शामली (Local News Desk): उत्तर प्रदेश के शामली जिले में स्थित हसनपुर लोहारी गांव इन दिनों ग्रामीण विकास और स्वच्छता की एक नई इबारत लिख रहा है। किसी भी आदर्श गांव की सबसे पहली पहचान उसकी साफ-सफाई और वहां का स्वस्थ वातावरण होता है। इसी मूल मंत्र को अपनाते हुए और ग्रामीणों को एक स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त माहौल देने के उद्देश्य से, हसनपुर लोहारी गांव में एक विशेष और वृहद 'महा-सफाई अभियान' का आयोजन किया गया।Read also:-हरिद्वार-रुड़की में प्राधिकरण का चला 'हंटर': 5 स्थानों पर अवैध कॉलोनियों पर गरजा बुलडोजर, स्कूल का अवैध निर्माण भी हुआ सील!
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यह सिर्फ एक रस्मी अभियान नहीं था, बल्कि गांव की तस्वीर बदलने की एक ठोस पहल थी। इस पूरे महा-सफाई अभियान का सफल नेतृत्व ग्राम प्रधान सलीम कुरैशी के भाई नदीम कुरैशी ने किया। नदीम कुरैशी ने वातानुकूलित कमरों में बैठकर निर्देश देने के बजाय, खुद चिलचिलाती धूप में सड़कों पर उतरकर इस अभियान की कमान संभाली, जिसकी पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है।
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गांव के हर कोने तक पहुंची सफाई की लहर

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अक्सर देखा जाता है कि सफाई अभियान केवल मुख्य सड़कों या दिखावे की जगहों तक सीमित रह जाते हैं। लेकिन हसनपुर लोहारी में चलाया गया यह अभियान बेहद सघन और व्यापक था।
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अभियान के तहत गांव के मुख्य प्रवेश मार्गों से लेकर सबसे अंदरूनी और संकरी गलियों, मोहल्लों और चौपालों तक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नदीम कुरैशी ने खुद मौके पर खड़े रहकर सफाई कर्मियों की पूरी टीम का मार्गदर्शन किया और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर पूरे गांव का पैदल दौरा किया।
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इस सघन अभियान के दौरान गांव के उन अति-संवेदनशील हिस्सों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जहाँ पिछले काफी लंबे समय से जलभराव, गंदे पानी की निकासी न होने और कूड़े के ढेरों की गंभीर समस्या बनी हुई थी। ऐसे डार्क स्पॉट्स (Dark Spots) को चिन्हित कर वहां विशेष सफाई दल लगाए गए।
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आधुनिक उपकरणों से निकाली गई सालों की सिल्ट और प्लास्टिक

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ग्रामीण इलाकों में जलभराव का सबसे बड़ा कारण नालियों में जमा होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक और सिल्ट (कीचड़) होता है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सफाई टीम ने आधुनिक उपकरणों, बड़े फावड़ों और मशीनों की मदद ली।
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सफाई कर्मियों ने घंटों की कड़ी मेहनत के बाद सभी छोटे-बड़े नालों और मुख्य निकासी नालियों के अंदर गहराई तक जमा हो चुकी भारी सिल्ट और फंसे हुए प्लास्टिक कचरे को बाहर निकाला। जैसे ही यह सालों पुरानी गंदगी हटी, नालियों में रुका हुआ गंदा पानी तुरंत सुचारू रूप से बहने लगा। पानी की निकासी ठीक होने से उन रास्तों से भी बदबू खत्म हो गई, जहां से पहले ग्रामीणों का गुजरना भी दूभर होता था।
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नदीम कुरैशी का विजन: "बीमारियों से बचाव ही हमारी पहली प्राथमिकता"

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सफाई के इस महा-अभियान के दौरान मौजूद ग्रामीणों और युवाओं को संबोधित करते हुए नदीम कुरैशी ने अपने विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा:
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"हमारे गांव को संक्रामक बीमारियों से बचाना हमारी ग्राम पंचायत की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब नालियों में पानी रुकता है और कूड़ा सड़ता है, तो वहां जानलेवा मच्छर पनपते हैं। यही मच्छर मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल फीवर जैसी खतरनाक बीमारियों को जन्म देते हैं। हमारा लक्ष्य इलाज से पहले बीमारी की रोकथाम करना है।"
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इसके साथ ही, उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण सामाजिक अपील भी की। नदीम ने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि वे अपने घरों का गीला और सूखा कूड़ा खुले मैदानों या नालियों में न फेंकें। उन्होंने समझाया कि पंचायत का प्रयास तभी 100 प्रतिशत सफल हो सकता है, जब गांव का हर नागरिक स्वच्छता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझे।
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बीमारियों के खात्मे के लिए 'केमिकल ट्रीटमेंट' और एंटी-लार्वा का छिड़काव

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गंदगी हटाने और नालियों को साफ करने के बाद अभियान का दूसरा सबसे अहम चरण शुरू हुआ—बीमारियों के कीटाणुओं का समूल नाश।
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नाले-नालियों की गहरी सफाई कराने के तुरंत बाद, पूरी मेडिकल और सैनिटेशन टीम ने प्रभावित जगहों, कूड़ाघरों और नालियों के किनारों पर भारी मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder) और एंटी-लार्वा (Anti-Larva) दवाओं का छिड़काव किया। इस वैज्ञानिक तरीके से यह सुनिश्चित किया गया कि नालियों में पनप रहे मच्छरों के अंडे और लार्वा पूरी तरह नष्ट हो जाएं।
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इतना ही नहीं, गांव में जिन खुले स्थानों और गड्ढों में गंदा पानी ठहरता था, वहां तत्काल प्रभाव से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए साफ मिट्टी डलवाकर उन्हें समतल कराया गया। इससे भविष्य में उन जगहों पर जलभराव की संभावना को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
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युवाओं और संभ्रांत नागरिकों की भागीदारी ने बनाया इसे 'जन-आंदोलन'

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इस सफाई अभियान की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि यह केवल पंचायत या सफाई कर्मियों का काम बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने एक 'जन-आंदोलन' (Mass Movement) का रूप ले लिया।
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नदीम कुरैशी की इस सकारात्मक पहल को देखकर गांव के स्थानीय युवाओं, बुजुर्गों और संभ्रांत नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दिया। युवाओं ने खुद आगे आकर सफाई कर्मियों की मदद की और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम किया। ग्रामीणों ने इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि बरसात (Monsoon) के मौसम से ठीक पहले इस तरह की मुस्तैदी और दूरदर्शिता बेहद जरूरी थी। अगर यह काम नहीं होता, तो बारिश के दिनों में गांव की स्थिति नारकीय हो सकती थी।
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अन्य गांवों के लिए एक 'रोल मॉडल'

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हसनपुर लोहारी में ग्राम प्रधान सलीम कुरैशी के मार्गदर्शन और नदीम कुरैशी के जमीनी नेतृत्व में जो कार्य हुआ है, वह आज शामली जिले के अन्य गांवों के लिए एक 'रोल मॉडल' (Role Model) बन गया है। यह अभियान साबित करता है कि अगर नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो और जनता का साथ मिले, तो किसी भी गांव की तस्वीर को बदला जा सकता है। पंचायत की यह सक्रियता न केवल गांव को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि आने वाले समय में ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को भी बेहतर बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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