मोटी कमाई को भी मिशन के काम में लगा रहे थे।
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'D-6 Mission' के तहत धार्मिक स्थल और RSS कार्यालय थे निशाने पर
\r\n\r\n'D-6 Mission' के पीछे की मंशा साफ थी: 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस का बदला लेना। यही वजह है कि इस मॉड्यूल के निशाने पर प्रमुख धार्मिक स्थल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय जैसे संवेदनशील स्थान थे।
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इस आतंकी साजिश में शाहीन, डॉ. उमर और मुजम्मिल जैसे उच्च शिक्षित लोग शामिल थे, जो खुद को लो प्रोफाइल रखकर अपनी मोटी कमाई को इस मिशन में लगा रहे थे। NIA अब इस नेटवर्क के अन्य 'व्हाइट कॉलर' सदस्यों की तलाश कर रही है। डॉक्टर शाहीन दिल्ली ब्लास्ट मामले में उसकी गिरफ्तारी को इस पूरे मॉड्यूल को तोड़ने में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई की आशंका
\r\n\r\nदिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी लगातार चर्चा में है, क्योंकि यह मॉड्यूल इसी कैंपस से संचालित हो रहा था। विश्वविद्यालय पर अतिक्रमण और विस्तार के नाम पर अवैध भूमि अधिग्रहण के गंभीर आरोप हैं।
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बीते दिनों प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की पैमाइश की थी और अब माना जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में अतिक्रमण को लेकर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है। फरीदाबाद क्राइम ब्रांच ने भी जमीन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की है। इस यूनिवर्सिटी में आतंकी गतिविधियों को छिपाने के लिए अवैध निर्माण को ढहाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक आवश्यक कदम हो सकता है।
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'मैडम सर्जन' डॉक्टर शाहीन दिल्ली ब्लास्ट की जांच में मिली जानकारी एक गंभीर आतंकी साजिश की ओर इशारा करती है। तीन पासपोर्ट, पाकिस्तान की लगातार यात्राएं और 6 दिसंबर को बदला लेने का 'D-6 Mission' उसके आतंकी इरादों को स्पष्ट करता है। जांच एजेंसियां शाहीन के डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की जड़ें तलाश रही हैं, जिसका मुख्य केंद्र अल फलाह यूनिवर्सिटी था। यह केस दर्शाता है कि आतंकवाद किस तरह उच्च शिक्षित तबकों में भी अपनी पैठ बना रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.