मुंबई। 21वीं सदी नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक की सदी है। इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए भारत अब सिर्फ तकनीकी उपभोक्ता नहीं, बल्कि एआई और डीप-टेक (AI and Deep Tech) का विश्वस्तरीय निर्माता बनने की राह पर है। फिक्की (FICCI) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रख्यात वैज्ञानिक, पद्म विभूषण और सीएसआईआर (CSIR) के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. ए. माशेलकर ने यह दावा किया है कि भारत में दुनिया का अगला तकनीकी सुपरपावर बनने की पूरी क्षमता है। उनका मानना है कि यदि भारत अपनी तकनीकी क्षमता का सही दिशा में उपयोग करे, तो वह वैश्विक पटल पर एक अजेय शक्ति बन सकता है। READ ALSO:-Shreya Kalra Lock Upp 2: बिग बॉस फेम सोनिया बंसल ने श्रेया कालरा को बताया असली 'गेम चेंजर', नेटफ्लिक्स के शो में मचा रही हैं तहलका
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

विकसित भारत 2047 की मजबूत आधारशिला

\r\n\r\n
फिक्की लेजेंड्स सीरीज़ के तहत आयोजित इस विशेष व्याख्यान में उद्योग जगत और नीति निर्माण से जुड़े कई दिग्गजों ने हिस्सा लिया। डॉ. माशेलकर ने "Winning Through Innovation: Lessons for Industry and Society" (नवाचार के माध्यम से जीत: उद्योग और समाज के लिए सबक) विषय पर बोलते हुए एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
\r\n\r\n

 

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n
उन्होंने कहा कि "डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समावेशी नवाचार विकसित भारत 2047 की सबसे मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।" आज का भारत केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं (IT Services) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डीप साइंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और एआई के क्षेत्र में अपनी धाक जमा रहा है। डॉ. माशेलकर के अनुसार, भारत को अब वैश्विक तकनीकों का सिर्फ एक बड़ा बाजार (Consumer) बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे विश्वस्तरीय नवाचारों (Innovations) का मुख्य निर्माता (Creator) बनना होगा।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

'More from Less for More' का सफलता मंत्र

\r\n\r\n
डॉ. माशेलकर ने अपनी विश्व प्रसिद्ध अवधारणा "More from Less for More" (कम संसाधनों से अधिक लोगों के लिए अधिक उत्पादन) को भारत के तकनीकी और आर्थिक विकास का मूल मंत्र बताया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस दर्शन का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा, "नवाचार का प्राथमिक उद्देश्य कम से कम संसाधनों का उपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोगों तक विश्वस्तरीय और किफायती समाधान पहुंचाना होना चाहिए।" भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहां संसाधनों की अपनी सीमाएं हैं, वहां पश्चिमी देशों के महंगे तकनीकी मॉडल पूरी तरह सफल नहीं हो सकते। इसलिए, भारत को अपने नवाचार मॉडल में उत्कृष्टता (Excellence), किफायत (Affordability) और समावेशिता (Inclusivity) को अपनी पहचान बनानी होगी। यही वह दृष्टिकोण है जो एआई और डीप-टेक (AI and Deep Tech) को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएगा। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एआई और डीप-टेक (AI and Deep Tech) से स्वास्थ्य सेवा में क्रांति

\r\n\r\n
तकनीकी नवाचार कैसे समाज को बदल सकता है, इसके कई सटीक और व्यावहारिक उदाहरण डॉ. माशेलकर ने अपने भाषण में दिए। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र (Healthcare Sector) का उल्लेख किया, जहां भारतीय स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद चमत्कारिक परिणाम दिए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने स्मार्टफोन आधारित टीबी (TB) जांच, एआई (AI) आधारित रोग पहचान प्रणाली, डिजिटल मातृ स्वास्थ्य देखभाल और बिना रक्त निकाले एनीमिया (Anemia) की जांच करने वाली स्वदेशी तकनीकों का प्रमुखता से उल्लेख किया। ये ऐसे उदाहरण हैं जो साबित करते हैं कि भारत ने सीमित पूंजी और संसाधनों में भी वैश्विक स्तर के, सटीक और किफायती समाधान विकसित करने की अद्वितीय क्षमता हासिल कर ली है। यदि इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, तो यह न केवल भारत बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ (Global South) के लिए एक वरदान साबित होगा। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सरकार और उद्योग जगत से निवेश बढ़ाने की अपील

\r\n\r\n
भारत को एआई और डीप-टेक (AI and Deep Tech) का सुपरपावर बनाने के लिए केवल विजन की नहीं, बल्कि भारी निवेश की भी आवश्यकता है। डॉ. माशेलकर ने मंच से सरकार और निजी क्षेत्र दोनों से आह्वान किया कि वे डीप-साइंस, विघटनकारी तकनीकों (Disruptive Technologies) और उच्च जोखिम वाले अनुसंधान (High-Risk Research) में अपना निवेश बढ़ाएं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अक्सर निवेशक सुरक्षित रास्तों (Safe Bets) की तलाश में ई-कॉमर्स या फिनटेक में निवेश करते हैं, लेकिन असली तकनीकी छलांग डीप-टेक स्टार्टअप्स से ही आएगी जो क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, और एडवांस्ड मैटेरियल्स पर काम कर रहे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

फिक्की और उद्योग जगत की उत्साहजनक प्रतिक्रिया

\r\n\r\n
इस कार्यक्रम में उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान और नीति जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और डॉ. माशेलकर के विचारों का पुरजोर समर्थन किया। फिक्की के पूर्व अध्यक्ष आर. वी. कनोरिया ने इस अवसर पर कहा, "आने वाले समय में नवाचार ही भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व को तय करेगा।" उनका मानना है कि पारंपरिक उद्योगों को भी अब तकनीकी रूपान्तरण की आवश्यकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वहीं, भारत के प्रमुख ड्रोन स्टार्टअप 'ideaForge' के सह-संस्थापक एवं सीईओ अंकित मेहता ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "'More from Less for More' केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने वाले जन-केंद्रित नवाचार (People-Centric Innovation) का एक स्पष्ट मार्ग दिखाता है।" भारतीय स्टार्टअप्स आज इसी मार्ग पर चलकर वैश्विक समस्याओं के स्थानीय समाधान खोज रहे हैं। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
डॉ. आर. ए. माशेलकर का यह व्याख्यान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत तकनीकी विकास के एक महत्वपूर्ण दोराहे पर खड़ा है। यदि हम अपने अनुसंधान और विकास (R&D) इकोसिस्टम को मजबूत करते हैं और "More from Less for More" के मंत्र को अपनाते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत एआई और डीप-टेक (AI and Deep Tech) के क्षेत्र में दुनिया का निर्विवाद सुपरपावर बन जाएगा। विकसित भारत 2047 का सपना केवल आर्थिक समृद्धि का नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे तकनीकी रूप से सशक्त समाज का सपना है, जहां नवाचार का लाभ देश के हर एक नागरिक तक पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें